रैलियों से आगे BJP का स्मार्ट नेटवर्क: बैठक से लेकर GPS लोकेशन तक, 'सरल ऐप' से कार्यकर्ताओं की मॉनिटरिंग

भारतीय जनता पार्टी को क्यों 'इलेक्शन मशीन' कहा जाता है, इसका खुलासा कानपुर में हुआ. बीजेपी कानपुर जिला उपाध्यक्ष ने सरल ऐप की वर्किंग डिटेल्स दिखाकर बताया कि कैसे पार्टी कॉरपोरेट स्टाइल में चलती है और हर कार्यकर्ता के डैशबोर्ड से बूथ स्तर तक पल-पल मॉनिटरिंग की जाती है.

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सरल ऐप से हर बीजेपी कार्यकर्ता का डिजिटल रिकॉर्ड सरल ऐप से हर बीजेपी कार्यकर्ता का डिजिटल रिकॉर्ड

सिमर चावला

  • कानपुर,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

बीजेपी कानपुर के जिला उपाध्यक्ष शिवांग मिश्रा ने 'आज तक' से बातचीत में सरल ऐप की स्क्रीन पर पूरी वर्किंग डिटेल्स दिखाते हुए पार्टी के 'कॉरपोरेट स्टाइल' चुनावी मैनेजमेंट की जानकारी दी. भारतीय जनता पार्टी डेटा और मजबूत डिजिटल सिस्टम के जरिए बूथ स्तर तक अपनी चुनावी गतिविधियों की मॉनिटरिंग करती है. इस ऐप के माध्यम से रोजाना कार्यकर्ताओं के जनसंपर्क, बैठक, जीपीएस लोकेशन, फोटो और वीडियो डैशबोर्ड पर अपलोड किए जाते हैं. इससे पार्टी पदाधिकारी हर सदस्य की सक्रियता की समीक्षा करते हैं. साथ ही कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल ट्रेनिंग और क्विज प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं.

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सरल ऐप से हर कार्यकर्ता का डिजिटल रिकॉर्ड

बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने और उनकी सक्रियता पर नजर रखने के लिए सरल ऐप तैयार किया है. इस डिजिटल सिस्टम में हर कार्यकर्ता का अलग डैशबोर्ड बनता है. जनसंपर्क अभियान, बैठकें, कार्यक्रम, तस्वीरें, वीडियो, जीपीएस लोकेशन और शामिल लोगों की संख्या जैसी तमाम जानकारियां ऐप पर अपलोड की जाती हैं. इसके जरिए पार्टी बूथ स्तर तक चुनावी तैयारियों को ट्रैक करती है.

डिजिटल ट्रेनिंग और क्विज से कसते हैं तैयारी

पार्टी ने कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल ट्रेनिंग और लर्निंग प्रोग्राम शुरू किया है. इसमें भारतीय जनसंघ से लेकर बीजेपी के इतिहास, विचारधारा और संगठन की कार्यप्रणाली से जुड़े वीडियो दिखाए जाते हैं. ट्रेनिंग वीडियो देखने के बाद कार्यकर्ताओं को क्विज के जरिए अपनी जानकारी परखनी होती है.

तथ्यों के साथ जनता से संवाद की रणनीति

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इस डिजिटल ट्रेनिंग प्रोग्राम का मकसद कार्यकर्ताओं को पार्टी के इतिहास और नीतियों की पूरी जानकारी देना है. इससे जब कार्यकर्ता आम जनता के बीच संपर्क अभियान के लिए जाएं, तो उनके पास तथ्यों की सही जानकारी हो और वे लोगों से तार्किक तरीके से संवाद कर सकें. बीजेपी की चुनावी रणनीति केवल रैलियों तक सीमित न रहकर हर बूथ कार्यकर्ता की भागीदारी ट्रैक करने पर टिकी है.

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