चीन से कुछ साल पहले सामने आई एक ऐसी कहानी ने लोगों को झकझोर दिया था, जिसमें एक पिता ने अपनी बीमार दो साल की बेटी के लिए खुद कब्र खोद दी थी. उस समय इस घटना पर काफी विवाद हुआ था, लेकिन आज इसी कहानी का अंत उम्मीद और खुशियों से भरा है. जिस जगह कभी बच्ची के लिए कब्र खोदी गई थी, उसी जगह अब उसके माता-पिता ने फूलों का छोटा सा गार्डन बना दिया है. सिचुआन प्रांत के नेइजियांग की रहने वाली झांग शिनलेई को महज दो महीने की उम्र में थैलेसीमिया नाम की गंभीर वंशानुगत ब्लड संबंधी बीमारी का पता चला था.
इस बीमारी में शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता. ऐसे मरीजों को लंबे समय तक इलाज और नियमित रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है.बेटी की बीमारी का पता चलने के बाद उसके माता-पिता ने इलाज में अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी. परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी. शिनलेई के पिता झांग लियॉन्ग एक कांच की फैक्ट्री में काम करते थे और उन्हें करीब 2,500 युआन महीने की कमाई होती थी. दो साल के दौरान बच्ची के इलाज पर 1.4 लाख युआन से ज्यादा खर्च हो चुके थे.
पैसे खत्म हुए तो पिता ने उठाया बेहद भावुक कदम
जब परिवार के पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे और कर्ज लेने के रास्ते भी बंद होने लगे, तब पिता ने अपनी बेटी के लिए एक ऐसी कब्र खोदी, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए. पिता अपनी छोटी बेटी को उस जगह ले जाते थे और उसके साथ समय बिताते थे. उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि अगर कभी बेटी की मौत हो जाए तो उसे उस जगह से डर न लगे. वह उसके साथ कब्र में लेटते और उसके पास समय बिताते थे. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद चीन में बड़ी संख्या में लोगों ने इसे देखा. कई लोग पिता की मजबूरी और बेटी के प्रति प्यार देखकर भावुक हुए, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि इतनी छोटी बच्ची को कब्र में ले जाना उसके मेंटल हेल्थ के लिए ठीक है या नहीं.
लोगों की मदद से मिली उम्मीद की किरण
घटना सामने आने के बाद शिनलेई के परिवार के लिए लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया. बड़ी संख्या में लोगों ने आर्थिक सहायता दी. इसी दौरान परिवार को इलाज के लिए आगे बढ़ने का मौका मिला. बाद में शिनलेई की छोटी बहन का जन्म हुआ. उसकी अंबलिकल कॉर्ड से मिले खून में मौजूद स्टेम सेल का इस्तेमाल शिनलेई के इलाज में किया गया. अगस्त 2017 में उसका ट्रांसप्लांट किया गया और कुछ समय बाद उसकी हालत में काफी सुधार आया. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद उसे पहले की तरह नियमित खुद चढ़ाने की जरूरत नहीं रही.
जिस कब्र में डर छिपा था, वहीं अब खुशियां हैं
सबसे भावुक बात यह है कि जिस जगह कभी पिता ने अपनी बेटी के लिए कब्र खोदी थी, आज वही जगह फूलों के बगीचे में बदल चुकी है. परिवार ने वहां सूरजमुखी समेत कई फूल लगाए हैं. सूरजमुखी शिनलेई के पसंदीदा फूल बताए जाते हैं. यानी जिस जगह को कभी परिवार ने अपनी बच्ची के अंतिम सफर की जगह समझ लिया था, वही जगह बाद में उसकी नई जिंदगी और खुशियों की निशानी बन गई.
आज कैसी है शिनलेई?
इस कहानी का सबसे सुखद हिस्सा शिनलेई की जिंदगी में आया बदलाव है. सालों बाज बाद वह स्वस्थ और सामान्य लाइफ जी रही है. हाल की रिपोर्ट के अनुसार, वह अब बड़ी हो चुकी है, पढ़ाई करती है और उसे पेंटिंग बनाना और डांस करना पसंद है. कभी जिस बच्ची के माता-पिता इलाज के पैसे खत्म होने के कारण उसकी मौत के लिए खुद को तैयार कर रहे थे, आज वही बच्ची अपने परिवार के लिए उम्मीद की वजह बनी हुई है. उसकी कहानी बताती है कि मुश्किल समय कितना भी बड़ा क्यों न हो, कई बार मदद, इलाज और उम्मीद मिलकर जिंदगी की दिशा बदल सकते हैं.
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