चाय की दुकान, हाथ में लैपटॉप, आंखों में IAS का सपना, गोरखपुर की 3 बहनों की कहानी

गोरखपुर की तीन बहनें चाय का स्टॉल चलाने के साथ UPSC की तैयारी कर रही हैं. बड़ी बहन वर्तिका ने पिता को पैरालिसिस अटैक आने के बाद परिवार को संभालने के लिए स्टॉल शुरू किया. दोनों छोटी बहनें भी इसमें उनका साथ देती हैं. तीनों बहनों का सपना IAS बनना है और दुकान से समय निकालकर पढ़ाई करती हैं.

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स्टॉल पर चाय बनाते-बनाते लैपटॉप खोलकर पढ़ाई करती हैं बहनें. (Photo: Screengrab) स्टॉल पर चाय बनाते-बनाते लैपटॉप खोलकर पढ़ाई करती हैं बहनें. (Photo: Screengrab)

रवि गुप्ता

  • गोरखपुर ,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

गोरखपुर की सड़कों पर आपको चाय के कई स्टॉल दिखाई देंगे, लेकिन बरगदवा क्षेत्र में लगा एक चाय का स्टॉल थोड़ा अलग है. यहां चाय बेचने वाली तीन बहनों की आंखों में सिर्फ रोजमर्रा की कमाई का सपना नहीं है, बल्कि UPSC क्रैक कर IAS बनने का सपना भी है. दुकान पर चाय बनाते और ग्राहकों को संभालते हुए ये बहनें अपनी पढ़ाई भी जारी रखती हैं. इन तीनों बहनों में बड़ी बहन का नाम वर्तिका उपाध्याय है. वर्तिका ग्रेजुएशन कर चुकी हैं और UPSC की तैयारी कर रही हैं. परिवार की परिस्थितियां बदलीं तो उन्हें अपनी पढ़ाई के साथ घर की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ी. पिता को पैरालिसिस अटैक आने के बाद घर की स्थिति को संभालने के लिए वर्तिका ने करीब तीन महीने पहले चाय का स्टॉल शुरू किया.

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वर्तिका के लिए चाय का स्टॉल सिर्फ एक दुकान नहीं है. यह उनके परिवार को संभालने का जरिया है. वह स्टॉल पर चाय बेचती हैं और जब दुकान से समय मिलता है तो अपनी पढ़ाई के लिए घर चली जाती हैं. वर्तिका के इस काम में उनकी दोनों छोटी बहनें भी साथ देती हैं. दोनों अभी पढ़ाई कर रही हैं. एक बहन फर्स्ट ईयर की छात्रा है, जबकि दूसरी सेकंड ईयर में पढ़ रही है. दोनों बहनों का सपना भी UPSC क्रैक करना है. यानी तीनों बहनें पढ़ाई के साथ-साथ चाय का स्टॉल भी संभाल रही हैं. दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही के बीच उनका लक्ष्य साफ है. उन्हें UPSC की परीक्षा पास करके IAS बनना है.

सुबह पढ़ाई, फिर स्टॉल, समय मिला तो घर जाकर तैयारी

वर्तिका बताती हैं कि स्टॉल की जिम्मेदारी के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं है. इसके बावजूद वह अपनी तैयारी जारी रखे हुए हैं. वह सुबह पढ़ाई करके निकलती हैं और दुकान से समय मिलने पर घर जाकर ऑनलाइन UPSC की तैयारी करती हैं. फिलहाल वह करीब 5 से 6 घंटे पढ़ाई के लिए निकाल पा रही हैं. समय कम होने के बावजूद उनका मानना है कि सिर्फ घंटों की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि पढ़ाई की क्वालिटी भी जरूरी है. वर्तिका अपनी तैयारी को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं. उनके लिए दुकान चलाना और पढ़ाई दोनों एक साथ करना चुनौती है, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा है.

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वर्तिका के लिए IAS बनने की प्रेरणा IAS अधिकारी सृष्टि देशमुख हैं. वह उन्हें अपना रोल मॉडल मानती हैं. सृष्टि देशमुख से प्रेरित होकर वर्तिका ने भी IAS बनने का सपना संजोया है. उनकी दोनों छोटी बहनें भी इसी सपने के साथ पढ़ाई कर रही हैं. बड़ी बहन की तरह वह भी UPSC की तैयारी करना चाहती हैं. परिवार की जिम्मेदारियों और पढ़ाई के बीच तीनों बहनों ने अपने लक्ष्य को बनाए रखा है.

इन बहनों के चाय के स्टॉल की एक खास बात इसका नाम भी है. उन्होंने इसका नाम 'Believer' रखा है. इसका मतलब है खुद पर भरोसा. इस नाम के पीछे इन बहनों की सोच भी नजर आती है. परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उन्हें खुद पर भरोसा है और वह अपने सपने को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं.

करीब तीन महीने से वर्तिका यह बिजनेस चला रही हैं. उनका कहना है कि फिलहाल स्टॉल से इतना ही पैसा निकल पाता है कि खर्च चल सके. हालांकि इस दौरान उन्होंने बिजनेस की बारीकियों को भी समझना शुरू कर दिया है. यानी UPSC की तैयारी के साथ वर्तिका ने कारोबार की दुनिया को भी करीब से देखा है. चाय बनाना, ग्राहकों से बात करना और दुकान को संभालना अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है.

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'Believer' चाय स्टॉल की एक और बात इसे खास बनाती है. अगर कोई ग्राहक पैसे देने की स्थिति में नहीं है तो ये बहनें उससे पैसे नहीं लेतीं. खासकर बुजुर्ग या रिक्शा चलाने वाले लोग अगर चाय पीने आते हैं और उनके पास पैसे नहीं होते तो बहनें उनसे पैसे नहीं मांगतीं. उनके लिए ऐसे लोगों की मदद करना भी उनके स्टॉल का हिस्सा है. इस तरह यह छोटी सी चाय की दुकान सिर्फ चाय बेचने की जगह नहीं रह गई है. यहां एक तरफ परिवार को संभालने की कोशिश है, दूसरी तरफ UPSC की तैयारी है और साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए मदद का भाव भी है.

चाय के स्टॉल से UPSC तक का सफर

वर्तिका फिलहाल चाय के स्टॉल और पढ़ाई दोनों को साथ लेकर चल रही हैं. पिता की तबीयत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने काम शुरू किया, लेकिन अपने IAS बनने के सपने को पीछे नहीं छोड़ा. उनकी दोनों छोटी बहनें भी इस सफर में उनके साथ हैं. तीनों बहनों की पढ़ाई और काम साथ-साथ चल रहा है.

वर्तिका के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती समय की है. वह दुकान संभालने के बाद बचा हुआ समय पढ़ाई में लगा रही हैं. सुबह भी पढ़ती हैं और दुकान से समय मिलने पर घर जाकर ऑनलाइन पढ़ाई करती हैं. इन तीनों बहनों का सपना बड़ा है. चाय के स्टॉल से शुरू हुआ यह सफर उन्हें कहां तक ले जाएगा, यह समय बताएगा. लेकिन फिलहाल गोरखपुर की ये तीन बहनें अपने काम और पढ़ाई दोनों को साथ लेकर UPSC की तैयारी में जुटी हैं.
 

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