उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में हुई अब तक की सबसे बड़ी नकदी चोरी का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. यहां थोक परचून व्यापारी पंकज अग्रवाल के घर से चोरी हुई करोड़ों की नकदी के मामले में पुलिस ने 2 बाल अपचारियों समेत 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इनके कब्जे से एक करोड़ 28 हजार 99 हजार 310 नकद बरामद किए हैं.
शहर कोतवाली इलाके के रेलवेगंज में चोरी की साजिश घर में काम करने वाले तीन घरेलू नौकरों ने रची थी. इन्हीं नौकरों ने घर की अलमारी, चाबी और नकदी की पूरी जानकारी अपने साथियों को दी, जिसके बाद पूरी वारदात को अंजाम दिया गया.
16-17 जुलाई की रात हुई इस वारदात की पटकथा तीन घरेलू नौकरों ने अपने साथियों अजय शुक्ला, शिवम और बदन के साथ मिलकर लिखी थी.
घर में काम करने वाले नौकरों को भली-भांति पता था कि घर में कितना कैश रहता है और अलमारी की चाभी कहां रखी जाती है. उन्होंने बाहरी साथियों के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई.
योजना के तहत नौकरों ने परिवार के रात के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. जब व्यापारी पंकज अग्रवाल और उनका परिवार गहरी नींद में सो गया, तो अजय शुक्ला और बदन घरेलू नौकरों की मदद से छत के रास्ते मकान में दाखिल हुए, जबकि शिवम बाहर पिकअप लेकर खड़ा रहा.
तकिए के नीचे से चाभी
आरोपियों ने सो रहे व्यापारी के तकिए के नीचे से अलमारी की चाभी निकाली और नोटों से भरे 8 बैग पिकअप में लादकर फरार हो गए.
पैसा छिपाने के लिए लखनऊ तक फैलाया नेटवर्क
घटना के बाद जब व्यापारी ने मामला दर्ज कराया तो पुलिस ने सर्विलांस और SOG की मदद से जांच शुरू की. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि चोरी की रकम इतनी विशाल थी कि उसे ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने लखनऊ के मड़ियावा निवासी दीपक साहू, सनी गुप्ता, अमान के अलावा हरदोई के परम किशोर, केशव, शिवम, सनी बाल्मीकि, नीरज, प्रिंस और महफूज जैसे लोगों को नकदी छिपाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. पुलिस ने जब कड़ियां जोड़ीं तो 1.29 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया गया.
अब व्यापारी पर मंडराया आयकर
भले ही हरदोई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए व्यापारी का करोड़ों रुपया बरामद कर राहत दी हो, लेकिन डिजिटल दौर में इतने बड़े पैमाने पर नकद में व्यापार करने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. व्यापारी ने प्राथमिकी दर्ज कराते समय भी नकद राशि का सही आंकड़ा नहीं बताया था.
GST का खतरा
इतनी बड़ी मात्रा में कैश मिलने के बाद अब आयकर विभाग (Income Tax) और जीएसटी (GST) विभाग के सक्रिय होने और जांच बिठाने की पूरी आशंका जताई जा रही है.
प्रशांत पाठक