Yakten Village Sikkim: सिक्किम का ये खूबसूरत सा गांव क्यों बन रहा 'वर्क फ्रॉम होम' का नया ठिकाना, वजह जान आप भी बना लेंगे मन

Yakten Village Sikkim: सिक्किम का याकतेन (Yakten) गांव भारत का पहला डिजिटल नोमैड विलेज बनकर रिमोट वर्क करने वालों के लिए नई उम्मीद बन रहा है. यहां पहाड़ों के बीच रहकर ऑफिस का काम करने के साथ स्थानीय संस्कृति और गांव की जिंदगी को करीब से जानने का मौका मिलता है. अगर आप भी काम छोड़े बिना घूमना चाहते हैं तो सिक्किम का यह गांव आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है.

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सिक्किम के याकतेन गाँव में करें वर्क फ्रॉम (Photo- ITG) सिक्किम के याकतेन गाँव में करें वर्क फ्रॉम (Photo- ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:25 PM IST

Yakten Village Sikkim: अगर आप रोजाना ऑफिस के काम, ट्रैफिक और घर की चारदीवारी से बोर हो चुके हैं तो जरा सोचिए कि कैसा हो अगर आप पहाड़ों के बीच बैठकर लैपटॉप पर अपना काम कर सकें. सुबह खूबसूरत वादियों के नजारे देखें और काम खत्म होने के बाद गांव की शांत जिंदगी का आनंद लें. सिक्किम के याकतेन (Yakten) गांव में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. यहां रिमोट वर्क करने वाले लोगों के लिए भारत का पहला समर्पित डिजिटल नोमैड विलेज (Digital Nomad Village) विकसित किया गया है.

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सिक्किम के पाकयोंग जिले में स्थित याकतेन लिंबू समुदाय का एक खूबसूरत गांव है. यहां दूर-दराज की कंपनियों में काम करने वाले लोग कई हफ्तों तक ठहरते हैं. वे गांव के होमस्टे में रहकर अपनी ऑफिस मीटिंग और दूसरे काम पूरे करते हैं. इसके साथ ही उन्हें पहाड़ों के बीच समय बिताने और स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी मिलता है.

पहाड़ों के बीच काम करने की सुविधा
डिजिटल नोमैड ऐसे लोग होते हैं जो इंटरनेट की मदद से किसी भी जगह से अपना काम कर सकते हैं. इनमें फ्रीलांसर, कंटेंट राइटर और घर से काम करने वाले दूसरे प्रोफेशनल्स शामिल हैं. याकतेन में ऐसे लोगों के लिए बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और सुविधाओं वाले होमस्टे तैयार किए गए हैं, ताकि वे यहां लंबे समय तक रहकर भी अपना काम आसानी से कर सकें.

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यहां लोग पहाड़ी होमस्टे में बैठकर ऑफिस कॉल्स लेते हैं और लैपटॉप पर काम करते हैं. काम के बाद वे गांव में घूम सकते हैं, स्थानीय लोगों से मिल सकते हैं और आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकते हैं. इस तरह उन्हें काम के साथ नई जगह पर रहने का अनुभव भी मिलता है.

सिर्फ घूमना नहीं, गांव के लोगों से जुड़ना भी मकसद
याकतेन की खास बात यह है कि यहां आने वाले लोग सिर्फ पर्यटक बनकर नहीं रहते. वे गांव के लोगों के साथ स्थानीय त्योहारों, शादियों और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं. वहीं, बाहर से आने वाले प्रोफेशनल्स स्थानीय युवाओं और कारोबारियों के साथ अपने काम का अनुभव साझा करते हैं और बिजनेस से जुड़ी सलाह भी देते हैं.

इस पहल से गांव के लोगों और बाहर से आने वाले लोगों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ रहा है. होमस्टे चलाने वाले स्थानीय परिवारों को भी पर्यटन से कमाई का फायदा मिल रहा है. इसका मकसद गांव को बड़े होटल या भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट हब में बदलना नहीं, बल्कि इसकी स्थानीय पहचान को बनाए रखते हुए लोगों को एक-दूसरे के करीब लाना है.

काम के साथ घूमने का नया तरीका
याकतेन जैसे डिजिटल नोमैड विलेज उन लोगों के लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकते हैं जो अपनी नौकरी या काम छोड़े बिना नई जगहों पर रहना चाहते हैं. यहां इंटरनेट की मदद से काम जारी रखते हुए पहाड़ों, स्थानीय संस्कृति और गांव की जिंदगी को करीब से जानने का मौका मिलता है. साथ ही, ऐसी पहल छोटे गांवों में पर्यटन के नए अवसर पैदा करने और स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद कर सकती है.

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याकतेन गांव कैसे पहुंचें?

सिक्किम के याकतेन गांव जाने के लिए आप फ्लाइट, ट्रेन और सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां पहुंचने के लिए सबसे सुविधाजनक ऑप्शनों में से एक है पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट या न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन तक पहुंचना. वहां से टैक्सी लेकर गंगटोक और फिर पाकयोंग होते हुए याकतेन गांव पहुंच सकते हैं. गंगटोक से पाकयोंग तक का सफर लगभग डेढ़ घंटे का है, जबकि पाकयोंग से गांव तक टैक्सी मिल सकती है. 

अगर आप ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) स्टेशन उतरना एक बेहतर रहेगा. यहां से आगे टैक्सी या दूसरे सड़क परिवहन के साधनों से गांव तक पहुंचा जा सकता है. सफर पर निकलने से पहले टैक्सी और होमस्टे की बुकिंग कर लेना बेहतर रहेगा.

किस मौसम में जाना चाहिए याकतेन गांव?

याकतेन घूमने के लिए मार्च से मई और अक्टूबर से दिसंबर का समय अच्छा माना जाता है. मार्च से मई के बीच मौसम सुहावना रहता है और आसपास हरियाली के साथ फूलों की खूबसूरती देखने को मिलती है. वहीं, अक्टूबर से दिसंबर के बीच आसमान साफ रहने और पहाड़ों के नजारे देखने की संभावना बेहतर होती है. 

जून से सितंबर के बीच यहां मानसून रहता है. इस दौरान गांव की हरियाली आकर्षक लगती है लेकिन बारिश के कारण सड़क यात्रा में परेशानी हो सकती है. अगर आप लैपटॉप लेकर लंबे समय तक काम करने जा रहे हैं तो मौसम के साथ इंटरनेट की उपलब्धता, होमस्टे की सुविधाओं और आने-जाने के इंतजाम की जानकारी पहले ले लें.

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