मेरठ का एक मकान. करीब 19 महीने से बंद. दरवाजे पर ताला लगा था और अंदर मौजूद थीं कुछ ऐसी चीजें, जो एक परिवार के लिए बहुत मायने रखती थीं. इसी घर में 3 मार्च 2025 को मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी. सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके बॉयफ्रेंड साहिल ने शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में छिपा दिए थे. ड्रम को सीमेंट से भर दिया गया था.
इस घटना के बाद पुलिस ने घर को सील कर दिया. वक्त बीतता रहा, लेकिन उस घर का दरवाजा बंद रहा. अब करीब 19 महीने बाद पुलिस की मौजूदगी में ताला खोला गया. सौरभ की जो भी चीजें वहां थीं, उन्हें निकाला गया और परिजनों को सौंप दी गईं. कमरे की हालत ऐसी थी कि वहां कपड़े बिखरे पड़े थे. दीवारों पर स्केच के निशान थे. बिखरी पड़ी चीजों में तस्वीरें थीं, बच्चों के खेलने वाले खिलौने थे और कई कागजात पड़े नजर आए.
जब सौरभ की मां रेणु देवी और भाई राहुल उर्फ बबलू उस कमरे में पहुंचे, जहां सौरभ की हत्या हुई थी, तो खुद को संभाल नहीं पाए. दोनों फूटकर रो पड़े. अब घर के मालिक ओमपाल सिंह ने बताया है कि दिवाली के बाद उस हिस्से में शुद्धिकरण के लिए पूजा और हवन कराया जाएगा, जहां हत्या हुई थी. घर की सफाई और रंगाई-पुताई की तैयारी भी शुरू हो गई है.
यह मकान मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके के इंदिरा नगर में है. सौरभ राजपूत और सौरभ की पत्नी मुस्कान यहां किराये पर रहते थे. 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या हुई. पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में छिपा दिया गया. ड्रम में सीमेंट भर दिया गया, ताकि शव के अवशेष छिपाए जा सकें.
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जब इस मामले का खुलासा हुआ, तो पूरे देश में इसकी चर्चा होने लगी. पुलिस ने मुस्कान और उसके साथी साहिल को 18 मार्च को गिरफ्तार कर लिया. जांच के दौरान घर को सील कर दिया गया. उसके बाद से मकान बंद था. अंदर सौरभ का सामान भी रखा हुआ था. बुधवार को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में घर के ताले तोड़े गए. पुलिस ने अंदर मौजूद सामान की लिस्ट बनाई. फिर उसे सौरभ के भाई राहुल उर्फ बबलू को सौंप दिया.
कमरे में पहुंचीं मां, बेटे की याद आई तो रो पड़ीं
घर का ताला खुलने के बाद सौरभ के परिवार वाले भी अंदर पहुंचे. लेकिन उनके लिए यह कोई सामान्य घर नहीं था. सौरभ की मां रेणु देवी और भाई राहुल उस कमरे में गए, जहां सौरभ की हत्या हुई थी. वहां पहुंचकर दोनों की आंखों से आंसू निकल पड़े. सोचिए, जिस जगह पर परिवार ने अपने बेटे और भाई को खोया हो, वहां दोबारा जाना कितना मुश्किल रहा होगा. घर में रखी चीजें, कमरे की दीवारें और वहां का माहौल- सब कुछ उस घटना की याद दिला रहा होगा.
करीब 19 महीने बाद परिवार को सौरभ का सामान तो मिल गया, लेकिन उस घर से जुड़ी यादों का बोझ शायद इतनी आसानी से नहीं जाएगा. मकान के मालिक ओमपाल सिंह ने बताया कि दिवाली के बाद घर के उस हिस्से में शुद्धिकरण कराया जाएगा, जहां सौरभ की हत्या हुई थी. इसके लिए हवन भी किया जाएगा. घर की सफाई शुरू कर दी गई है. इसके बाद रंगाई-पुताई कराई जाएगी. मकान को फिर से सामान्य हालत में लाने की कोशिश की जा रही है.
क्या था मेरठ का ब्लू ड्रम हत्याकांड?
सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में अधिकारी थे. वह अपनी पत्नी मुस्कान के साथ मेरठ के इंदिरा नगर में किराये के मकान में रहते थे. 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या कर दी गई. मुस्कान और उसके साथी साहिल ने हत्या के बाद शव के टुकड़े किए. फिर उन्हें एक नीले ड्रम में रखा और ड्रम को सीमेंट से भर दिया. बाद में घर से शव के अवशेष मिलने पर मामले का खुलासा हुआ.
पुलिस ने 18 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया. इस घटना के बाद 'ब्लू ड्रम' नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. अब करीब 19 महीने बाद उस घर के ताले खुल चुके हैं. सौरभ का सामान परिवार को सौंप दिया गया है और घर में शुद्धिकरण की तैयारी है. लेकिन जिस परिवार ने इस घर से अपने बेटे और भाई को खोया, उसके लिए यह जगह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि एक गहरी और तकलीफदेह याद भी है.
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