आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज हर क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. कई कंपनियां दावा कर रही हैं कि आने वाले समय में एआई इंसानों का काम आसान बना देगा. लेकिन क्या कोई पूरा स्टोर सिर्फ एआई के भरोसे चल सकता है? अमेरिका में हुए एक अनोखे एक्सपेरिमेंट ने इस सवाल का जवाब दे दिया है. अमेरिका में एक ऐसा रिटेल स्टोर शुरू किया गया, जहां किसी इंसान को मैनेजर नहीं बनाया गया. पूरे स्टोर की जिम्मेदारी एक एआई सिस्टम को दी गई. कर्मचारियों को कहा गया कि वे छुट्टी लें, आराम करें और अगर कोई परेशानी हो तो एआई से बात करें. शुरुआत में यह प्रयोग काफी दिलचस्प लगा, लेकिन कुछ ही महीनों में इसका नतीजा उल्टा निकला और कंपनी को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
इस एक्सपेरिमेंट को एक रिसर्च कंपनी एंथ्रोपिक ने किया था. कंपनी ने अपने एआई मॉडल Claude को एक छोटे रिटेल स्टोर का मैनेजर बना दिया. इस ऐआई का नाम रखा गया 'Claudius'. इस एआई की जिम्मेदारी थी कि वह स्टोर का पूरा काम संभाले. इसमें सामान मंगवाना, स्टॉक का हिसाब रखना, ग्राहकों की मांग समझना, कीमत तय करना और कर्मचारियों को निर्देश देना जैसी सभी जिम्मेदारियां शामिल थीं. कंपनी यह देखना चाहती थी कि क्या एआई बिना किसी इंसानी दखल के एक दुकान चला सकता है.
कर्मचारियों से कहा गया- तनाव मत लो
स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों को साफ कहा गया कि अगर कोई समस्या हो तो एआई से पूछें. जरूरत पड़ने पर छुट्टी भी ले सकते हैं. एआई कर्मचारियों से अक्सर कहता था कि ज्यादा तनाव मत लो और आराम से काम करो. सुनने में यह तरीका काफी अच्छा लगता है, लेकिन असली चुनौती तब सामने आई जब रोजमर्रा के फैसले लेने की बारी आई.
यहीं से शुरू हुई गड़बड़
एआई कई बार ऐसे फैसले लेने लगा जिनका कोई मतलब नहीं था. उदाहरण के लिए, उसने कुछ सामान जरूरत से ज्यादा मंगा लिया, जबकि कुछ जरूरी चीजों का स्टॉक समय पर नहीं मंगवाया. इतना ही नहीं, एआई ग्राहकों की अजीब-अजीब मांगों को भी मान लेता था. कई बार उसने बिना सोचे-समझे कम कीमत पर सामान बेच दिया, जिससे कंपनी को नुकसान होने लगा. रिपोर्ट के मुताबिक एआई यह समझ ही नहीं पाया कि किसी रिटेल स्टोर में मुनाफा कमाना भी उतना ही जरूरी होता है जितना ग्राहकों को खुश रखना.
अपने ही अकाउंट का भूल गया पासवर्ड
इस एक्सपेरिमेंट के दौरान एक और हैरान करने वाली घटना सामने आई. स्टोर का प्रचार करने के लिए एआई को सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करना था, लेकिन वह अपने ही अकाउंट का पासवर्ड भूल गया. उसने कर्मचारियों से मदद मांगी और कई बार उलझन में गलत जवाब भी दिए. इससे साफ हो गया कि एआई अभी भी कई प्रैक्टिकल सिचुएशन में इंसानों जितना सक्षम नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मौकों पर एआई ने कर्मचारियों को ऐसे जवाब दिए जिनका सवाल से कोई संबंध नहीं था. कई बार वह अपनी ही बात बदल देता था. इससे कर्मचारियों के लिए यह समझना मुश्किल हो गया कि आखिर किस निर्देश का पालन किया जाए. यानी एआई जानकारी तो दे सकता है, लेकिन हर परिस्थिति में सही फैसला लेना उसके लिए अभी भी आसान नहीं है.
चार महीने में हुआ बड़ा नुकसान
यह प्रयोग करीब चार महीने तक चला. इस दौरान स्टोर को लगभग 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ. आखिरकार कंपनी को मानना पड़ा कि सिर्फ AI के भरोसे पूरा बिजनेस चलाना अभी संभव नहीं है. हालांकि इस प्रयोग से कंपनी को एआई की खूबियों और कमियों को समझने में काफी मदद मिली. इस एक्सपेरिमेंट से जुड़े रिसर्चर्स का कहना है कि एआई भविष्य में बिजनेस के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन अभी उसे पूरी तरह मैनेजर या बॉस बनाना जल्दबाजी होगी.
उनका मानना है कि एआई इंसानों की मदद करने वाला बेहतरीन टूल बन सकता है. यह डेटा एनालिस्ट, रिपोर्ट तैयार करना और कई छोटे-बड़े काम तेजी से कर सकता है, लेकिन जहां समझदारी, अनुभव और परिस्थिति के हिसाब से फैसला लेने की जरूरत होती है, वहां इंसानों की भूमिका अभी भी सबसे अहम है.
एआई इंसानों की जगह नहीं, मददगार बनेगा
इस पूरे प्रयोग से एक बात साफ हो गई कि एआई तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी वह हर जिम्मेदारी अकेले नहीं संभाल सकती. खासकर बिजनेस चलाने, ग्राहकों की जरूरत समझने और सही समय पर सही फैसला लेने जैसे कामों में इंसानी अनुभव की जरूरत बनी हुई है. यानी फिलहाल एआई को इंसानों का विकल्प नहीं, बल्कि एक मददगार के रूप में देखना ज्यादा सही होगा. आने वाले समय में एआई और इंसान साथ मिलकर काम करेंगे, लेकिन पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एआई को सौंपना अभी जोखिम भरा साबित हो सकता है.
aajtak.in