हिजाब और यूनिफॉर्म विवाद पर मायावती की नसीहत- 'कोर्ट का चक्कर छोड़ो, बैठकर सुलझाओ मसला'

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की याचिका खारिज किए जाने के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने हिजाब और यूनिफॉर्म के विवाद को कोर्ट-कचहरी में घसीटने के बजाय आपसी समझबूझ से सुलझाने और धर्म के नाम पर संकीर्ण राजनीति से बचने की सलाह दी है.

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बसपा प्रमुख मायावती बसपा प्रमुख मायावती

aajtak.in

  • लखनऊ ,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:37 AM IST

बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. उनकी ये प्रतिक्रिया इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रयागराज स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा की मुस्लिम छात्रा द्वारा हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करने के फैसले के संदर्भ में आई है. इसमें उन्होंने कहा है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए सेक्युलर संविधान के तहत सभी को धार्मिक मान्यताओं का अधिकार है. मायावती ने स्कूल में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब के मामलों को कोर्ट-कचहरी में घसीटने के बजाय लोकल स्तर पर स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन की आपसी सूझबूझ से सुलझाने पर जोर दिया है.

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हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की याचिकाकर्ता छात्रा की मांग को खारिज कर दिया था. न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने स्पष्ट किया कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं होता है. अदालत ने कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड एक समान, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन बनाए रखने के लिए है. केवल दावा करने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती.

स्थानीय स्तर पर समाधान की सलाह

मायावती ने कहा कि महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और पर्दे के जरिए आत्म-सम्मान की रक्षा जैसे मामलों को संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को ज्यादा तूल देकर कानूनी मुद्दा बनाने से बचना चाहिए. स्थानीय स्तर पर बात करके इसे सुलझाना सही होगा ताकि किसी को भी इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौका न मिल सके. साथ ही उन्होंने सभी से संवेदनशील मामलों पर टिप्पणी से बचने की अपील की.

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अदालत की यूनिफॉर्म पर सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए यूनिफॉर्म कोड जरूरी है. छात्रा के इस तर्क पर कि वह कक्षा 6 से 10 तक हिजाब पहनकर आती रही है, कोर्ट ने कहा कि पुरानी सहमति किसी कानूनी अधिकार को जन्म नहीं देती. अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए माना कि हिजाब इस्लामी आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और स्कूल प्रबंधन को अपना यूनिफॉर्म कोड लागू करने की अनुमति दी.

बदायूं विवाद पर भी की बात

मायावती ने अपनी पोस्ट में यूपी के बदायूं जिले का भी जिक्र किया. बदायूं में आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जारी विवाद और तनाव की स्थिति पर उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस मामले का तुरंत शांतिपूर्ण और उचित समाधान निकाला जाए ताकि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे.

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