झांसी: 7 साल के मासूम की आंख में घुसा खजूर का कांटा, डॉक्टरों ने बंद OT खुलवाकर बचाई रोशनी

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक 7 वर्षीय मासूम की आंखों की रोशनी बचाकर चिकित्सा जगत में मिसाल पेश की है. खेल-खेल में बच्चे की आंख की पुतली में खजूर का कांटा आर-पार हो गया था, जिसे बेहद जटिल ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

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एक घंटे के ऑपरेशन के बाद निकला खजूर का कांटा.(Photo:ITG) एक घंटे के ऑपरेशन के बाद निकला खजूर का कांटा.(Photo:ITG)

प्रमोद कुमार गौतम

  • झांसी,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां खेल-खेल में 7 साल के मासूम की आंख में खजूर का कांटा घुसकर आर-पार हो गया. झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए बंद हो चुकी ऑपरेशन थिएटर को दोबारा खुलवाया और एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे की आंख बचा ली.

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झांसी के टोड़ीफतेहपुर इलाके के सिजवां निवासी पंकज कुशवाहा का बेटा देव कुशवाहा (7) शनिवार को घर के बाड़े में खेल रहा था. परिजनों के अनुसार, देव लकड़ी से खिलौना ट्रैक्टर बना रहा था.

इसी दौरान लकड़ी तोड़ते समय खजूर का एक तीखा कांटा उसकी आंख की पुतली में जा घुसा और सीधे आर-पार हो गया. बच्चे की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे आनन-फानन में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया.

डॉक्टरों ने पेश की मिसाल, बंद ओटी को फिर खुलवाया 
मेडिकल कॉलेज में नेत्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र कुमार ने जब बच्चे की जांच की, तो हालात बेहद गंभीर थे. उस समय ऑपरेशन थिएटर भी बंद हो चुका था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. जितेंद्र ने तुरंत टीम को बुलाया और ऑपरेशन शुरू कराया.

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डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. सुरभि गुप्ता और डॉ. यशस्वी गोयंका की टीम ने करीब एक घंटे तक चले पेचीदा ऑपरेशन के बाद आंख की पुतली में फंसे कांटे को बाहर निकाल लिया .डॉक्टरों का कहना है कि यदि ऑपरेशन में एक दिन की भी देरी होती, तो बच्चा हमेशा के लिए अपनी आंख खो सकता था.

आंख तो बची, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं 
डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन सफल रहा है और आंख की रोशनी सुरक्षित है. हालांकि, कांटे की चोट इतनी गहरी थी कि बच्चे की काली पुतली और कॉर्निया डैमेज हो गया है. साथ ही उसे मोतियाबिंद की समस्या भी हो गई है. भविष्य में बच्चे को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन समय रहते इलाज मिलने से वह पूरी तरह अंधा होने से बच गया.

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