150 साल तक चिमनी में दबी रही किताब, लाइब्रेरी पहुंची तो लगा 19 लाख रुपये का जुर्माना!

ऑस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी में करीब 150 साल बाद एक पुरानी किताब लौटाई गई. पुराने नियमों के हिसाब से इस पर करीब 19 लाख रुपये का जुर्माना बनता था, लेकिन लाइब्रेरी ने एक भी रुपया नहीं लिया. अब इस दुर्लभ किताब को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा.

Advertisement
इतना बड़ा जुर्माना बनने के बावजूद लाइब्रेरी ने किसी से कोई पैसा नहीं लिया. ( Photo: ITG) इतना बड़ा जुर्माना बनने के बावजूद लाइब्रेरी ने किसी से कोई पैसा नहीं लिया. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. एक किताब करीब 150 साल बाद लाइब्रेरी में वापस लौटाई गईं. अगर पुराने नियमों के हिसाब से उसका जुर्माना लगाया जाता, तो फाइन लगभग 19 लाख रुपये होती. हालांकि, लाइब्रेरी ने इस पर कोई जुर्माना नहीं लिया और इस दुर्लभ किताब को अपने ऐतिहासिक संग्रह में शामिल करने का फैसला किया.

Advertisement

घर की मरम्मत के दौरान मिली पुरानी किताब
ऑस्ट्रेलिया के समुद्री शहर कियामा में एक व्यक्ति अपने पुराने घर की मरम्मत करा रहा था. इसी दौरान बंद पड़े फायरप्लेस (चिमनी) के अंदर ईंटों से बंद एक लकड़ी का बक्सा मिला. जब बक्सा खोला गया तो उसमें साल 1858 में प्रकाशित किताब 'Antiquities of Athens' रखी हुई थी. किताब काफी पुरानी थी, लेकिन अच्छी हालत में थी.

150 साल पहले लाइब्रेरी से ली गई थी किताब
जांच में पता चला कि यह किताब कियामा लाइब्रेरी की थी. माना जा रहा है कि इसे करीब 150 साल पहले किसी व्यक्ति ने लाइब्रेरी से उधार लिया था, लेकिन फिर कभी वापस नहीं किया. इतने पुराने रिकॉर्ड अब लाइब्रेरी के पास नहीं हैं, इसलिए यह पता नहीं चल पाया कि किताब किसने ली थी.

लाइब्रेरी के अधिकारियों ने बताया कि जब 1872 में लाइब्रेरी की शुरुआत हुई थी, तब किताब देर से लौटाने पर हर सप्ताह तीन पेंस का जुर्माना लगाया जाता था. अगर उसी नियम के हिसाब से 150 साल का जुर्माना जोड़ा जाए, तो इसकी रकम करीब 28 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, यानी लगभग 19 लाख रुपये बनती है.

Advertisement

लेकिन लाइब्रेरी ने नहीं लिया एक भी रुपया
इतना बड़ा जुर्माना बनने के बावजूद लाइब्रेरी ने किसी से कोई पैसा नहीं लिया. अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने मामले में किसी को जिम्मेदार ठहराना संभव नहीं है. उनके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि डेढ़ सौ साल पुरानी यह रेयर बुक सुरक्षित हालत में वापस मिल गई.

करीब 150 साल तक चिमनी के अंदर बंद रहने के बावजूद किताब काफी अच्छी हालत में मिली. इसमें कई दुर्लभ चित्र भी मौजूद हैं. अब इस किताब को आम लोगों के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे लाइब्रेरी के ऐतिहासिक संग्रह में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनोखी कहानी को देख और जान सकें.

जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा होने लगी. कई लोगों ने मजाक में लिखा कि अगर उन्होंने भी लाइब्रेरी की किताब देर से लौटाई है, तो शायद अब उन्हें भी डरने की जरूरत नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि यह किताब अब सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि इतिहास की एक अनमोल निशानी बन चुकी है.  

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »