सावन का महीना है. सड़कों पर कांवड़िए हैं. कोई हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने शिवालय की तरफ बढ़ रहा है, तो कोई बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहा है. इन दिनों कांवड़ियों के रास्ते में सिर्फ ट्रैफिक और भीड़ की चुनौती नहीं थी. जंगल से निकलकर सड़क के आसपास घूम रहे गुलदार ने भी लोगों की चिंता बढ़ा रखी थी.
वन विभाग के लिए भी सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी शिवभक्त का सामना गुलदार से न हो जाए. इसी खतरे को देखते हुए कांवड़ मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई और जगह-जगह पिंजरे लगाए गए. इन्हीं में से एक पिंजरा देहरादून-नैनीताल हाईवे पर पड़ने वाले हरेवली कस्बे में लगाया गया था. फिर देर शाम कुछ ऐसा हुआ कि आसपास के लोगों को गुलदार की दहाड़ सुनाई दी.
जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो नजारा देखकर हैरान रह गए. पिंजरे के अंदर एक गुलदार कैद था. गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजरे के अंदर एक मुर्गा छोड़ा था. मकसद था- गुलदार को शिकार का लालच देकर पिंजरे तक लाना. देर शाम मुर्गे की आवाज सुनकर गुलदार पिंजरे के पास पहुंच गया. शिकार की तलाश में वह जैसे ही अंदर दाखिल हुआ, पिंजरे में कैद हो गया. इसके बाद गुलदार ने जोर-जोर से दहाड़ना शुरू कर दिया.
आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण जमा हो गए. लोगों ने देखा कि पिंजरे में गुलदार फंसा हुआ है. तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. ग्रामीणों को गुलदार से दूर किया गया और फिर पिंजरे समेत गुलदार को सुरक्षित तरीके से वहां से ले जाया गया. वन विभाग अब उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी कर रहा है.
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गुलदार के पकड़े जाने से ग्रामीणों के साथ-साथ वन विभाग ने भी राहत की सांस ली है. दरअसल, इस समय सावन की कांवड़ यात्रा चल रही है और बड़ी संख्या में शिवभक्त इन रास्तों से गुजर रहे हैं. गुलदार के हमले की आशंका को देखते हुए वन विभाग पहले से ही अलर्ट मोड पर है. कांवड़ मार्गों पर कई जगह पिंजरे लगाए गए हैं. इसके अलावा वनकर्मी हथियारों से लैस होकर निगरानी कर रहे हैं. कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए बाइक से भी गश्त की जा रही है. करीब हर दो किलोमीटर पर वन विभाग के कर्मचारी निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.
गुलदार के पकड़े जाने के बाद जहां ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, वहीं उनकी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. हरेवली के स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में काफी समय से गुलदार का एक जोड़ा दिखाई दे रहा था. अब वन विभाग ने एक गुलदार को तो पकड़ लिया है, लेकिन दूसरा गुलदार अभी भी आसपास के जंगलों में घूम रहा हो सकता है. ग्रामीणों ने मांग की है कि दूसरे गुलदार को पकड़ने के लिए भी जल्द से जल्द पिंजरा लगाया जाए. उनका कहना है कि जब तक दूसरा गुलदार नहीं पकड़ा जाता, तब तक डर बना रहेगा.
संजीव शर्मा