हवाई यात्रा करने वाले ज्यादातर लोगों का सपना होता है कि एक बार फर्स्ट क्लास या बिजनेस क्लास में सफर करने का मौका मिले. कई लोग सोचते हैं कि एयर होस्टेस से रिक्वेस्ट कर देंगे, ज्यादा पैसे दे देंगे या फिर कोई खास बहाना बना देंगे तो उन्हें अपग्रेड मिल जाएगा. लेकिन 15 साल का अनुभव रखने वाली एक एयर होस्टेस ने बताया है कि असलियत इससे बिल्कुल अलग है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट अटेंडेंट बारबरा बैसिलिएरी के मुताबिक, लोग अक्सर फर्स्ट क्लास में अपग्रेड पाने के लिए तरह-तरह की तरकीबें अपनाते हैं. कोई कहता है कि वह हनीमून पर जा रहा है, तो कोई केबिन क्रू को खुश करने की कोशिश करता है. लेकिन सच यह है कि इन तरीकों का कोई फायदा नहीं होता.
फ्लाइट में बैठने से पहले ही तय हो जाता है अपग्रेड
बारबरा बताती हैं कि ज्यादातर एयरलाइंस में फर्स्ट क्लास या बिजनेस क्लास का अपग्रेड बोर्डिंग शुरू होने से कई घंटे पहले ही तय कर दिया जाता है. जब तक यात्री फ्लाइट अटेंडेंट से अपग्रेड की बात करते हैं, तब तक फैसला हो चुका होता है. केबिन क्रू सिर्फ उसी लिस्ट के हिसाब से काम करता है, जो एयरलाइन पहले से तैयार करके देती है.
उन्होंने बताया कि आमतौर पर एयरलाइन अपने लॉयल यानी ज्यादा उड़ान भरने वाले यात्रियों (फ्रीक्वेंट फ्लायर) को प्राथमिकता देती है. जिनका स्टेटस ज्यादा होता है, उनके अपग्रेड होने की संभावना भी अधिक रहती है.
अगर किस्मत आजमानी है तो अपनाएं ये तरीका
हालांकि, अगर दो यात्रियों की प्राथमिकता बराबर हो, तो एक छोटी-सी बात फर्क पैदा कर सकती है.बारबरा का कहना है कि जैसे ही ऑनलाइन चेक-इन शुरू हो, उसी समय चेक-इन कर लेना चाहिए. कई एयरलाइंस में अगर दो यात्रियों की पात्रता समान हो, तो पहले चेक-इन करने वाले को अपग्रेड मिलने की संभावना ज्यादा रहती है.
अकेले सफर कर रहे हैं तो बढ़ सकते हैं चांस
फ्लाइट अटेंडेंट के मुताबिक, अकेले यात्रा करने वाले यात्रियों के अपग्रेड होने की संभावना परिवार या बड़े ग्रुप के मुकाबले ज्यादा होती है. इसकी वजह यह है कि एक अकेले यात्री की सीट बदलना एयरलाइन के लिए आसान होता है, जबकि पूरे परिवार या ग्रुप को साथ बैठाना मुश्किल हो सकता है.
कपड़े भी डाल सकते हैं असर
बारबरा का कहना है कि सिर्फ महंगा सूट पहन लेने से किसी को फर्स्ट क्लास नहीं मिल जाता. लेकिन अगर कोई यात्री बहुत ज्यादा कैजुअल या बेहद अनौपचारिक कपड़ों में आता है, तो इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.
उनके मुताबिक, साफ-सुथरे और सलीकेदार कपड़े पहनने से अच्छा प्रभाव पड़ता है और आपको नजरअंदाज किए जाने की संभावना कम हो सकती है. यानी जरूरी नहीं कि आप फॉर्मल सूट पहनें, लेकिन आपका पहनावा व्यवस्थित और सार्वजनिक यात्रा के मुताबिक होना चाहिए.
कपड़ों को लेकर भी सख्त हो रही हैं एयरलाइंस
हाल ही में जर्मनी की फिटनेस इन्फ्लुएंसर एड्डा एलिसा ने दावा किया था कि उन्हें लुफ्थांसा की फ्लाइट में उनके कपड़ों की वजह से चढ़ने से रोक दिया गया.एलिसा ने काले रंग की बाइकर शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा पहन रखी थी. उनका कहना था कि एयरलाइन स्टाफ ने उनसे कहा कि इस तरह के कपड़ों में वे विमान में सवार नहीं हो सकतीं और उन्हें कुछ ऊपर से पहनना होगा.
हालांकि एलिसा का कहना था कि उन्हें एयरलाइन के किसी ड्रेस कोड की जानकारी नहीं थी. वहीं, लुफ्थांसा की ओर से कहा गया कि यात्रियों के कपड़े सार्वजनिक यात्रा के अनुरूप होने चाहिए.
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यानी अगर आप अगली बार इकोनॉमी टिकट लेकर इस उम्मीद में सफर कर रहे हैं कि शायद फर्स्ट क्लास में सीट मिल जाए, तो किसी बहाने या सिफारिश से ज्यादा काम समय पर चेक-इन करना, अकेले यात्रा करना और सलीकेदार तरीके से तैयार होकर एयरपोर्ट पहुंचना आ सकता है. हालांकि, अंतिम फैसला हमेशा एयरलाइन की अपग्रेड नीति और उपलब्ध सीटों पर ही निर्भर करता है.
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