विपक्षी दल जहां 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए एकजुट हो रहे हैं, वहीं बीजेपी मुस्लिम बहुल सीटों पर भी विपक्ष को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके लिए पार्टी अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम समुदाय से 'मोदी मित्र' बना रही है. प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में पांच हजार मोदी मित्र बनाने का लक्ष्य है और उनसे 10 वोटों की उम्मीद कर रही भाजपा का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की 65 मुस्लिम बहुल सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों को अल्पसंख्यकों के 50,000 वोट मिलें.
पीएम ने एमपी में किया था जिक्र
बीजेपी लंबे समय से पिछड़े मुसलमानों यानी पसमांदा मुसलमानों पर काम कर रही है, जिनकी मुसलमानों में करीब 85 फीसदी भागीदारी है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मध्य प्रदेश की एक रैली में इस वर्ग के लिए चिंता व्यक्त कर इस वर्ग को संदेश देने की कोशिश की थी. ये सिर्फ एक मंच की बात नहीं है, बल्कि बीजेपी जमीनी स्तर पर भी मुस्लिम वोट हासिल करने की रणनीति के साथ काम कर रही है, जिसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
65 लोकसभा सीटों पर तैनात होंगे 'मोदी मित्र'
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी ने देशभर में 65 ऐसी लोकसभा सीटों की पहचान की है, जहां अल्पसंख्यक आबादी 30 फीसदी से ज्यादा है. इन सीटों पर जो 'मोदी मित्र' बन रहे हैं वो भाजपा कैडर के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आम लोग हैं. ये लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र से प्रभावित या सहमत हैं और उन्हें मोदी मित्र बनाकर प्रमाणपत्र दिया जा रहा है कि अब वे इस विचारधारा से जुड़ रहे हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 36 हजार से ज्यादा सदस्य मोदी मित्र बन चुके हैं. रणनीति इस तरह तैयार की गई है कि इन सभी संसदीय सीटों के लिए एक केंद्रीय प्रभारी, एक राज्य प्रभारी बनाया गया है. इनके अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक प्रभारी और 30 सह प्रभारी बनाए गए हैं. प्रत्येक सह-प्रभारी को तीस-तीस मोदी मित्र बनाने का काम सौंपा गया है. इस तरह प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 900 और लोकसभा क्षेत्र में पांच हजार मोदी मित्र बनाने की तैयारी है.
आंकड़ों के मुताबिक, 13 राज्यों में 65 मुस्लिम बहुल सीटें हैं और सबसे ज्यादा 13 सीटें उत्तर प्रदेश से ही हैं, वो भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 12 और केरल में वायनाड समेत 7 संसदीय सीटें हैं. बीजेपी की नजर असम की सात सीटों पर भी है. इस रणनीति में बिहार और जम्मू-कश्मीर की चार-चार सीटें और मध्य प्रदेश की तीन सीटें शामिल हैं.
दानिश आजाद ने मुस्लिमों को है मोदी सरकार पर भरोसा
इंडिया टुडे से बात करते हुए, यूपी के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि पार्टी अल्पसंख्यकों के लाभ के लिए काम कर रही है और मोदी सरकार जिस तरह इनके लाभार्थीपरक योजनाओं के लिए काम कर रही है, उससे समुदाय को मोदी सरकार पर बहुत भरोसा है. समुदाय का मानना है कि केवल बयानबाजी ही नहीं हुई है बल्कि धरातल पर भी काम हुआ है जिसके परिणामस्वरूप भाजपा को स्थानीय और साथ ही विधानसभा चुनावों में जनसमर्थन मिला है.
विपक्ष का निशाना
उधर, समाजवादी पार्टी ने इस मुहिम पर निशाना साधते हुए कहा है कि बीजेपी सरकार न सिर्फ पिछड़ा और दलित बल्कि मुस्लिम विरोधी भी है. सपा प्रवक्ता अमीक जामई ने कहा, 'बीजेपी अब मुसलमानों का वोट चाहती है लेकिन उन्हें सुरक्षा नहीं दे पाई है. इसी तरह, पसमांदा मुस्लिम समुदाय को सामाजिक आर्थिक सहायता के मामले में कोई लाभ नहीं दिया गया है, चाहे एमएसएमई हो या कोई अन्य लघु उद्योग. यह सिर्फ एक राजनीतिक हथकंडा है और पार्टी केवल चुनावी लाभ के लिए मुसलमानों को साधने की कोशिश कर रही है.'
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आवाज उठाते हुए कहा कि बीजेपी को अल्पसंख्यक होने का प्रमाणपत्र देने के बजाय उन्हें उनका अधिकार देना चाहिए. उन्होंने कहा, 'समुदाय डर में जी रहा है और गौहत्या तथा अन्य सांप्रदायिक मुद्दों के झूठे आरोप में उन्हें निशाना बनाया गया है. समुदाय को सम्मान देने के बजाय उन्हें निशाना बनाया गया है और पार्टी इस तरह के अभियानों से केवल चुनावी लाभ चाहती है. वे अल्पसंख्यकों का वोट चाहते हैं लेकिन उन्हें उनका दर्जा देना नहीं चाहते, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वे उन्हें लोकसभा चुनाव में राजनीतिक भागीदारी देंगे.'
अभिषेक मिश्रा