आर्मेनिया की संसद में एक बार फिर झगड़ा हुआ और एक महीने में यह तीसरी बार है. वैसे तो भ्रष्टाचार और सरकारी पैसों के कथित गबन के आरोपों को लेकर यहां पहले से बवाल हो रहा है. लेकिन इस बार झगड़े की वजहों में 'सेक्स मिनिस्ट्री' को लेकर किया गया एक पुराना कमेंट भी शामिल है. कुछ महीनों पहले विपक्षी पार्टी से जुड़े एक शख्स ने सेक्स मिनिस्ट्री को लेकर एक बयान दिया था, जिसे लेकर अब सदन में हंगामा हो गया और विवाद लात-घूंसों तक पहुंच गया. ऐसे में जानते हैं कि सेक्स मिनिस्ट्री को लेकर यह विवाद क्या है और आखिर कई महीनों बाद इस पर हंगामा क्यों हो रहा है.
दरअसल, 'सेक्स मिनिस्ट्री' को लेकर यह विवाद किसी आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव या संसद में पेश किए गए विधेयक से नहीं जुड़ा है. इसका कनेक्शन जनवरी में जारी हुए एक पॉडकास्ट से है. उस वक्त आर्मेनिया में विपक्षी पार्टी 'स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया' से जुड़े सरगिस करापेत्यान ने एक पॉडकास्ट में देश की जनसंख्या से जुड़ी समस्या पर बातचीत की थी.
पॉडकास्ट में एक अन्य प्रतिभागी ने ‘मिनिस्ट्री ऑफ सेक्स’ का काल्पनिक नाम सुझाया. इस पर सरगिस करापेत्यान ने कहा कि सेक्स के बिना जनसांख्यिकीय समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता. इसी बातचीत में 'मिनिस्ट्री ऑफ सेक्स' बनाने का सुझाव आया. उनसे पूछा गया था कि क्या देश में 'मिनिस्ट्री ऑफ सेक्स' जैसा कोई मंत्रालय होना चाहिए?
इस पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जनसंख्या बढ़ाने की समस्या को इसके बिना हल नहीं किया जा सकता. इसी बातचीत में महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई थी. इन टिप्पणियों को महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताते हुए आलोचना की गई थी.
इस पर उस वक्त भी विवाद हुआ था, जिसके बाद सरगिस करापेत्यान ने अपनी सफाई में कहा था कि उनकी बात को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है. अब इसकी चर्चा में आने की वजह यह है कि 29 अक्टूबर को संसद में बहस के दौरान सत्तारूढ़ सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी के सांसद तारोन चाखोयान ने यह मुद्दा उठाया और स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के संसदीय दल के नेता नारेक करापेत्यान से महिलाओं से माफी मांगने को कहा.
नारेक, सरगिस के चचेरे भाई हैं. इस पर नारेक ने तिरस्कारपूर्ण संबोधन के साथ जवाब दिया. इसके बाद तीखी बहस हुई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई.
aajtak.in