नॉर्थ कोरिया में महिलाओं को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा है. देश की सरकार अब 40 साल से ज्यादा उम्र की शादीशुदा महिलाओं को भी चीन भेज रही है, जहां उनसे कपड़ों और सी फूड की फैक्ट्रियों में काम कराया जा रहा है.
हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई महिलाओं के बच्चे नॉर्थ कोरिया में ही रह जाते हैं. परिवार से लंबे समय तक दूर रहने का दर्द इतना बढ़ रहा है कि कुछ महिलाएं काम छोड़कर घर लौटने की कोशिश कर रही हैं.
लेकिन सवाल यह है कि नॉर्थ कोरिया पहले जहां कम उम्र की अविवाहित महिलाओं को चीन भेजता था, वहां अब उम्रदराज और शादीशुदा महिलाओं को क्यों भेजा जा रहा है? इसके पीछे एक वजह यह भी बताई जा रही है कि परिवार के छूट जाने का डर और अपनों पर कार्रवाई होने का खतरा महिलाओं को भागने से रोक सकता है.
चीन की फैक्ट्रियों में क्या काम करती हैं महिलाएं?
डेली स्टार की रिपोर्ट में डेली एनके के हवाले से बताया गया है कि इस साल चीन के जिलिन प्रांत में कपड़े बनाने और समुद्री भोजन की प्रोसेसिंग करने वाली फैक्ट्रियों में काम करने के लिए भेजी गई कई उत्तर कोरियाई महिलाएं करीब 45 साल की हैं. पहले इन फैक्ट्रियों में काम करने के लिए कम उम्र की अविवाहित महिलाओं को ज्यादा भेजा जाता था. अब 40 साल से ज्यादा उम्र की शादीशुदा महिलाओं की संख्या भी बढ़ती दिख रही है.
इन महिलाओं के लिए चीन जाना सिर्फ नौकरी करने का मामला नहीं है. कई महिलाओं के छोटे बच्चे उत्तर कोरिया में ही रह जाते हैं. उन्हें अपने परिवार से कई साल तक दूर रहना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश भेजे गए उत्तर कोरियाई मजदूर आम तौर पर तीन से पांच साल तक अपने काम की जगह पर रहते हैं. उनके पासपोर्ट भी अक्सर अधिकारियों के पास जमा करा लिए जाते हैं, जिससे उनके लिए अपनी मर्जी से घर लौटना मुश्किल हो जाता है.
बच्चे की याद में फैक्ट्री से भागने की कोशिश
रिपोर्ट में एक ऐसी महिला का जिक्र है, जो चीन के चांगबाई इलाके में कपड़ों की फैक्ट्री में काम करती थी. वह अपने बच्चे से मिलने के लिए इतनी बेचैन थी कि उसने पिछले महीने बिना अनुमति काम की जगह छोड़ दी.
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला फैक्ट्री से निकलने के बाद तीन दिन तक पकड़ में नहीं आई. बताया गया कि वह सामान लाने-ले जाने वाले ट्रकों में से एक के जरिए बाहर निकली थी. हालांकि, बाद में उसे पकड़ लिया गया.
महिला को उम्मीद थी कि वह अपने परिवार के पास पहुंच पाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. चीन में छुट्टियों का समय खत्म होने के बाद उसे वापस उत्तर कोरिया भेज दिया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अधिकारियों ने उसके परिवार से मिलने की इच्छा के बजाय काम की जगह छोड़ने को ही मुख्य समस्या माना.
इस घटना के बाद वहां काम करने वाली दूसरी महिलाओं की परेशानी भी सामने आई. रिपोर्ट के अनुसार, कई महिलाएं अपने बच्चों को याद करती हैं और घर लौटना चाहती हैं. परिवार से लंबे समय तक दूर रहने का मानसिक दबाव उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है.
क्या परिवार को बनाया जा रहा है दबाव का जरिया?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर कोरिया शादीशुदा और बच्चों वाली महिलाओं को विदेश भेजने पर जोर क्यों दे रहा है? डेली एनके से बात करने वाले एक सूत्र के मुताबिक, इसके पीछे एक आशंका यह हो सकती है कि परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं को काम छोड़कर भागने से रोकती है. अगर कोई महिला विदेश में काम करते हुए भागने की कोशिश करती है, तो उसके पीछे छूटे परिवार को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
यानी जिन महिलाओं के बच्चे और पति उत्तर कोरिया में हैं, उनके लिए विदेश में नौकरी छोड़ने का फैसला करना और भी कठिन हो सकता है. परिवार की चिंता उन्हें वापस लौटने की कोशिश करने से रोक सकती है. हालांकि, यह इस बदलाव की एक संभावित वजह है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इस तरह विदेश में काम करने वाली महिलाओं के सामने दोहरी मुश्किल है. एक तरफ चीन में काम और परिवार से दूरी का दबाव है, तो दूसरी तरफ घर लौटने की कोशिश करने पर संभावित कार्रवाई का डर.
उत्तर कोरिया विदेश में मजदूर क्यों भेजता है?
उत्तर कोरिया के लिए विदेश में काम करने वाले मजदूर विदेशी मुद्रा कमाने का एक जरिया हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2397 में दिसंबर 2017 में सदस्य देशों से उत्तर कोरियाई विदेशी मजदूरों को 2019 के अंत तक वापस भेजने को कहा गया था. इसका मकसद उत्तर कोरिया की सरकार की विदेशी मुद्रा से होने वाली कमाई पर रोक लगाना था.
इसके बावजूद चीन में उत्तर कोरियाई मजदूरों के काम करने की खबरें सामने आती रही हैं. अमेरिकी कांग्रेस के चीन संबंधी आयोग की 2025 की रिपोर्ट में भी चीन में उत्तर कोरियाई मजदूरों की कमजोर स्थिति और उनके शोषण को लेकर चिंता जताई गई थी. रिपोर्ट यहां पढ़ें.
फिलहाल, 40 साल से ज्यादा उम्र की शादीशुदा महिलाओं को ज्यादा संख्या में चीन भेजे जाने के पीछे की असली वजह स्पष्ट नहीं है. लेकिन सामने आ रही रिपोर्ट बताती हैं कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन महिलाओं पर पड़ रहा है, जो अपने बच्चों से दूर रहकर काम करने को मजबूर हैं. उनके लिए रोजी-रोटी कमाने की जिम्मेदारी और परिवार से मिलने की चाह के बीच संतुलन बनाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है.
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