अगर आपन पुरानी चाइनीज फिल्म देखते हैं. हो सकता है आपने कभी एक ऐसा सीन जरूर देखा हो, जिसमें कोई महिला बालकनी से नीचे एक कढ़ाई वाली गेंद फेंकती है. गेंद युवक को जाकर लगता है या जो उसे पकड़ लेता है. वही उसका होने वाला पति बन जाता है. सुनने में यह परंपरा काफी दिलचस्प लगती है. प्राचीन ऐसी परंपरा थी और आज भी कुछ जनजतीय समूहों में ऐसे रिवाज हैं.
असल कहानी थोड़ी अलग है. कढ़ाई वाली गेंद फेंकने की परंपरा चीन में जरूर रही है, लेकिन इसे बालकनी से फेंककर किसी अनजान शख्स को पति चुनने की प्रथा अब नहीं है. अब सबकुछ पहले से तय रहता है. दक्षिणी चीन के गुआंग्शी इलाके में रहने वाले झुआंग समुदाय में यह गेंद प्रेम का इजहार करने का एक पारंपरिक तरीका रहा है. इसमें एक-दूसरे को पसंद करने वाले युवक-युवती गेंद फेंकते थे. यह अब रेंडमली नहीं होता है.
फिल्मों और कहानियों में खूब दिखाया गया
पुराने चीनी उपन्यासों और पीरियड ड्रामा में कढ़ाई वाली गेंद के जरिए पति चुनने का किस्सा कई बार देखने को मिलता है. 16वीं सदी में लिखे गए मशहूर उपन्यास 'जर्नी टू द वेस्ट' में भी ऐसा प्रसंग आता है. इसमें मुख्य किरदार श्वेनजांग के पिता का चुनाव उसकी मां कढ़ाई वाली गेंद फेंककर ही करती है. इसी घटना के जरिए पूरी कहानी बताई गई है.
इसी तरह 1998 के मशहूर चीनी टीवी ड्रामा 'माय फेयर प्रिंसेस ' में भी एक अमीर परिवार की बेटी का ऐसा प्रसंग दिखाया गया है. कहानी में उसके पिता उस शादी का विरोध करते हैं, क्योंकि लड़की की गेंद एक गरीब युवक के हाथ लग जाती है. ऐसी कहानियां इतनी बार फिल्मों, सीरियल और साहित्य में दिखाई गईं कि लोगों को लगने लगा कि प्राचीन चीन में यह सचमुच पति चुनने का आम तरीका था. लेकिन इतिहास कुछ और कहानी बताता है.
असल में प्रेम का इजहार करने का तरीका था
दक्षिणी चीन के गुआंग्शी झुआंग स्वायत्त क्षेत्र में रहने वाले झुआंग समुदाय में कढ़ाई वाली गेंद फेंकने की परंपरा काफी लोकप्रिय रही है. झुआंग समुदाय गुआंग्शी की आबादी का 30 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है. यहां युवा लड़के और लड़कियां पारंपरिक तौर पर इन गेंदों का इस्तेमाल एक-दूसरे के प्रति प्यार जताने के लिए करते थे.
खास तौर पर तीसरे चंद्र महीने के तीसरे दिन होने वाले एक ट्रेडिशनल फेस्टिवल में युवा बड़ी संख्या में इकट्ठा होते थे. यहां गीत गाए जाते थे और युवक-युवतियां एक-दूसरे से प्रेम का इजहार करते थे. अगर दो लोगों को एक-दूसरे से पसंद होती थी, तो वे एक-दूसरे की तरफ कढ़ाई वाली गेंद फेंकते थे. कई बार गेंद के साथ छोटा सा उपहार भी बांध दिया जाता था. यानी मामला सिर्फ 'गेंद पकड़ी और शादी हो गई' वाला नहीं था.
कैसी होती है ये खास गेंद?
यह गेंद भी कोई साधारण गेंद नहीं होती. आम तौर पर यह मुट्ठी के आकार की होती है और इसे हाथ से तैयार किया जाता है. इसे करीब 12 कपड़े के भरे हुए हिस्सों को जोड़कर बनाया जाता है. गेंद पर चमकीले और शुभ माने जाने वाले रंगों की कढ़ाई की जाती है. इसमें रंग-बिरंगे रिबन और लाल लटकन भी लगाए जाते हैं.
गेंद के अलग-अलग हिस्सों में अक्सर बीज और चावल की भूसी भरी जाती थी. इसके ऊपर फूल, पक्षियों और दूसरे डिजाइन बनाए जाते थे. खास बात यह है कि इन गेंदों की खूबसूरती में बनाने वाली महिला की कारीगरी भी दिखाई देती थी. गेंद जितनी सुंदर और बारीकी से तैयार की जाती, उतना ही वह किसी युवक का ध्यान खींच सकती थी.
आखिर बालकनी से पति चुनने की कहानी कहां से आई?
अब सवाल यही है कि अगर असली परंपरा में लड़का-लड़की एक-दूसरे को गेंद फेंकते थे, तो फिर फिल्मों और कहानियों में बालकनी से गेंद फेंककर पति चुनने वाली कहानी कैसे आई? दरअसल, साहित्य और फिल्मों ने इस लोक परंपरा को एक नाटकीय रूप दे दिया. पुराने चीन में शादी सिर्फ दो लोगों का निजी फैसला नहीं हुआ करती थी.
खासकर सामंती दौर में शादी को परिवारों के बीच गठजोड़ के तौर पर देखा जाता था. परिवार की प्रतिष्ठा, सामाजिक हैसियत और आर्थिक स्थिति जैसी चीजें शादी के फैसले में महत्वपूर्ण होती थीं. महिलाओं को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की आजादी भी सीमित थी.
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ऐसे माहौल में गेंद फेंककर जीवनसाथी चुनने की कहानी एक तरह से परंपरागत शादी की व्यवस्था के खिलाफ अपनी पसंद जताने का प्रतीक बन गई. गेंद जिस व्यक्ति के पास जाती है, उससे शादी का फैसला मान लेना कहानी में इस बात को दिखाता है कि प्यार और किस्मत सामाजिक हैसियत से ऊपर हो सकती है.
आज भी है इस परंपरा की याद
आज के समय में कढ़ाई वाली गेंद फेंकना शादी का वादा नहीं माना जाता. लेकिन यह झुआंग समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है. कई लोगों के लिए यह परंपरा आज प्यार, पसंद और अपनी जिंदगी का फैसला खुद करने की भावना को दिखाती है.
तो क्या सच में गेंद लपकने वाला बन जाता था पति?
हर बार ऐसा नहीं था. यह बात फिल्मों और साहित्य में ज्यादा नाटकीय तरीके से दिखाई गई है. वास्तविक झुआंग परंपरा में कढ़ाई वाली गेंद मुख्य रूप से युवक-युवती के बीच प्रेम और पसंद जताने का माध्यम थी.
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यानी कहानी में भले ही लगे कि 'बालकनी से गेंद फेंकी और जिसने लपकी, वही पति बन गया', लेकिन असल परंपरा में मामला इतना अचानक और बेतरतीब नहीं था. पसंद करने वाले युवक पर ही युवती गेंद फेंकती हैं.
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