सान्वी की शादी: करंट ने छीन लिया था पिता, बेटी की वेडिंग में मोहल्ला बना 'परिवार', ऐसे हुई विदाई

यूपी के हरदोई में शादी से ठीक पहले संविदा बिजलीकर्मी महेंद्र की करंट लगने से मौत हो गई. इस दुखद घड़ी में कछौना नगर पंचायत अध्यक्ष राधारमण शुक्ला देवदूत बनकर सामने आए. उन्होंने पूरे मान-सम्मान के साथ बेटी सान्वी की शादी का खर्च उठाया और खुद पिता बनकर उसका कन्यादान किया.

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शादी से कुछ दिन पहले हो गई थी दुल्हन के पिता की मौत (Photo- ITG) शादी से कुछ दिन पहले हो गई थी दुल्हन के पिता की मौत (Photo- ITG)

प्रशांत पाठक

  • हरदोई ,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में इंसानियत की मिशाल पेश की गई. कछौना कस्बे वालों ने सान्वी की शादी की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाई. बीते दिनों सान्वी के पिता की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी. शादी से ठीक पहले इस दुखद घटना से परिवार में मातम पसर गया था. ऐसे में मोहल्ले वाले 'देवदूत' बनकर आगे आये.

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आपको बता दें कि 9 मई को करंट लगने से संविदा बिजली कर्मी महेंद्र उर्फ गुड्डू की अचानक मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. बेटी की शादी तय थी तिलक भी हो चुका था, लेकिन पिता के निधन के बाद पूरे परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि अब बेटी की शादी कैसे होगी. लेकिन कस्बे की नगर पंचायत अध्य्क्ष ने परिवार की उस परेशानी को तब दूर कर दिया जब बेटी की शादी का जिम्मा खुद उठाया और शादी की तैयारी से लेकर कन्यादान करने का अपना वचन निभाया. बीजेपी नेता के इस कदम के बाद पूरे इलाके में उनकी नेकनीयती की चर्चा है.

दरअसल, कछौना कस्बे के पश्चिमी बाजार के रहने वाले महेंद्र उर्फ गुड्डू नगर पंचायत कछौना में संविदा पर बिजली मिस्त्री थे. 9 मई को एक ज्वैलरी शॉप के पास बिजली ठीक करने के दौरान टीनशेड में उतरे करंट की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई. परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. जीवित रहते महेंद्र ने बड़ी बेटी सान्वी का विवाह सीतापुर निवासी ओम के साथ तय था लेकिन हादसे में पिता की असमय मौत से शादी की तैयारियां अधूरी रह गईं.

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घटना के दिन ही कछौना नगर पंचायत अध्यक्ष राधारमण शुक्ला उर्फ पंकज शुक्ला ने बेटी की शादी पूरे मान-सम्मान और धूमधाम से कराने का संकल्प लिया था. शनिवार को उन्होंने अपना वादा निभाते हुए शादी की सभी व्यवस्थाएं कराईं. इतना ही नहीं, मंडप में स्वयं पिता की भूमिका निभाते हुए सान्वी का कन्यादान किया और द्वारचार से लेकर अन्य सभी रस्में पूरी कराईं.

इस भावुक पल के दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे और सभी की आंखें नम हो गईं. रविवार सुबह सान्वी की विदाई पूरे सम्मान के साथ हुई. परिजनों ने कहा कि राधारमण शुक्ला उर्फ पंकज शुक्ला ने सिर्फ एक वादा नहीं निभाया, बल्कि एक बेटी के सिर से उठ चुके पिता के साये की कमी को अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से भरने का प्रयास किया. कछौना की यह शादी इंसानियत, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल बन गई, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है.

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