लखनऊ में बाढ़! गोमती रिवरफ्रंट की 'फूड वैली' बंद, फैजुल्लागंज में चल रही नाव, हनुमान सेतु मंदिर में घुसा पानी

लखनऊ में गोमती नदी उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान (108.14 मीटर) पर पहुंचने से रिहायशी इलाके, हनुमंत धाम व रिवरफ्रंट जलमग्न हो गए हैं. फैजुल्लागंज और ग्रामीण इलाकों (बीकेटी) में बाढ़ के हालात हैं. राहत कार्य के लिए 30 नावें, 4 शिविर और ड्राई राशन दिए जा रहे हैं. डीएम और वरिष्ठ अधिकारियों ने निरीक्षण कर 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया है.

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लखनऊ में गोमती नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुसा (Photo- ITG) लखनऊ में गोमती नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुसा (Photo- ITG)

अंकित मिश्रा

  • लखनऊ ,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:07 AM IST

यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. पिछले कई दिनों से नदी लगातार उफान पर है. हालात ये हैं कि गोमती का जलस्तर सामान्य से करीब आठ फीट ऊपर चढ़कर 108.14 मीटर के खतरनाक निशान तक पहुंच गया है. नदी के बढ़ते जलस्तर ने शहर के रिहायशी और धार्मिक स्थलों को अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है.

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पानी का फैलाव इस कदर बढ़ गया है कि हनुमंत धाम मंदिर (हनुमान सेतु मंदिर) परिसर, प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास भारी जलभराव हो गया है. एहतियात के तौर पर गोमती रिवरफ्रंट स्थित 'फूड वैली' को फिलहाल अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.

प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर में भी गोमती का पानी प्रवेश कर चुका है. मंदिर के मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी के मुताबिक, मंदिर में पानी आ चुका है. मां गोमती, श्री हनुमान जी के चरणों तक पहुंच चुकी हैं और शीघ्र स्नान कराने वाली हैं. स्थिति भयावह हो गई है. 2006-07 के बाद यह हालत आई है, जब इतना जलस्तर बढ़ा है.

पुरोहित विनोद तांगड़ी के अनुसार, गोमती के उफान से डाउनस्ट्रीम की 20 से 25% आबादी प्रभावित हुई है. जलस्तर अत्यधिक बढ़ने पर परंपरा के अनुसार मंदिर के बाहर से पूजन-अर्चन का निर्णय लिया गया है. इस दौरान हनुमान जी पर लाल चादर रखी जाएगी और दूर से ही भोग व आरती अर्पित की जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जलमग्न होने पर हनुमान जी 'विश्राम अवस्था' में चले जाते हैं, इसलिए उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया जाता. पुरोहित ने बताया कि वर्ष 1956 से 1983-84 तक गोमती नदी हर साल हनुमान जी को स्नान कराती थी.

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उधर, ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का संकट गहराया हुआ हैतो  बख्शी का तालाब तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में पानी का स्तर हल्का जरूर गिरा है, लेकिन स्थानीय लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैंतो  प्रशासन ने ग्रामीणों की आवाजाही और मदद के लिए 30 नावें तैनात की हैं. इसके अलावा 4 राहत शिविर और सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहां विस्थापितों को सुरक्षित रखने के साथ भोजन और बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं. 

हालात की गंभीरता को देखते हुए डीएम विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने खुद मोर्चा संभालातो  दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने नाव पर सवार होकर प्रभावित इलाकों का दौरा किया और जमीनी हकीकत परखीतो  डीएम ने राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी हैतो  स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में मेडिकल किट और क्लोरीन की गोलियां बांटनी शुरू कर दी हैं, वहीं पशुपालन विभाग की टीमें मवेशियों के लिए चारे-भूसे का इंतजाम करने के साथ बीमार पशुओं का इलाज कर रही हैं.

फैजुल्लागंज में भी स्थिति नाजुक बनी हुई है. यहां भी डीएम विशाख जी ने नाव से पहुंचकर प्रभावित परिवारों को ड्राई राशन किट बांटीं और उनकी परेशानियां सुनीं. दूसरी तरफ, नगर आयुक्त गौरव कुमार ने फैजुल्लागंज का दौरा कर ड्रेनेज, फॉगिंग और बचाव कार्यों की समीक्षा की. नगर निगम की ओर से पंपसेट लगाकर रिहायशी इलाकों से पानी निकाला जा रहा है, जबकि मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए पहली बार ड्रोन के जरिए एंटी-लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है.

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