Zoho फाउंडर श्रीधर वेम्बू की बड़ी बात, AI बढ़ा रहा है महंगाई, आपकी जेब पर पड़ेगा असर

टेक इंडस्ट्री में AI लेकर चिंता पहले से थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने RAM और स्टोरेज चिप्स की सप्लाई पर दबाव बनाया है. इसका असर स्मार्टफोन, PC और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की कीमतों पर पड़ रहा है. 

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Sridhar Vembu has warned that the AI investment surge resembles a credit bubble. (Image created using AI for representational purposes) Sridhar Vembu has warned that the AI investment surge resembles a credit bubble. (Image created using AI for representational purposes)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

AI की दुनिया में जितना पैसा लग रहा है, उसका असर सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों पर नहीं पड़ रहा. इसका असर अब आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है. भारतीय टेक कंपनी Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने AI की मौजूदा रेस को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि दुनिया में AI और डेटा सेंटर्स पर इतना बड़ा खर्च हो रहा है कि इसका असर मेमोरी चिप्स की कीमतों पर पड़ रहा है. यही वजह है कि फोन, लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स महंगे हो सकते हैं.

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AI को लेकर पूरी दुनिया में बड़ी रेस चल रही है. OpenAI, Google, Microsoft, Meta और दूसरी कंपनियां तेजी से बड़े AI मॉडल और डेटा सेंटर्स बना रही हैं. इन सबको चलाने के लिए भारी मात्रा में चिप्स, GPU, सर्वर और मेमोरी की जरूरत होती है.

श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में मेमोरी की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई. उनके मुताबिक, एक समय था जब सॉफ्टवेयर बनाने वाली दुनिया मेमोरी को लगभग सस्ता और आसानी से मिलने वाला रिसोर्स मानती थी. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. वेम्बु ने कहा कि मेमोरी और AI टोकन की बढ़ती कीमतों ने बिजनेस चलाना मुश्किल बना दिया है. 

AI डेटा सेंटर्स खा रहे हैं मेमोरी?

AI मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बड़ी मात्रा में खास तरह की मेमोरी चाहिए. बड़ी चिप कंपनियां अब AI डेटा सेंटर्स के लिए इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. इसमें ज्यादा कमाई है. लेकिन इसका दूसरा असर यह है कि फोन और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली सामान्य मेमोरी की सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है.

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टेक इंडस्ट्री में इसे लेकर चिंता पहले से थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने RAM और स्टोरेज चिप्स की सप्लाई पर दबाव बनाया है. इसका असर स्मार्टफोन, PC और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की कीमतों पर पड़ रहा है. 

एक साल में 500% तक महंगी हुई मेमोरी

रिपोर्ट्स में कुछ DDR5 मेमोरी किट्स की कीमत में पिछले 12 महीनों के दौरान भारी उछाल की बात कही गई है. कुछ मामलों में कीमतें कई गुना तक बढ़ी हैं. यही कारण है कि वेम्बु ने कहा कि मेमोरी को अब पहले की तरह हल्के में नहीं लिया जा सकता. सॉफ्टवेयर और AI सिस्टम को भी अब कम मेमोरी में बेहतर तरीके से काम करने लायक बनाना होगा.

फोन और लैपटॉप क्यों महंगे हो रहे हैं?

आपके फोन में RAM है. स्टोरेज है. प्रोसेसर है. आपके लैपटॉप में भी यही चीजें हैं. अगर इनमें इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स महंगे होते हैं तो कंपनियों के लिए पुरानी कीमत पर नया डिवाइस बेचना मुश्किल हो सकता है. कुछ कंपनियां शुरुआत में बढ़ी हुई लागत खुद सहन करती हैं. लेकिन लागत लगातार बढ़ती रहे तो उसका कुछ हिस्सा ग्राहक तक पहुंच सकता है.

Axios की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, AI कंपनियां और बड़े हाइपरस्केलर आने वाले सालों के लिए मेमोरी सप्लाई लॉक करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे PC और फोन बनाने वाली कंपनियों को कम सप्लाई के लिए मुकाबला करना पड़ सकता है. 

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AI से नौकरी गई, अब गैजेट भी महंगे?

श्रीधर वेम्बु पहले AI के असर को लेकर एक और बड़ी चिंता जता चुके हैं. उन्होंने कहा था कि IT कंपनियां पहले जितनी नई नौकरियां नहीं बना रही हैं. उनके मुताबिक, जो पैसा पहले नए कर्मचारियों को रखने में जा सकता था, उसका एक हिस्सा अब AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हो रहा है. 

अब उनकी नई चिंता मेमोरी और कंप्यूटिंग की बढ़ती लागत है. यानी AI की रेस का असर कई जगह दिख रहा है. कहीं नौकरियों पर सवाल उठ रहे हैं. कहीं कंपनियों का खर्च बढ़ रहा है. और अब इसका असर आम लोगों के फोन और लैपटॉप की कीमत पर भी पड़ सकता है.

 

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