इंग्लैड में 20 मिनट के इस काम के मिलते हैं 12 हजार! एक दिन में 10 घर तो निपटा देंगे...

क्या सिर्फ घर के छज्जे साफ करने के आपको 12 हजार रुपये मिल सकते हैं? सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो इंग्लैंड का बताया जा रहा है. इसमें एक भारतीय महिला ने बताया कि उसने अपने घर के छज्जे पर बने बारिश के पानी के ड्रेन की सफाई के लिए करीब 12 हजार रुपये दिए. अब इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है.

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मंजू शेखावत परमार ने इंस्टाग्राम पर इसका वीडियो शेयर किया  (Photo:Insta/@manjushekhawatparmar) मंजू शेखावत परमार ने इंस्टाग्राम पर इसका वीडियो शेयर किया (Photo:Insta/@manjushekhawatparmar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST

भारत और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों के वर्क कल्चर में एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है. सोशल मीडिया पर इसी अंतर को दिखाता हुआ एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसको लेकर चर्चा छिड़ी हुई है.

इंग्लैंड में रहने वाली एक भारतीय महिला ने छत के किनारे बने बारिश के पानी वाले ड्रेन की सफाई का बिल शेयर किया तो सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई. वजह सिर्फ 92 पाउंड, यानी करीब 12 हजार रुपये का खर्च नहीं था, बल्कि यह भी था कि सफाई का पूरा काम कथित तौर पर महज 20 मिनट में खत्म हो गया.

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मंजू शेखावत परमार ने वीडियो में बताया कि उनके घर की छत के किनारे बने रेनवॉटर ड्रेन में सूखे पत्ते और काफी गंदगी जमा हो गई थी. इसे साफ करने के लिए एक व्यक्ति को बुलाया गया.

देखें वीडियो

12 हजार रुपये के लिए इस आदमी ने क्या-क्या किया?

वीडियो में कर्मचारी सीढ़ी लगाकर छत तक पहुंचता है. इसके बाद वह ड्रेन की सफाई शुरू करता है. अंदर जमा सूखे पत्ते और गंदगी निकालकर एक बाल्टी में इकट्ठा करता है. फिर वह घर के दूसरे हिस्से में जाकर वहां का ड्रेन भी साफ करता है.बस करीब 20 मिनट में यह पूरा काम हो गया और इसके बदले उसे 92 पाउंड, यानी करीब 12 हजार रुपये मिल गए.

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अब इस वीडियो पर कई तरह के कमेंट भी आए. कुछ लोगों ने बताया कि भारत और ब्रिटेन के सर्विस चार्ज में काफी बड़ा अंतर है. विदेशों में लेबर और सर्विस की कीमतें अलग होती हैं. यही वजह है कि कई भारतीय नौकरी की तलाश में पश्चिमी देशों का रुख करते हैं और वहां बसना चाहते हैं.

एक वजह यह भी है कि भारत में अक्सर लेबर वर्क और व्हाइट-कॉलर या हाई-स्किल जॉब की कमाई में बड़ा फासला होता है. वहीं पश्चिमी देशों में प्लंबर, क्लीनर, इलेक्ट्रीशियन या दूसरे सर्विस वर्कर्स भी अपने काम के लिए काफी ज्यादा फीस लेते हैं.

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