UAE में एक ऐसा आलीशान महल है, जिसे लोग सालों से 'भूतिया महल' कहते आ रहे हैं. करीब 35 बेडरूम वाला यह महल लगभग तीन दशक तक खाली पड़ा रहा. खाली रहने के दौरान यहां अजीब आवाजें आने और लाइटें अपने आप जलने-बुझने जैसी कई कहानियां भी फैलती रहीं. अब यही रहस्यमयी महल बिक्री के लिए तैयार है. इसकी कीमत इतनी है कि सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे.
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह महल UAE के रास अल खैमाह में है और इसे अल कासिमी पैलेस के नाम से जाना जाता है. स्थानीय लोग इसे भूतिया महल भी कहते हैं. अब इसे 22.5 मिलियन दिरहम यानी करीब 52 करोड़ रुपये में बिना फर्नीचर के बेचा जा रहा है. अगर खरीदार महल में मौजूद पुराने सामान, कलाकृतियां और संग्रह भी लेना चाहता है तो कीमत 23.5 मिलियन दिरहम यानी करीब 54 करोड़ रुपये होगी.
35 बेडरूम और करीब 1.9 लाख वर्गफीट का प्लॉट
यह कोई सामान्य घर नहीं है. महल करीब 1,91,742 वर्गफीट के प्लॉट पर बना है, जबकि इसका कुल बिल्ट-अप एरिया करीब 33,827 वर्गफीट है. इसमें 35 बेडरूम हैं.
इस प्रॉपर्टी की बिक्री की जिम्मेदारी बिशप एंड नाइट के पास है. कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर जोश हेनरी के मुताबिक, कई संभावित खरीदारों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है. खास बात यह है कि हर खरीदार इस महल को लेकर अलग योजना बना रहा है.
प्रॉपर्टी को संभावित खरीदारों और निवेशकों तक पहुंचाने के लिए कंपनी ने मेहर प्रॉपर्टीज के लग्जरी रियल एस्टेट एडवाइजर अबुबकर सिद्दिकी के साथ भी साझेदारी की है.
भारत और ब्रिटेन से भी खरीदारों की दिलचस्पी
महल की चर्चा सिर्फ UAE तक सीमित नहीं है. अबु बकर सिद्दिकी के मुताबिक, ब्रिटेन, भारत और आसपास के देशों से भी संभावित खरीदारों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है और कुछ ने बोली भी लगाई है.
इसके पीछे सिर्फ महल की रहस्यमयी कहानी ही वजह नहीं है. संभावित खरीदार रास अल खैमाह में बढ़ते टूरिज्म और मरजान आईलैंड के भविष्य को भी ध्यान में रख रहे हैं.
1985 में बना था ये आलीशान महल
अल कासिमी पैलेस का निर्माण 1985 में हुआ था. इसे रास अल खैमाह के शाही परिवार से जुड़े दिवंगत शेख अब्दुल अजीज बिन हुमैद अल कासिमी ने एक पहाड़ी के ऊपर बनवाया था.
महल को बेहद अलग और भव्य अंदाज में डिजाइन किया गया था. इसके निर्माण में ईरान, मोरक्को, भारत और चीन के कारीगरों ने काम किया था. यहां मोजाइक, पेंटेड टाइल्स, भित्तिचित्र और दीवारों पर गजलें तक बनाई गई थीं.
महल के अंदर फ्रांस और बेल्जियम के क्रिस्टल झूमर लगाए गए थे. दीवारों पर कबूतर और उल्लू जैसी आकृतियां भी बनाई गई थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे बनाने में 500 मिलियन दिरहम से ज्यादा खर्च हुआ था.
महल बना, लेकिन मालिक कभी यहां रहे ही नहीं
इतना शानदार महल बनने के बावजूद शेख अब्दुल अजीज इसमें कभी रहे ही नहीं. इसकी एक वजह परिवार की आपत्ति बताई जाती है. दरअसल, महल में इंसानों और जानवरों की आकृतियों वाली कई मूर्तियां और कलाकृतियां बनाई गई थीं, जिसे लेकर परिवार के कुछ लोगों को आपत्ति थी.
इसके बाद महल करीब 35 साल तक खाली रहा. लंबे समय तक वीरान रहने की वजह से इसके बारे में तरह-तरह की कहानियां फैलने लगीं. स्थानीय लोगों के बीच महल को लेकर अजीब घटनाओं की चर्चाएं होने लगीं. कहीं लाइटें अपने आप जलने-बुझने की बात कही गई तो कहीं रात में अजीब आवाजें सुनाई देने की कहानी सामने आई. धीरे-धीरे यही किस्से महल की 'भूतिया' पहचान का हिस्सा बन गए.
2019 में फिर खुला महल का दरवाजा
करीब तीन दशक तक खाली रहने के बाद 019 में तारिक अहमद अल शरहान ने इस महल को नया रूप दिया. इसे एक म्यूजियम में बदल दिया गया और इसका नाम अल कैसर अल गमेद रखा गया, जिसका मतलब 'रहस्य का महल' होता है. इसके बाद आम लोग भी इसे देखने जा सकते थे. यहां प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 75 दिरहम की फीस रखी गई.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस महल का अगला मालिक इसका क्या करेगा? रियल एस्टेट सलाहकारों के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. इसे निजी घर, होटल, टूरिस्ट डेस्टिनेशन या इवेंट्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए संबंधित मंजूरियां लेनी होंगी.
एक संभावित खरीदार इसे पूरी तरह निजी एस्टेट के रूप में विकसित कर सकता है, जहां कई पीढ़ियां एक साथ रह सकें. वहीं कोई दूसरा निवेशक इसे होटल या टूरिज्म से जुड़ी प्रॉपर्टी में बदल सकता है.
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खास बात यह है कि इस महल पर किसी तरह की विरासत संबंधी पाबंदी नहीं है. यानी नए मालिक के पास इसे अपनी जरूरत के हिसाब से तोड़ने, दोबारा बनाने, डिजाइन बदलने या रेनोवेट करने की काफी आजादी होगी.
यानी जिस महल को कभी लोग उसके रहस्यमयी किस्सों की वजह से ‘भूतिया महल’ कहते थे, अब वही प्रॉपर्टी करोड़ों रुपये में बिकने जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि इसकी डरावनी छवि खरीदारों को दूर करने के बजाय इसकी कहानी और रहस्य को और खास बना रही है.
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