उत्तर प्रदेश के बांदा में 13 वर्षीय नाबालिग के अपहरण और उसके साथ कथित दुष्कर्म की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, बच्ची ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए आरोपियों का लगातार विरोध किया, उनके चंगुल से निकलने में सफल रही और सीधे पुलिस तक पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद पुलिस ने देर रात अभियान चलाकर दोनों आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया.
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने उसी रात पांच विशेष टीमों का गठन किया. सीसीटीवी फुटेज, ई-रिक्शा नंबरिंग सिस्टम और ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई. पुलिस का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था की वजह से मामले का जल्द खुलासा संभव हो सका.
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आरोपियों की तलाश के दौरान पुलिस टीम की घेराबंदी पर दोनों ने कथित तौर पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. इस दौरान दो पुलिस कांस्टेबल भी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.
घर से निकली बच्ची को ई-रिक्शा चालक ने झांसे में लिया
पुलिस के अनुसार, मर्का थाना क्षेत्र की रहने वाली 13 वर्षीय बच्ची 24 जुलाई की शाम किसी बात से नाराज होकर अपने ननिहाल जाने के लिए घर से निकली थी. रास्ते में उसे ई-रिक्शा चालक नरेश मिला, जिसने उसे ननिहाल छोड़ने का भरोसा दिया.
आरोप है कि नरेश बच्ची को शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित मेडिकल कॉलेज के पास सुनसान इलाके में ले गया. वहां उसने अपने साथी एजाज को बुला लिया. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की कोशिश की गई.
बच्ची ने लगातार विरोध किया और आरोपियों के सामने झुकने से इनकार कर दिया. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने उसे चुप कराने और जान से मारने की नीयत से उसका गला दबाने का भी प्रयास किया.
साहस दिखाकर पुलिस तक पहुंची पीड़िता
पुलिस के मुताबिक, बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी. उसने आरोपियों का विरोध जारी रखा, मौका मिलते ही उनके चंगुल से निकलकर भागी और कुछ दूरी पर गश्त कर रही डायल-112 पुलिस टीम तक पहुंच गई.
पुलिस टीम बच्ची को थाने लेकर पहुंची और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी जानकारी दी गई. इसके बाद एएसपी मेविस टॉक के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने सीसीटीवी कैमरों, ई-रिक्शा नंबरिंग कोड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई.
पुलिस का कहना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति अभियान, ऑपरेशन त्रिनेत्र और ई-रिक्शा नंबरिंग व्यवस्था ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
पुलिस पर फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की लोकेशन मिलने के बाद जब टीम ने घेराबंदी की तो दोनों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में एजाज के पैर में गोली लगी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
मुठभेड़ के दौरान दो पुलिस कांस्टेबल भी घायल हुए. सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है. पुलिस के अनुसार, एजाज के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है.
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान एजाज और नरेश के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
सिद्धार्थ गुप्ता