जौनपुर दूल्हा हत्याकांड में बड़ा मोड़, एनकाउंटर में मारे गए रवि यादव के मकान गिराने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

जौनपुर दूल्हा हत्याकांड में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए रवि यादव के मकान को गिराने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. कोर्ट ने तहसीलदार और डीएम के बेदखली व हर्जाने से जुड़े आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी स्टे दिया है. याचिका रवि यादव के पिता ने दायर की थी.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट.  (Photo: ITG) इलाहाबाद हाईकोर्ट. (Photo: ITG)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज ,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:14 PM IST

जौनपुर के बहुचर्चित दूल्हा हत्याकांड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम राहत दी है. पुलिस मुठभेड़ में मारे गए रवि यादव के मकान को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. इसके साथ ही तहसीलदार और जिला मजिस्ट्रेट की तरफ से पारित बेदखली और हर्जाने से जुड़े आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी स्टे लगा दिया गया है. मामले की सुनवाई जस्टिस चन्द्र कुमार राय की सिंगल बेंच में हुई. अदालत ने तहसीलदार के 4 जून 2026 और जिला मजिस्ट्रेट के 29 जून 2026 को जारी आदेशों के प्रभाव और उनके क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाने का आदेश दिया.

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यह याचिका मृतक रवि यादव के पिता ने अपने अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव के माध्यम से हाईकोर्ट में दाखिल की थी. याचिका में कहा गया कि उनका परिवार भूमिधरी गाटा संख्या 625 पर वैध रूप से कब्जाधारी है. याचिका में यह भी कहा गया कि पास स्थित गाटा संख्या 624 राजस्व अभिलेखों में खाद के गड्ढे के रूप में दर्ज है और उस भूमि से उनके परिवार का कोई संबंध नहीं है. इसलिए उनके खिलाफ की गई कार्रवाई उचित नहीं है.

भूमिधरी गाटा संख्या 625 पर वैध कब्जे का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि तहसीलदार ने बिना समुचित सुनवाई का अवसर दिए एकपक्षीय तरीके से बेदखली और हर्जाने का आदेश पारित कर दिया. इसके बाद दायर अपील को भी मनमाने ढंग से खारिज कर दिया गया. याचिका में यह भी कहा गया कि किसी भी बेदखली की कार्रवाई से पहले संबंधित भूमि का विधिवत सर्वेक्षण और सीमांकन कराया जाना जरूरी था.

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हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक
 

बिना इस प्रक्रिया को पूरा किए कार्रवाई की गई, जिसे चुनौती दी गई है. फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए तहसीलदार और जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.
 

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