UP News: बिजनौर जिले के मुरलीवाला गांव में शुक्रवार को जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की चिंता बढ़ा दी. हाथियों का झुंड दिन के समय खेतों में पहुंच गया और गन्ने तथा चारे की फसलों को रौंदकर काफी नुकसान पहुंचाया. खेतों में हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत फैल गई. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से हाथियों को खेतों से बाहर निकालकर रामगंगा नदी की दिशा में खदेड़ा.
ग्रामीणों के मुताबिक, शुक्रवार को हाथियों का एक झुंड मुरलीवाला गांव के आसपास स्थित खेतों में जा पहुंचा. झुंड में बड़े हाथियों के साथ उनके बच्चे भी शामिल थे. खेतों में पहुंचने के बाद हाथियों ने गन्ने की फसल को पैरों तले रौंद दिया.
किसान मेजर सिंह के खेत में हाथियों ने कई बीघा गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया. वहीं, संदीप सिंह के खेत में खड़ा चारा भी हाथियों के पैरों से कुचलकर बर्बाद हो गया. घटना के बाद खेतों में जगह-जगह हाथियों के बड़े पैरों के निशान दिखाई दिए, जिससे ग्रामीणों को झुंड की मौजूदगी का अंदाजा हुआ.
दिन में हाथियों के खेतों में पहुंचने से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के लिए चिंता की बात यह रही कि हाथियों का झुंड दिन के समय खेतों में पहुंचा. किसानों का कहना है कि खेतों में काम करने के दौरान यदि अचानक हाथियों का सामना हो जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है. हाथियों के साथ उनके बच्चे होने के कारण भी ग्रामीण झुंड को लेकर अतिरिक्त सतर्क नजर आए. देखें VIDEO:-
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में जंगली जानवरों की आवाजाही लगातार किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. उनका कहना है कि फसल तैयार करने में किसानों को महीनों की मेहनत और लागत लगती है, लेकिन जंगली जानवरों के खेतों में पहुंचने से कुछ ही समय में फसल बर्बाद हो जाती है.
सूचना पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम
हाथियों के खेतों में पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी. इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी और काफी मशक्कत के बाद झुंड को खेतों से बाहर निकालने में सफलता हासिल की.
वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने हाथियों को सुरक्षित तरीके से रामगंगा नदी की ओर खदेड़ दिया. इसके बाद आसपास के किसानों ने राहत की सांस ली. हालांकि, हाथियों की दोबारा खेतों में वापसी की आशंका के चलते ग्रामीण अभी भी सतर्क हैं.
किसानों ने मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग की
घटना के बाद टीपक सिरोही, मदन सिंह, गोविंद सिंह, संजय, ओमपाल, जितेन्द्र, ओमवीर और सतनाम समेत कई ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई.
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों की खेतों में आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है. उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि आबादी वाले इलाकों और कृषि क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं. साथ ही, जिन किसानों की फसलें हाथियों के कारण नष्ट हुई हैं, उनका सर्वे कराकर नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाया जाए.
गश्त बढ़ाने का वन विभाग का दावा
इस मामले में रेंजर पीके शर्मा ने बताया कि हाथियों के खेतों में आने की सूचना मिलते ही गश्ती दल को मौके पर भेजा गया था. ग्रामीणों की सहायता से हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर भेज दिया गया है.
रेंजर ने बताया कि क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि हाथियों की दोबारा खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके. फिलहाल वन विभाग की निगरानी के बीच ग्रामीणों को भी हाथियों के झुंड से दूरी बनाए रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है.
मुरलीवाला में हुई इस घटना ने एक बार फिर मानव बस्तियों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की चुनौती को सामने ला दिया है. किसानों के सामने जहां अपनी फसलों को जंगली जानवरों से बचाने की चिंता है, वहीं वन विभाग के लिए वन्यजीवों को सुरक्षित रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बनी हुई है.
ऋतिक राजपूत