आज के समय में नौकरी पाने के लिए ज्यादातर लोग इंटरव्यू में वही कहते हैं जो सामने वाला सुनना चाहता है. लेकिन दिल्ली के एक 25 साल के युवक ने ऐसा नहीं किया. उसने इंटरव्यू के दौरान साफ शब्दों में कह दिया कि वह शनिवार को काम नहीं करेगा क्योंकि ऑफिस के बाहर भी उसकी अपनी लाइफ है. हैरानी की बात यह रही कि उसकी इस बात से नाराज होने के बजाय कंपनी के फाउंडर ने उसे नौकरी पर रख लिया. अब यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे बदलती वर्क कल्चर की मिसाल बता रहे हैं.
दिल्ली की एक कंपनी के फाउंडर ने लिंक्डइन पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया. उन्होंने बताया कि जब उम्मीदवार से पूछा गया कि क्या वह जरूरत पड़ने पर शनिवार को भी काम कर सकता है तो उसने बिना झिझक जवाब दिया. उसने कहा कि सर मेरे ऑफिस के बाहर भी एक जिंदगी है. शनिवार मेरा अपना दिन है. मैं उस दिन क्रिकेट खेलता हूं गिटार बजाता हूं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताता हूं. अगर कोई बहुत जरूरी स्थिति होगी तो मैं मदद कर दूंगा लेकिन हर शनिवार ऑफिस नहीं आ सकता.
पहले लगा कि लड़का कामचोर है
फाउंडर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद यह उम्मीदवार काम के प्रति गंभीर नहीं है. आमतौर पर इंटरव्यू में लोग नौकरी पाने के लिए हर शर्त मान लेते हैं. लेकिन इस युवक ने बिना किसी डर के अपनी बात रखी. हालांकि कुछ देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह लड़का झूठ नहीं बोल रहा बल्कि ईमानदारी से अपनी प्राथमिकताएं बता रहा है. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आई. फाउंडर ने आखिरकार उसी उम्मीदवार को नौकरी देने का फैसला किया. उनका कहना है कि इंटरव्यू में ईमानदारी दिखाना किसी भी कर्मचारी की सबसे बड़ी ताकत होती है. उन्होंने सोचा कि जो व्यक्ति शुरुआत से ही साफ बात कर रहा है वह आगे चलकर भी भरोसेमंद साबित होगा.
उन्होंने यह भी बताया कि नौकरी मिलने के बाद उस युवक ने शानदार प्रदर्शन किया. उसने समय पर अपना काम पूरा किया और टीम के बाकी कई लोगों से बेहतर नतीजे दिए. इससे उन्हें समझ आया कि लंबे समय तक ऑफिस में बैठे रहना ही अच्छी नौकरी की पहचान नहीं है. असली मायने काम की गुणवत्ता रखते हैं.
सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग अलग राय सामने आई. कई लोगों ने कहा कि नई पीढ़ी अब सिर्फ नौकरी के लिए अपनी पूरी निजी जिंदगी दांव पर नहीं लगाना चाहती. उनका मानना है कि काम जरूरी है लेकिन परिवार दोस्तों और खुद के लिए समय निकालना भी उतना ही जरूरी है. कुछ लोगों ने लिखा कि अगर कर्मचारी को आराम और पर्सनल लाइफ का समय मिलेगा तो वह ज्यादा उत्साह और बेहतर प्रदर्शन के साथ काम करेगा. वहीं कुछ यूजर्स का कहना था कि स्टार्टअप में कभी कभी अतिरिक्त समय देना पड़ता है इसलिए ऐसी शर्तें हर जगह लागू नहीं हो सकतीं.
बदल रही है काम करने की सोच
पिछले कुछ सालों में काम करने के तरीके को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है. खासकर Gen Z यानी 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी मेंटल हेल्थ, पर्सनल स्पेस और वर्क लाइफ बैलेंस को पहले से ज्यादा महत्व देती है. यही वजह है कि अब कई कंपनियां भी कर्मचारियों की जरूरतों को समझने की कोशिश कर रही हैं.
यह घटना बताती है कि हर अच्छा कर्मचारी वही नहीं होता जो हर समय ऑफिस में मौजूद रहे. कई बार अपनी सीमाएं साफ शब्दों में बताना और ईमानदारी से काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. अगर कर्मचारी और कंपनी दोनों एक दूसरे की जरूरतों को समझें तो बेहतर माहौल बन सकता है. यही कारण है कि इस युवक की एक सच्ची बात ने उसे नौकरी भी दिलाई और अब उसकी कहानी लाखों लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है.
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