साउथ कोरिया की सेना में जवानों को सिखाया गया रैंप वॉक, विवाद के बाद सेना ने मानी गलती

साउथ कोरिया की सेना के जवानों को हथियार चलाने और युद्ध की तैयारी के बजाय मॉडल की तरह चलने और पोज देने की ट्रेनिंग दी गई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सेना की आलोचना हुई.

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साउथ कोरिया की पीपुल पावर पार्टी के सांसद पार्क चूंग-क्वोन ने भी इस कार्यक्रम की आलोचना की. ( Photo: ITG) साउथ कोरिया की पीपुल पावर पार्टी के सांसद पार्क चूंग-क्वोन ने भी इस कार्यक्रम की आलोचना की. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

आमतौर पर जब भी सेना के जवानों की ट्रेनिंग की बात होती है, तो हमारे दिमाग में हथियार चलाने, दौड़ लगाने, मुश्किल हालात में दुश्मन का मुकाबला करने और शारीरिक रूप से मजबूत बनने की तस्वीर आती है. लेकिन साउथ कोरिया की सेना में कुछ जवानों को ऐसी ट्रेनिंग दी गई, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए. यहां सेना के जवानों को हथियार चलाने या युद्ध की तैयारी कराने के बजाय फैशन मॉडल की तरह चलना और पोज देना सिखाया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सेना की काफी आलोचना होने लगी. मामला इतना बढ़ा कि सेना को खुद सामने आकर अपनी गलती माननी पड़ी.

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सेना के जवानों को क्यों सिखाया गया मॉडल की तरह चलना?
यह मामला साउथ कोरिया की सेना की एक खास यूनिट से जुड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अक्टूबर को आर्मी स्पेशल वारफेयर कमांड की पहली स्पेशल फोर्सेज ब्रिगेड के कैंप में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसका नाम 'के-वॉकिंग परफॉर्मेंस मिलिट्री फेस्टिवल' था. इस कार्यक्रम में महिला मॉडल को बुलाया गया था. ये मॉडल सेना की वर्दी जैसी पोशाक और ऊंची हील वाली सैंडल पहनकर पहुंची थीं. उन्होंने वहां मौजूद पुरुष सैनिकों को बताया कि फैशन शो में मॉडल किस तरह चलते हैं और कैमरे के सामने किस तरह पोज देते हैं.

वीडियो में महिला मॉडल सैनिकों को एक पैर दूसरे पैर के आगे रखकर चलना सिखाती दिखाई देती हैं. इसके अलावा उन्हें चलते समय शरीर को किस तरह मोड़ना है और हाथों को मोड़कर किस तरह पोज देना है, यह भी बताया गया. इसके बाद सैनिकों ने भी बारी-बारी से आगे चलकर मॉडल की तरह चलने और पोज देने की प्रैक्टिस की. इस दौरान महिला मॉडल उन्हें देखकर उनकी चाल और पोज सुधारने में मदद कर रही थीं.

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वीडियो वायरल होते ही लोगों ने उठाए सवाल
इस ट्रेनिंग का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सेना के इस कार्यक्रम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. लोगों का कहना था कि स्पेशल फोर्सेज के जवानों का काम देश की सुरक्षा करना और मुश्किल सैन्य अभियानों को अंजाम देना है. ऐसे में उन्हें फैशन मॉडल की तरह चलने की ट्रेनिंग देने का क्या मतलब है?दरअसल, स्पेशल फोर्सेज सेना की सबसे खास और प्रशिक्षित यूनिट में शामिल होती हैं. इनके जवानों को बेहद मुश्किल हालात में काम करने के लिए तैयार किया जाता है. उन्हें खास सैन्य अभियानों, दुश्मन के इलाके में कार्रवाई और खतरनाक मिशन के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. ऐसे में लोगों को यह कार्यक्रम सेना के जवानों के काम से बिल्कुल अलग लगा.

साउथ कोरिया की पीपुल पावर पार्टी के सांसद पार्क चूंग-क्वोन ने भी इस कार्यक्रम की आलोचना की. उन्होंने कहा कि एक तरफ उत्तर कोरिया की ओर से मिसाइल परीक्षण और सैन्य गतिविधियां जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की सेना के जवानों को मॉडल की तरह चलना सिखाया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सैनिकों की गलती नहीं है. इसके लिए सेना के अधिकारियों और कार्यक्रम की योजना बनाने वालों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

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सेना ने पहले बताई थी ट्रेनिंग की अलग वजह
वीडियो पर विवाद होने के बाद सेना की ओर से सफाई दी गई. शुरुआत में ब्रिगेड ने बताया कि यह कार्यक्रम सैनिकों के व्यक्तित्व विकास से जुड़ा था. इस तरह की ट्रेनिंग साल में दो बार आयोजित की जाती है. सेना के मुताबिक, इसका मकसद सैनिकों को सही तरीके से चलना, अपने शरीर का संतुलन बनाए रखना और बेहतर ढंग से खड़े होने की आदत सिखाना था. यानी सेना का कहना था कि इस ट्रेनिंग से सैनिकों की चाल और उनके व्यक्तित्व में सुधार हो सकता है. हालांकि, बाद में सेना के एक अधिकारी ने माना कि कार्यक्रम की योजना बनाते समय इसकी ठीक से जांच नहीं की गई थी.

सेना ने मानी अपनी गलती, आगे से रखेगी ध्यान
साउथ कोरिया की सेना के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि इस ट्रेनिंग का तरीका और विषय उस खास सैन्य यूनिट के काम और वहां तैनात सैनिकों की जरूरतों के हिसाब से सही नहीं था. अधिकारी ने कहा कि कार्यक्रम को आयोजित करने से पहले इसकी ठीक से समीक्षा नहीं की गई थी. उन्होंने यह भी माना कि ट्रेनिंग का विषय सैनिकों की जरूरतों के मुताबिक होना चाहिए था.

सेना ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने से पहले सैनिकों की राय भी ली जाएगी. साथ ही यह जांच की जाएगी कि ट्रेनिंग उनके काम और जरूरतों के हिसाब से सही है या नहीं. इस तरह मॉडल की तरह चलने की ट्रेनिंग देने का यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.

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