नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से मिलना किसी आम नेता से मुलाकात जैसा बिल्कुल नहीं है. यहां तक कि उनसे मिलने वाले लोगों को पहले करीब एक महीने की खास ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. उन्हें बताया जाता है कि किम के सामने कैसे खड़ा होना है, कब बोलना है, कितना बोलना है और यहां तक कि उनके सामने किस तरह की बॉडी लैंग्वेज रखनी है.
यह दावा उत्तर कोरिया के पूर्व राजनयिक ली इल-ग्यू ने किया है. वह किम जोंग उन से सात बार मुलाकात कर चुके हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि किम से मुलाकात के दौरान छोटी-सी गलती भी भारी पड़ सकती है. उनके मुताबिक, किम के आसपास कही और की गई लगभग हर बात रिकॉर्ड की जाती है.
किम से मिलने से पहले एक महीने की ट्रेनिंग
ली इल-ग्यू उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं. उन्होंने बताया कि किम जोंग उन से मिलने वाले लोगों को पहले विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. यह ट्रेनिंग करीब एक महीने तक चलती है. इस दौरान उन्हें बोलने और व्यवहार करने के सख्त नियम सिखाए जाते हैं.
ली के मुताबिक, किम के सामने खड़े होकर बार-बार हिलना-डुलना या बेवजह कोई हरकत करना मना होता है. अगर किम उनकी तरफ आएं तो उन्हें घबराकर पीछे हटने या भागने के बजाय शांति से एक तरफ हटना होता है. सबसे अहम नियम बातचीत को लेकर है.
किम जोंग उन जब तक खुद कोई सवाल न पूछें, तब तक सामने वाले को अपनी तरफ से बातचीत शुरू नहीं करनी होती. न कोई अतिरिक्त बात, न उत्साह दिखाने की कोशिश और न ही बेवजह तारीफ.
सवाल का जवाब भी बेहद नपा-तुला होना चाहिए
ली इल-ग्यू बताते हैं कि अगर किम कोई सवाल पूछते हैं तो उसका जवाब छोटा, सीधा और बिल्कुल सही होना चाहिए. उनके मुताबिक, जवाब देते समय अनावश्यक बातें करना ठीक नहीं माना जाता. सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी सवाल का जवाब नहीं पता है तो ऐसा दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि सब कुछ मालूम है.
क्योंकि किम के आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाती है और बातचीत को रिकॉर्ड किया जाता है. ली के मुताबिक, उत्तर कोरिया में इन रिकॉर्डिंग्स को देश के 'क्रांतिकारी इतिहास' को दर्ज करने के तौर पर पेश किया जाता है. किम के साथ रहने वाले उनके सचिव उनकी कही बातों को भी नोट करते हैं. इसलिए उनके मुताबिक, किम के सामने झूठ बोलना भी बेहद जोखिम भरा हो सकता है.
पहली मुलाकात में कांप रही थी आवाज
ली इल-ग्यू ने किम जोंग उन से अपनी पहली मुलाकात का अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि पहली बार वह एयरपोर्ट के वीआईपी वेटिंग रूम में किम से मिले थे. उस समय वह इतने नर्वस थे कि बोलते वक्त उन्हें अपनी आवाज तक कांपती हुई सुनाई दे रही थी.
हालांकि, उन्होंने खुद को जल्दी संभाल लिया. उनका कहना था कि अगर वह लगातार तनाव में रहते तो अपना काम ठीक से नहीं कर पाते. और काम में गलती के गंभीर नतीजे हो सकते थे.
उन्होंने यह भी कहा कि किम से मिलना उत्तर कोरियाई सरकारी प्रचार में बताए जाने जैसा 'भगवान से मिलने' जैसा अनुभव नहीं था. लेकिन यह आम इंसानों के बीच होने वाली सामान्य मुलाकात भी नहीं थी.
क्यूबा के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान 2 दिन रहे करीब
नवंबर 2018 में ली इल-ग्यू ने क्यूबा के तत्कालीन राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल की उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान कार्यक्रमों के समन्वय की जिम्मेदारी संभाली थी. यह यात्रा दो दिन की थी. इस दौरान किम जोंग उन के साथ बातचीत, एक सरकारी भोज और प्योंगयांग के मे डे स्टेडियम में कार्यक्रम शामिल था.
ली के मुताबिक, किम से उनकी बातचीत ज्यादातर उनके सवालों के जवाब देने तक सीमित रहती थी. किम विमान, खाने की पसंद और क्यूबा की आबादी जैसी चीजों के बारे में सवाल पूछते थे.
ली इल-ग्यू के मुताबिक, किम के सामने खुद को अलग या खास दिखाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए. उनका कहना है कि जरूरत से ज्यादा तारीफ करना या बनावटी मुस्कान देना भी सही नहीं माना जाता. यानी किम के सामने सिर्फ इसलिए खुश दिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह देश के सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं.
ली के मुताबिक, किम भी एक इंसान हैं और उन्होंने उन्हें हंसते और दूसरों के प्रति विचारशील होते हुए देखा है. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सत्ता के दूसरे पहलू को भी करीब से महसूस किया.उनका कहना है कि उत्तर कोरिया में किम की सत्ता को चुनौती देने वाली कोई प्रभावी ताकत नहीं है.
एक दुभाषिए को पड़ गई थी भारी डांट
ली ने एक करीब 60 साल के दुभाषिए से जुड़ी घटना भी बताई. उनके मुताबिक, वह दुभाषिया किम की बातचीत का अनुवाद कर रहा था और किसी मौके पर उसने किम की बात के बीच में बोल दिया. ली का दावा है कि किम इससे नाराज हो गए और उन्होंने उस व्यक्ति को 'बदतमीज' या 'असभ्य' कह दिया.
इसके बाद कथित तौर पर आदेश दिया गया कि वह व्यक्ति दोबारा किम के आसपास न आए. ली के मुताबिक, उस समय अधिकारियों को लगा था कि दुभाषिए की जिंदगी खत्म हो गई है. हालांकि, वह कथित तौर पर मौत की सजा से बच गया, क्योंकि उसके एक रिश्तेदार का संबंध उत्तर कोरिया के शक्तिशाली ऑर्गनाइजेशन एंड गाइडेंस डिपार्टमेंट से था.
बाद में उसे 'क्रिटिसिज्म सेशन' से गुजरना पड़ा. इसमें उसे करीब एक सप्ताह तक अपने ही काम और व्यवहार की आलोचना करते हुए लिखना पड़ा. ली इल-ग्यू ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि उस समय लोगों को सच में लगा था कि उस व्यक्ति की जिंदगी खत्म हो गई.
यह भी पढ़ें: रोबोट वैक्यूम क्लीनर ने पकड़ा पत्नी का अफेयर, लेकिन पति को मिली सजा
उनके मुताबिक, किम जोंग उन की ओर से की गई सिर्फ एक आलोचना भी किसी व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है. यही वजह है कि किम से मुलाकात करने वाले लोगों के लिए सिर्फ यह जानना काफी नहीं होता कि क्या कहना है. उन्हें यह भी सीखना पड़ता है कि कब चुप रहना है, कैसे खड़ा होना है और किम के सामने किस तरह का व्यवहार करना है.
ली का दावा है कि उन्होंने किम जोंग उन से सात बार मुलाकात की और हर मुलाकात के दौरान तनाव का माहौल महसूस किया. उनके शब्दों में, इन मुलाकातों में उन्होंने किम के अंदर एक सामान्य इंसान की झलक भी देखी और बेलगाम सत्ता वाले शख्स की कठोरता भी.
aajtak.in