24 जून 2026 को नेशनल ज्योग्राफिक ने एक ऐसी ही घटना की जानकारी दी, जिसमें एक ग्रीन एनाकोंडा ने दुनिया के सबसे बड़े कृंतक कैपिबारा को एक ही बार में निगल लिया. कैपिबारा अगर नहीं जानते, तो हम आपको बता दें कि यह दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है और पानी के आसपास रहना पसंद करता है.
यह दिखने में बड़े, भारी-भरकम चूहे जैसा लगता है. इसका वजन आमतौर पर करीब 35 से 65 किलो तक हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, एनाकोंडा बड़े शिकार को टुकड़ों में नहीं काट सकता, इसलिए उसे पूरा निगलता है. इसके जबड़े को जोड़ने वाले लिगामेंट काफी लचीले होते हैं, जिससे वह अपने सिर से काफी बड़े शिकार को भी निगल सकता है.
मौके का इंतजार और हमला
दक्षिण अमेरिका के अमेजन क्षेत्र में पाया जाने वाला ग्रीन एनाकोंडा दुनिया के सबसे भारी सांपों में शामिल है. इसकी शिकार करने की रणनीति इसकी ताकत जितनी ही दिलचस्प है. यह जमीन पर शिकार का पीछा करने के बजाय अक्सर पानी में छिपकर सही मौके का इंतजार करता है.
ग्रीन एनाकोंडा की आंखें और नाक सिर के ऊपरी हिस्से में होती हैं. इसकी वजह से यह पानी में लगभग पूरी तरह डूबे रहने के बावजूद आसपास की गतिविधियों पर नजर रख सकता है. नेशनल ज्योग्राफिक के मुताबिक, एनाकोंडा अपना काफी समय पानी में शिकार के इंतजार में बिताता है.
यह भी पढ़ें: ग्रीन एनाकोंडा, खतरनाक मगरमच्छ... ...ये रहस्यमयी जंगल, अंदर से कैसी है दुनिया?
शिकार जैसे ही इसकी पहुंच में आता है, एनाकोंडा तेजी से हमला करता है. यह अपने मजबूत जबड़ों और दांतों से शिकार को पकड़ता है और फिर अपने मांसल शरीर को उसके चारों ओर लपेट लेता है. इसके बाद शरीर के घेरे लगातार कसते जाते हैं. अचानक हमले से शिकार को संभलने का मौका कम मिलता है. यानी पलक झपकी और शिकार गिरफ्त में.
ग्रीन एनाकोंडा जहरीला सांप नहीं
यह जहरीला सांप नहीं है. ग्रीन एनाकोंडा अपने शिकार को जहर से नहीं, बल्कि शरीर से जकड़कर मारता है. स्मिथसोनियन के मुताबिक, इसके शिकार में कैपिबारा, कैमन, हिरण और बड़े पक्षी जैसे जानवर शामिल हो सकते हैं.
पानी ग्रीन एनाकोंडा के लिए एक तरह का प्राकृतिक कवर भी है. शिकागो के शेड एक्वेरियम के अनुसार, यह अक्सर पानी में या पानी के किनारे लगभग पूरी तरह डूबा रहता है और किसी अनजान जानवर के पास आने का इंतजार करता है.
यही वजह है कि अमेजन के शांत दिखने वाले पानी में छिपा ग्रीन एनाकोंडा अपने शिकार को तब तक दिखाई नहीं देता, जब तक वह हमला करने के लिए आगे नहीं बढ़ता.
ग्रीन एनाकोंडा के इंसानों पर हमले की घटनाओं की रिपोर्टें मिलती हैं, लेकिन इंसान को शिकार बनाकर खाने की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं. ग्रीन एनाकोंडा इंसान पर हमला या उसे जकड़ने की कोशिश कर सकता है, लेकिन इंसान को उसका सामान्य शिकार नहीं माना जाता. इंसान को खा लेने के विश्वसनीय रूप से दर्ज मामलों की संख्या बेहद सीमित और अनिश्चित है.
aajtak.in