लखनऊ में कैसरबाग पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मामले में दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार बाल अपचारियों को नियमानुसार पुलिस संरक्षण में लेकर किशोर न्याय बोर्ड भेजने की कार्रवाई की जा रही है. जांच के दौरान गिरोह से जुड़े भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के छह संदिग्ध खातों में जमा करीब 3.28 करोड़ रुपये की रकम को फ्रीज कराया गया है.
पुलिस के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर कैसरबाग पुलिस टीम ने लाटूश रोड स्थित आशीर्वाद होटल के कमरा नंबर 101 में छापेमारी की. मौके पर पांच युवक मौजूद मिले. कमरे की तलाशी लेने पर टॉमी हिलफिगर बैग से अलग-अलग बैंकों के छह एटीएम कार्ड, भारत पे-वन स्वाइप मशीन, एक जियो सिम कार्ड और दो बैंक पासबुक बरामद हुईं.
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पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर म्यूल अकाउंट खुलवाता था. साइबर फ्रॉड के जरिए हासिल की गई रकम इन्हीं बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी. इसके बाद गिरोह के सदस्य एटीएम से पैसा निकालकर उसे आगे मुख्य संचालकों के खातों तक पहुंचाते थे.
10 फीसदी कमीशन के बदले निकालते थे रकम
पुलिस के अनुसार, आरोपी एटीएम से नकदी निकालने के बाद उसे मुख्य संचालक मो. उमर और परवेज के SBI खातों में जमा करते थे. इस काम के बदले उन्हें 10 फीसदी कमीशन मिलता था. यानी साइबर ठगी से आने वाली रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर कैश में बदला जाता था.
पैसे की निकासी और बैंक में जमा करने के लिए गिरोह के सदस्य लखनऊ निवासी प्रिंस कुशवाहा की एचएफ डीलक्स बाइक का इस्तेमाल करते थे. बाइक का नंबर UP32RE 1141 है. पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए प्रिंस कुशवाहा को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब गिरोह के मुख्य संचालकों और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है.
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे शानो-शौकत की जिंदगी और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में इस धंधे में आए थे. उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि ऑनलाइन तरीके से होने वाले इस काम में पुलिस उन्हें कभी पकड़ नहीं पाएगी. इसी विश्वास के चलते वे लगातार साइबर फ्रॉड की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए निकालने और ट्रांसफर करने में जुटे थे.
9 शिकायतों से जुड़े मिले आरोपियों के तार
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि पकड़े गए आरोपियों से जुड़े नौ मामलों की शिकायतें पहले से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हैं. पुलिस इन शिकायतों और बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की जानकारी को खंगालकर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है. इस कार्रवाई को डीजीपी की ओर से चलाए जा रहे 'साई-वज्र' और अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) के 'डिजिटल कवच' अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई बताया गया है.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रितेश सिंह (21) निवासी देवकुली, सिधवलिया, गोपालगंज, बिहार और प्रिंस कुशवाहा (19) निवासी डिघिया, काकोरी, लखनऊ के रूप में हुई है. इसके अलावा चार बाल अपचारियों को पुलिस ने संरक्षण में लिया है. सभी को नियमानुसार किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष भेजने की प्रक्रिया की जा रही है.
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, पांच स्मार्टफोन, जिनमें आईफोन, रियलमी, इनफिनिक्स और वीवो के फोन शामिल हैं, एक भारत पे-वन स्वाइपिंग मशीन, 5 हजीर 600 रुपये नकद, एक जियो सिम कार्ड और दो बैंक पासबुक बरामद की हैं. इसके अलावा एचएफ डीलक्स बाइक भी पुलिस ने जब्त की है.
अन्य राज्यों में भी आपराधिक इतिहास तलाश रही पुलिस
कैसरबाग SHO अंजनी मिश्रा ने आजतक को बताया कि गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है. वहीं, इनके बारे में दूसरे राज्यों से भी आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन, NCRP पर दर्ज शिकायतों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
समर्थ श्रीवास्तव