आज के समय में सरकारी नौकरी या किसी बड़ी कंपनी की नौकरी को लोग सुरक्षित करियर मानते हैं. अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा और आगे बढ़ने के मौकों की वजह से ज्यादातर लोग ऐसी नौकरी छोड़ने के बारे में सोचते भी नहीं हैं. लेकिन मेरठ की रहने वाली स्निग्धा बोस ने एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने पसंद के काम को करियर बनाने का फैसला किया. वह भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में असिस्टेंट मैनेजर थीं. आज वह मेरठ में अपना योगा स्टूडियो चला रही हैं.
स्निग्धा बोस एसबीआई में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम करती थीं. उनके पास एक स्थिर नौकरी थी और अच्छी सैलरी भी मिलती थी. बाहर से देखने पर उनका करियर काफी अच्छा चल रहा था. लेकिन समय के साथ उन्हें अपनी नौकरी से परेशानी महसूस होने लगी. स्निग्धा के मुताबिक, बैंक की नौकरी में काम का दबाव लगातार बढ़ता गया. लंबे समय तक बैठकर काम करना, तनाव और मानसिक थकान उनकी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गए. काम के दबाव की वजह से उन्हें अक्सर सिरदर्द रहता था और वह इससे काफी परेशान रहने लगी थीं.
नौकरी थी, लेकिन मन खुश नहीं था
स्निग्धा ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें महसूस हुआ कि वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं हैं. उनके पास एक सुरक्षित नौकरी थी, लेकिन जिस तरह की जिंदगी वह जी रही थीं, उससे वह संतुष्ट नहीं थीं. उन्होंने बताया कि काम के दबाव की वजह से उन्हें रोज सिरदर्द होता था. स्थिति ऐसी हो गई थी कि वह लगातार दर्द की दवा लेती थीं. धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि इस तरह की जिंदगी वह लंबे समय तक नहीं जीना चाहतीं. इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी में बदलाव करने का फैसला किया. एक सुरक्षित नौकरी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन परिवार ने उनका साथ दिया. इसके बाद स्निग्धा ने अपनी पसंद और रुचि को करियर में बदलने का फैसला किया.
योगा को बनाया अपना नया करियर
स्निग्धा पहले से ही योगा और प्राणायाम से जुड़ी हुई थीं. उन्होंने योगा और प्राणायाम की ट्रेनिंग ली और सर्टिफाइड ट्रेनर बनीं. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने इसी रुचि को अपने नए करियर में बदल दिया. आज वह उत्तर प्रदेश के मेरठ में तुला वेलनेस स्टूडियो चलाती हैं. यहां वह लोगों को योगा और प्राणायाम सिखाती हैं. यानी जिस चीज से उन्हें खुद अपनी जिंदगी में बदलाव लाने की प्रेरणा मिली, आज वही उनका पेशा बन चुका है.
नौकरी छोड़ना ही जरूरी नहीं
स्निग्धा की कहानी सिर्फ नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करने की नहीं है. वह लोगों को यह भी समझाना चाहती हैं कि अपने शरीर और रोजमर्रा की जिंदगी का ध्यान रखने के लिए हर किसी को नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं है. आज बहुत से लोग सुबह जल्दी उठकर ऑफिस जाते हैं, कई घंटे तक बैठे रहते हैं, काम का दबाव झेलते हैं और फिर थककर घर लौटते हैं. अगले दिन यही दिनचर्या दोबारा शुरू हो जाती है.
ऐसी जीवनशैली में लोग धीरे-धीरे अपने शरीर और जरूरतों पर ध्यान देना कम कर देते हैं. शरीर में अकड़न, थकान और तनाव जैसी चीजें उन्हें सामान्य लगने लगती हैं. स्निग्धा लोगों को अपनी रोज की जिंदगी में योगा, एक्सरसाइज, शरीर की गतिविधियों और थोड़े आराम के लिए समय निकालने की सलाह देती हैं.
बड़ा फैसला था, लेकिन जरूरी था
स्निग्धा के लिए एसबीआई की नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं था. एक तरफ स्थिर नौकरी और अच्छी सैलरी थी, तो दूसरी तरफ अपनी पसंद का काम करने की इच्छा. आखिरकार उन्होंने अपनी खुशी और पसंद को प्राथमिकता दी. आज वह अपने योगा स्टूडियो के जरिए लोगों को योगा और प्राणायाम सिखा रही हैं. उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा हो सकती है, जो अच्छी नौकरी होने के बावजूद अपने काम से खुश नहीं हैं और जिंदगी में कुछ नया करना चाहते हैं.
हालांकि हर व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं हो सकता. इसलिए ऐसा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, परिवार की जिम्मेदारियों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है. स्निग्धा की कहानी का संदेश यही है कि करियर में सफलता के साथ-साथ अपने लिए संतुष्ट और बेहतर जिंदगी चुनना भी जरूरी है.
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