उत्तर प्रदेश के बिजनौर में छह नन्हे उल्लू इन दिनों वन विभाग की देखरेख में पल रहे हैं. इनके रहने का इंतजाम है, खाने का खास इंतजाम है और खाने का समय भी थोड़ा अलग है. शाम होते ही इनके सामने चिकन रख दिया जाता है, लेकिन ये खाना शुरू करते हैं अंधेरा होने के बाद. पहले दिन इन्हें आधा किलो चिकन दिया गया था, जो सभी ने मिलकर खा लिया. इसके बाद इनकी रोज की खुराक बढ़ाकर करीब एक किलो चिकन कर दी गई.
इन छह उल्लुओं की कहानी दीपावली की सफाई के दौरान शुरू हुई. बिजनौर की कृष्ण विहार कॉलोनी में एक घर के झरोखे से ये बच्चे मिले. घर के मालिक ने उन्हें सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग को सूचना दी. अब वन विभाग की टीम इनकी देखभाल कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, बच्चे अभी काफी छोटे हैं. जब ये बड़े होकर अपने दम पर रहने और उड़ने लायक हो जाएंगे, तब इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाएगा.
मामला बिजनौर की कृष्ण विहार कॉलोनी का है. यहां जगदीश कुमार के घर में दीपावली की सफाई हो रही थी. इसी दौरान उनकी नजर मकान के एक झरोखे में बैठे उल्लू के छह बच्चों पर पड़ी. घर में अचानक छह नन्हे पक्षियों को देखकर जगदीश कुमार ने उनकी सुरक्षा के बारे में सोचा और वन विभाग को जानकारी दी. इसके बाद सभी बच्चों को वन विभाग की टीम के हवाले कर दिया गया.
बताया गया कि झरोखे पर जाली लगा दी गई थी, जिसके बाद उल्लू की मां वहां से चली गई थी. ऐसे में इन बच्चों की देखभाल के लिए वन विभाग की मदद ली गई. रेस्क्यू के बाद सभी छह बच्चों को वन विभाग के रेंज ऑफिस लाया गया. फिलहाल इन्हें दो पिंजरों में रखा गया है. टीम इनके खाने-पीने और सुरक्षा का ध्यान रख रही है. ये बच्चे बार्न आउल यानी खलिहान में मिलने वाली उल्लू की प्रजाति के हैं. वन विभाग की कोशिश है कि इनके बड़े होने तक इनकी ठीक से देखभाल हो, ताकि बाद में इन्हें प्राकृतिक माहौल में छोड़ा जा सके.
पहले दिन आधा किलो चिकन खाया, फिर रोज की खुराक बढ़ी
इन नन्हे उल्लुओं की देखभाल में सबसे ज्यादा चर्चा इनके खाने की हो रही है. शुरुआत में इन्हें आधा किलो चिकन दिया गया था. सभी ने मिलकर पूरा चिकन खा लिया. इसके बाद इनके लिए रोजाना करीब एक किलो चिकन का इंतजाम किया जाने लगा.
चिकन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर इनके सामने रखा जाता है. छहों बच्चे मिलकर इसे खाते हैं. इन उल्लुओं की दिनचर्या भी दिलचस्प है. वन विभाग की टीम शाम के समय इनके सामने चिकन रख देती है, लेकिन वे तुरंत खाना शुरू नहीं करते. अंधेरा होने के बाद वे भोजन करने लगते हैं. उल्लू आमतौर पर रात में ज्यादा एक्टिव रहने वाले पक्षी हैं. कई प्रजातियां रात के समय भोजन की तलाश करती हैं.
DFO ने क्या बताया?
इस मामले पर बिजनौर के DFO जय सिंह कुशवाहा ने बताया कि उल्लुओं के बच्चों का मामला उनके संज्ञान में है. वन विभाग की टीम ने उनका रेस्क्यू किया था और वे काफी दिनों से विभाग की देखरेख में हैं. DFO के मुताबिक, उल्लुओं के बच्चे अभी काफी छोटे हैं. जैसे ही वे बड़े हो जाएंगे, वन विभाग उन्हें छोड़ देगा. फिलहाल इन छह बच्चों की देखभाल वन विभाग के रेंज ऑफिस में की जा रही है.
ऋतिक राजपूत