घर बनाने में ईंट का रोल सबसे अहम होता है. भट्ठे में तैयार, आग में पकी पारंपरिक लाल ईंट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. आजकल इन लाल ईंटों के कई विकल्प आ चुके हैं. इनमें से ही एक ऐसी भी ईंट है, जिसे बनाने में हफ्तों और महीने भर का समय नहीं लगता है. बस झाग स्प्रे किया और मजबूत ईंट बन गई. आजकल घर बनाने में ऐसी ईंटों के इस्तेमाल का ट्रेंड काफी बढ़ गया है. चलिए जानते हैं आखिर ये कैसी ईंट हैं जो झाग स्प्रे करने से तैयार हो जाती है और यह झाग किस तरह का होता है.
झाग स्प्रे करने से बनने वाली ईंटों को फोम कंक्रीट ब्लॉक्स या सेल्युलर लाइटवेट कंक्रीट ब्लॉक्स (CLC) कहा जाता है. यह एक आधुनिक निर्माण तकनीक है, जिसमें पारंपरिक मिट्टी की ईंटों की तरह इन्हें आग में पकाने की जरूरत नहीं होती है. आजकल जब लाल ईंट महंगी हो गई है ऐसे में घर के कुछ हिस्सों को बनाने में इन ईंटों का इस्तेमाल लोग खूब कर रहे हैं. यह ट्रेंड इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि, इसका आकार सामान्य लाल ईंट से बड़ा होता है और इसके इस्तेमाल में सीमेंट और रेत भी कम खर्च होते हैं. इस तरह यह एक किफायती सौदा भी है. ऐसे में समझते हैं कि यह फोम ईंट या सीएलसी ब्लॉक बनते कैसे हैं?
कैसे तैयार होती है ये ईंट
सबसे पहले सीमेंट, पानी और महीन रेत या फ्लाई ऐश को एक मिक्सर मशीन में डालकर एक गाढ़ा घोल यानी स्लरी तैयार किया जाता है. एक विशेष फोमिंग एजेंट या सिंथेटिक लिक्विड को पानी के साथ मिलाकर फोम जनरेटर मशीन में डाला जाता है. यह मशीन एयर कंप्रेसर की मदद से बहुत ही गाढ़ा और टिकाऊ सफेद झाग तैयार करता है. जैसा शेविंग क्रीम का फोम होता है.
इस तैयार झाग को सीधे सीमेंट के घोल वाले मिक्सर में पाइप या स्प्रे नोजल के जरिए स्प्रे किया जाता है. मिक्सर को धीरे-धीरे चलाया जाता है ताकि झाग के छोटे-छोटे बुलबुले सीमेंट के घोल के साथ अच्छी तरह मिल जाएं और टूटें नहीं.
यह झाग सीमेंट के कुल वॉल्यूम को 40% से 80% तक बढ़ा देता है. जब झाग और सीमेंट का मिश्रण पूरी तरह एकसमान हो जाता है, तो इस तरल घोल को बड़े-बड़े ईंट या ब्लॉक के आकार के सांचों में डाल दिया जाता है.
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घोल सांचे में डालने के बाद इसे 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है. इससे यह शुरुआती रूप से शख्त हो जाता है. इसके बाद सांचों को खोलकर ब्लॉक्स को निकाल लिया जाता है और इन्हें पूरी मजबूती पाने के लिए कुछ दिनों या हफ्तों तक पानी छिड़ककर या स्टीम चैंबर में सुखाया जाता है.
इन ईंटों की ये है खासियत
इसके अंदर झाग के कारण छोटे-छोटे हवा के बुलबुले फंस जाते हैं. इससे यह सामान्य ईंट से काफी हल्की होती है.हवा के बुलबुलों के कारण यह गर्मी और ठंड को दीवार के आर-पार जाने से रोकती है, जिससे घर अंदर से ठंडा रहता है. एक तरह से यह थर्मल इंसुलेशन काम करती है.ये ईंटें साउंड और फायर प्रूफ होती हैं.
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इन ईंटों का इस्तेमाल घर के पार्टिशन दीवारों को बनाने में किया जाता है. क्योंकि, यह नॉन-लोड बेयरिंग होती है. इसके साथ ही वैसे कमरों को बनाने में इन ईंटों का इस्तेमाल करते हैं, जो साउंड प्रूफ होनी चाहिए या फिर जहां थर्मल इंसुलेशन यानी एसी की जरूरत होती है.
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