दुबई जाने का सपना ज्यादातर लोग बेहतर कमाई और अच्छी सेविंग के लिए देखते हैं. लेकिन दुबई में काम कर रहे एक भारतीय शेफ की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है — वजह है उसकी सैलरी नहीं, बल्कि उसे खर्च करने का तरीका.
यह युवक भारत का रहने वाला है और दुबई में शेफ के तौर पर काम करता है. हाल ही में उसे "Emirates Loves India" के एक वीडियो में दिखाया गया, जिसमें उसने बताया कि वह बिरयानी बनाने में माहिर है और पिछले तीन साल से बैंगलोर मेमोरीज नाम के एक रेस्तरां में काम कर रहा है. कंपनी की तरफ से उसे रहने की जगह और वीजा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं.
90 हजार रुपये सैलरी, लेकिन खुद के लिए रखता है बस मुट्ठी भर पैसे
शेफ ने बताया कि उसकी महीने की सैलरी 3,500 दिरहम है, जो भारतीय रुपये में करीब 90,500 रुपये होती है. लेकिन जब उससे पूछा गया कि वह इसमें से कितना पैसा घर भेजता है, तो जवाब सुनकर कई लोग हैरान रह गए. बेंगलुरु में रहने वाले अपने परिवार को वह लगभग पूरी सैलरी भेज देता है.उसने कहा कि सब घर भेज देता हूं, बस अपने जरूरी खर्च के लिए थोड़ा रखता हूं.
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छोटी बचत, लेकिन सपना बहुत बड़ा
दिलचस्प बात यह है कि इतनी कम बचत के बावजूद इस शेफ का सपना बड़ा है. उससे जब उसके ड्रीम के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि वह एक दिन दुबई में अपना खुद का भारतीय रेस्तरां खोलना चाहता है.
देखें वीडियो
मालिक को बताया परिवार जैसा
शेफ ने अपने काम और मालिक के साथ रिश्ते को लेकर भी दिल छू लेने वाली बात कही. उसके मुताबिक, जिस तरह लोग अपना घर छोड़कर विदेश में काम करने आते हैं, उसी तरह यहां के मालिक भी उन्हें परिवार की तरह रखते हैं और सब मिलकर बिजनेस को आगे बढ़ाते हैं.
वीडियो वायरल होते ही मिली तारीफ, कुछ ने उठाया सवाल भी
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने शेफ की मेहनत और उसके सपने की जमकर तारीफ की. रेस्तरां की टीम ने भी कमेंट कर उसका हौसला बढ़ाया और लिखा कि उन्हें उस पर गर्व है.हालांकि कुछ यूजर्स ने एक व्यावहारिक सवाल भी उठाया.जब शेफ अपनी लगभग पूरी सैलरी भारत भेज देता है और बचत नहीं करता, तो फिर अपना रेस्तरां खोलने के लिए पैसे कैसे जुटाएगा?
शायद इसी सवाल के बीच इस शेफ की कहानी सबसे खास बन जाती है. आज वह दूसरों के रेस्तरां में बिरयानी बना रहा है, लेकिन कल अपना रेस्तरां खोलने का सपना देख रहा है. परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए भी वह अपने सपने को जिंदा रखे हुए है और शायद विदेश में मेहनत कर रहे लाखों भारतीयों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है: पहले घरवालों की जरूरतें, अपने सपने बाद में.
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