गोरखपुर के थाना शाहपुर क्षेत्र से जुड़ा पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस ने इसकी जांच की. जांच में वीडियो में दिखाई जा रही घटना फर्जी पाई गई. पुलिस के मुताबिक, वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है, जबकि अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहा व्यक्ति भी वास्तविक अधिवक्ता नहीं है.
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यूज और वीडियो को वायरल करने के उद्देश्य से पूरी घटना को कथित तौर पर स्क्रिप्ट के आधार पर तैयार किया गया था. वीडियो के माध्यम से पुलिस और अधिवक्ताओं की छवि को धूमिल करने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है.
फिलहाल, मामले का संज्ञान लेते हुए थाना शाहपुर में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. पुलिस ने इस मामले में दो अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. पुलिस वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है.
एसपी सिटी निमिष पाटिल ने वीडियो बाइट के माध्यम से बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्यों के आधार पर अफवाह फैलाने और झूठे वीडियो बनाकर वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या दावे को बिना सत्यापन के सच न मानें और उसे आगे वायरल करने से बचें. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर भ्रामक एवं फर्जी सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी.
आपको बता दें कि गोरखपुर में रविवार को एक पुलिसवाले को सड़क पर जूते से मारने का वीडियो सामने आया था. इसमें वकील की ड्रेस में दिख रहा युवक बाइक सवार पुलिसवाले को रोकता है और फिर बहस के बाद मारपीट करने लगता है. इसके बाद पुलिसवाला भी युवक को पीटने लगता है. हालांकि, बाद में ये सब स्क्रिप्टेड निकला. व्यूज और वायरल कंटेंट के लिए इस वीडियो को बनाया गया था.
गजेंद्र त्रिपाठी