Amazon-Flipkart से खरीदारी करते हैं? ऑर्डर कैंसिल होने पर बदल गए नियम, जानें आप पर क्या असर

Amazon और Flipkart से खरीदारी करते हैं तो आपके लिए ये खबर जरूरी है. दरअसल कंपनी ने कैंसिलेशन के नियम बदले हैं. सेलर अगर खुद से आपका ऑर्डर कैंसिल करता है तो उन्हें पेनाल्टी देनी होगी. इसके अलावा पुराने नियमों में भी कुछ बदलाव हुए हैं.

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ऐमेजॉन ने बदले कैंसिलेशन नियम ऐमेजॉन ने बदले कैंसिलेशन नियम

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:00 PM IST

ऐमेजॉन और फ्लिपकार्ट ने फेस्टिव सीजन से ठीक पहले अपने प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले सेलर्स के लिए फीस और पेनल्टी के नियम बदल दिए हैं.  ने ऑर्डर कैंसिलेशन पर लगने वाली फीस को ऑर्डर की कीमत से जोड़ दिया है, जबकि Flipkart ने समय पर ऑर्डर डिस्पैच न करने और कैंसिलेशन पर तय जुर्माने लागू किए हैं. इन बदलावों का असर छोटे और मध्यम ऑनलाइन कारोबारियों पर पड़ सकता है. 

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ऑनलाइन शॉपिंग का फेस्टिव सीजन आने वाला है. जल्द ही सेल, ऑफर्स और भारी डिस्काउंट के साथ ऐमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर ऑर्डर की रफ्तार बढ़ने वाली है. लेकिन इस बार सेलर्स के लिए काम पहले से ज्यादा सावधानी वाला हो सकता है. वजह है दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों के नए नियम, जिनमें ऑर्डर कैंसिल करने या समय पर सामान भेजने में चूक होने पर अतिरिक्त फीस और पेनल्टी लग सकती है.

ऐमेजॉन पर ऑर्डर कैंसिल करना कितना महंगा होगा?

ऐमेजॉन ने भारत में Easy Ship और Self Ship सेलर्स के लिए ऑर्डर कैंसिलेशन फीस का तरीका बदल दिया है. नए नियम 17 अगस्त 2026 से लागू हो चुके हैं. पहले यह फीस अलग-अलग कैटेगरी और रेफरल फीस के आधार पर तय होती थी. अब इसे सीधे ऑर्डर की कीमत के प्रतिशत के हिसाब से कैलकुलेट किया जाएगा. 

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नए नियम के मुताबिक, 10,000 रुपये से कम कीमत वाले ऑर्डर पर 10 प्रतिशत कैंसिलेशन फीस लगेगी. 10,001 से 50,000 रुपये के ऑर्डर पर यह 8 प्रतिशत होगी. 50,001 से 1 लाख रुपये के बीच के ऑर्डर पर 5 प्रतिशत और 1 लाख रुपये से ज्यादा के ऑर्डर पर 2 प्रतिशत फीस तय की गई है. इस फीस के ऊपर 18 प्रतिशत GST भी लागू होगा. 

यहां एक बात ग्राहकों के लिए भी साफ है. अगर खरीदार खुद ऑर्डर कैंसिल करता है, तो इस नियम के तहत सेलर पर कैंसिलेशन फीस लागू नहीं होगी. फीस मुख्य रूप से तब लगेगी, जब सेलर अपनी तरफ से ऑर्डर कैंसिल करता है. अगर सेलर तय समय के भीतर शिपमेंट भेजकर उसकी पुष्टि नहीं करता और ऑर्डर अपने आप कैंसिल हो जाता है, तब भी शुल्क लग सकता है. 

Amazon ने एक और फीस बढ़ाने का किया ऐलान

कैंसिलेशन फीस में बदलाव के अलावा Amazon ने क्लोजिंग फीस में भी बढ़ोतरी की घोषणा की है. कंपनी के अनुसार, 7 सितंबर 2026 से 500 रुपये तक की कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर क्लोजिंग फीस 1 रुपये बढ़ेगी. 500 रुपये से ऊपर के प्रोडक्ट्स पर यह फीस 3 रुपये बढ़ेगी. यह बदलाव फुलफिलमेंट सेंटर, इसी शिप और सेलर फ्लेक्स जैसे चैनलों पर लागू होगा. ऐमेजॉन ने इस बढ़ोतरी की वजह फ्यूल और लॉजिस्टिक्स लागत में इजाफा बताया है.

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फ्लिपकार्ट ने लगाया 30 से 90 रुपये तक का जुर्माना

दूसरी तरफ फ्लिपकार्ट ने भी सेलर्स के लिए ऑर्डर फुलफिलमेंट से जुड़े नियम सख्त किए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू हुई है. अगर कोई सेलर तय डिस्पैच बाइ डेट तक ऑर्डर फ्लिपकार्ट के लॉजिस्टिक्स पार्टनर को नहीं सौंपता है, तो उस पर 30 रुपये प्रति शिपमेंट का जुर्माना लग सकता है. 

अगर सेलर ऑर्डर मिलने के बाद उसे कैंसिल करता है, तो 60 रुपये की पेनल्टी लग सकती है. वहीं, तय डिस्पैच डेडलाइन मिस होने के बाद ऑर्डर कैंसिल करने पर कुल पेनल्टी 90 रुपये तक पहुंच सकती है. यानी फेस्टिव सीजन में ज्यादा ऑर्डर के साथ सेलर्स को अपनी इन्वेंट्री और डिस्पैच सिस्टम पर पहले से ज्यादा नजर रखनी होगी. 

सेलर्स क्यों परेशान हैं?

इन बदलावों को लेकर कई छोटे और मध्यम सेलर्स की चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि ऑनलाइन कारोबार में हर देरी या कैंसिलेशन हमेशा सेलर की गलती से नहीं होता. कभी पिकअप पार्टनर समय पर नहीं पहुंचता, कभी लॉजिस्टिक्स में दिक्कत आती है और कभी स्टॉक से जुड़ी समस्या हो जाती है. ऐसे मामलों में अतिरिक्त पेनल्टी से कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है.

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ऐमेजॉन का कहना है कि ग्राहक को भरोसेमंद डिलीवरी अनुभव देने के लिए यह बदलाव किया गया है और सेलर की तरफ से होने वाले कैंसिलेशन Amazon.in पर 1 प्रतिशत से भी कम ऑर्डर्स में होते हैं. कंपनी का यह भी कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सेलर्स की सुरक्षा के लिए उपाय मौजूद हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर हों. 

आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल इन नए नियमों का सीधा जुर्माना ग्राहकों पर नहीं लगाया जा रहा है. इसका असर मुख्य रूप से प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले सेलर्स पर है. हालांकि लंबे समय में अगर सेलर्स की लागत बढ़ती है, तो कुछ कैटेगरी में कीमत, डिस्काउंट या प्रोडक्ट उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग कारोबारी बढ़ी हुई लागत को खुद वहन करते हैं या उसे प्रोडक्ट की कीमत में शामिल करते हैं.

फेस्टिव सीजन में जहां ग्राहकों को तेज डिलीवरी और कम कैंसिलेशन चाहिए, वहीं सेलर्स के लिए चुनौती यह होगी कि ज्यादा ऑर्डर के दबाव के बीच स्टॉक, पैकिंग और डिस्पैच में कोई बड़ी चूक न हो. Amazon और Flipkart के नए नियमों की असली परीक्षा अब आने वाली फेस्टिव सेल में ही होगी.

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