उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से इकौना क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था. सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित आपदा कंट्रोल रूम में सूचना मिली कि मझौवा सुमाल और मध्यनगर में कुल 14 लोग बाढ़ में फंस गए हैं. सूचना मिलते ही प्रशासन ने और एसडीआरएफ की दो टीमों ने रेस्क्यू अभियान चला कर लोगों और उनके पशुओं को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि इकौना क्षेत्र के मझौवा सुमाल के रहने वाले किसान हनुमान प्रसाद पुत्र चिंताराम रविवार शाम को राप्ती नदी किनारे स्थित अपने सब्जी के खेत की रखवाली करने गये थे. खेत में बनी झोपड़ी में खाना खाने के बाद वह सो गये देर रात जब उनकी नींद खुली तो उन्होने देखा कि चारों तरफ पानी भरा हुआ है. झोपड़ी पानी से घिर चुकी थी और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था. सुबह होते ही उन्होंने जोर-जोर से आवाज लगाकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी. ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हनुमान प्रसाद को निकालने का प्रयास करने लगे. लेकिन पानी का बहाव तेज और जलस्तर अधिक होने के कारण कोई भी खेत तक पहुंच नहीं सका.
वहीं दूसरी ओर मध्यनगर गांव में भी हालात गंभीर थे. वहां दो परिवारों के कुल 13 लोग घरों में आए बाढ़ के पानी में फंस गए थे. दोनों जगहों से एक साथ सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन अरुण मिश्रा को तत्काल एसडीआरएफ की दो टीमें भेजकर सभी को सुरक्षित निकालने के निर्देश दिए. सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक रामफेरन पांडेय, उपजिलाधिकारी इकौना रवींद्र कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक कुमार और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं.
एसडीआरएफ के जवानों ने नावों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया. पहले मझौवा सुमाल में फंसे किसान हनुमान प्रसाद को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद मध्यनगर में बाढ़ में फंसे दोनों परिवारों के 13 लोगों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. रेस्क्यू के दौरान फंसे लोगों के पशुओं को भी सुरक्षित निकाला गया. इस प्रकार कुल 14 लोगोम की जान बचाई गई.
पूरे रेस्क्यू अभियान के दौरान एसडीएम रवींद्र कुमार और तहसीलदार इकौना मौके पर मौजूद रहकर बचाव कार्य की निगरानी करते रहे. जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की जल्दबाजी और सूजझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया. सभी लोगों के सुरक्षित निकाले जाने पर ग्रामीणों ने प्रशासन और एसडीआरएफ के जवानों का दिल से आभार जताया. ग्रामीणों का कहना है कि समय पर मदद न मिलती तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी. फिलहाल प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और राहत कार्य जारी है.
पंकज वर्मा