92 रनों से सेमीफाइनल में शोर मचाया, 40 रनों से फिर अपना अंदाज दिखाया और अब ट्रॉफी की इमोजी... वैभव सूर्यवंशी के तेवर बता रहे हैं कि दलीप ट्रॉफी के इस सफर में उनकी नजर अब अगली बड़ी चुनौती पर है. ईस्ट जोन ने गत चैम्पियन सेंट्रल जोन को 4 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली है और 6 सितंबर को चेन्नई के चेपॉक में खिताब के लिए उतरेगा.
वैभव के लिए यह सेमीफाइनल खास रहा. पहली पारी में 81 गेंदों पर 92 रन और दूसरी पारी में 43 गेंदों पर 40 रन- दोनों पारियों में उन्होंने अपने आक्रामक अंदाज की झलक दिखाई. खास बात यह रही कि रेड-बॉल क्रिकेट के इस बड़े मुकाबले में भी वैभव ने अपनी बल्लेबाजी की रफ्तार और बेखौफ अंदाज से समझौता नहीं किया.
फाइनल का टिकट मिलने के बाद उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में आई ट्रॉफी की इमोजी ने कहानी में एक दिलचस्प मोड़ जोड़ दिया है. अब ईस्ट जोन के पास 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब जीतने का मौका है और वैभव के पास अपने शानदार सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भी असर छोड़ने का मौका.
जब जरूरत थी, तब वैभव ने बढ़ाई रफ्तार
सेमीफाइनल के तीसरे दिन ईस्ट जोन के सामने जीत के लिए चुनौती थी. टीम को लक्ष्य तक पहुंचना था और दबाव भी कम नहीं था. ऐसे मौके पर वैभव ने अपनी बल्लेबाजी से मैच का माहौल बदलने में योगदान दिया.
पहली पारी में उनका अंदाज खास तौर पर देखने लायक था. 81 गेंदों में 92 रन- यानी शतक से सिर्फ 8 रन दूर, लेकिन पारी में रफ्तार की कोई कमी नहीं.
वैभव ने गेंद को देखने के बाद उस पर हमला करने से परहेज नहीं किया. उनकी पारी में आक्रामक स्ट्रोक्स थे और यही वजह रही कि वह सेमीफाइनल के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे.
दूसरी पारी में भी कहानी बहुत अलग नहीं रही. इस बार 43 गेंदों में 40 रन आए. यानी रेड-बॉल क्रिकेट में उतरने के बावजूद वैभव अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल को छोड़ने के मूड में नहीं थे. हालांकि इस पारी में उन्होंने धैर्य का भी परिचय दिया. कुछ देर तक संभलकर खेलने के बाद जब उन्हें लगा कि रन बनाने की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ रही है, तो वैभव ने अचानक गियर बदल दिया.
निशाने पर आए सेंट्रल जोन के तेज गेंदबाज यश ठाकुर- वही यश, जिन्होंने पहली पारी की शुरुआत में वैभव को खासा परेशान किया था. इस बार वैभव ने हिसाब चुकता करने में देर नहीं लगाई. यश के एक ओवर में उन्होंने 4, 6, 4, 4 उड़ाकर अपना आक्रामक अंदाज दिखा दिया.
लेकिन अगली ही गेंद पर कहानी ने अचानक पलटी खाई. वैभव के बल्ले से एक और बड़ा शॉट निकला, मगर इस बार गेंद सीमा रेखा के पार जाने की बजाय हवा में गई और रजत पाटीदार ने जोशीला कैच लपककर उनकी पारी का अंत कर दिया.
यानी 40 रनों की इस पारी में भी वैभव की पूरी कहानी दिखी- पहले धैर्य, फिर रफ्तार और मौका मिलते ही गेंदबाज पर हमला. बस इस बार उनका यह तूफानी अंदाज अगली ही गेंद पर थम गया.
टी20 वाला वैभव, लाल गेंद के सामने भी बेखौफ
वैभव सूर्यवंशी की पहचान जिस बल्लेबाजी से बनी है, उसमें आक्रामकता सबसे ऊपर है. कम उम्र में ही उन्होंने टी20 क्रिकेट में अपनी तेजतर्रार बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई है.
ईस्ट जोन के फाइनल में पहुंचने के बाद वैभव की सोशल मीडिया पोस्ट ने फैन्स का ध्यान खींचा. उन्होंने इंस्टाग्राम पर ट्रॉफी की इमोजी शेयर की.
यह कोई बड़ा दावा नहीं था, लेकिन इस छोटे से पोस्ट में उनकी चाहत जरूर नजर आई-फाइनल में पहुंचने के बाद अब लक्ष्य खिताब है.
ईस्ट जोन के लिए भी यह मौका खास है. टीम के पास लंबे इंतजार के बाद फिर दलीप ट्रॉफी जीतने का अवसर है. और वैभव जैसे किशोर खिलाड़ी के लिए यह फाइनल अपने रेड-बॉल सफर में एक और बड़ा पड़ाव हो सकता है.
शमी-मुकेश की धार, वैभव का बल्ला
ईस्ट जोन की इस जीत में सिर्फ वैभव की बल्लेबाजी ही चर्चा में नहीं रही. बंगाल के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार (3/56 & 4/44) और मोहम्मद शमी (2/42 & 3/56) ने अपनी धारदार गेंदबाजी से सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया.
गेंदबाजों ने विपक्षी टीम को रोकने का काम किया तो बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए मुकाबले को अपने पक्ष में किया. नतीजा- ईस्ट जोन की 4 विकेट से जीत और फाइनल का टिकट.
13 साल बाद फिर चेपॉक में फाइनल
अब कहानी सीधे चेन्नई पहुंच गई है. ईस्ट जोन 6 सितंबर से एमए चिदंबरम स्टेडियम में दलीप ट्रॉफी के फाइनल में उतरेगा. उसके सामने साउथ जोन या नॉर्थ जोन में से किसी एक की चुनौती होगी.
दिलचस्प बात यह है कि ईस्ट जोन के लिए चेपॉक सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि अच्छी यादों से जुड़ी जगह भी है.
2012/13 में ईस्ट जोन ने आखिरी बार दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता था और तब भी फाइनल चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ही खेला गया था.
उस मुकाबले में ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी. यानी 13 साल बाद ईस्ट जोन फिर उसी मैदान पर फाइनल खेलने जा रहा है.
लगातार दो खिताब जीत चुका है ईस्ट जोन
ईस्ट जोन का दलीप ट्रॉफी इतिहास बहुत लंबा नहीं, लेकिन दिलचस्प जरूर है. 1961 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट में ईस्ट जोन अब तक दो बार चैम्पियन बना है. खास बात यह है कि दोनों खिताब लगातार आए थे.
2011/12 में ईस्ट जोन चैम्पियन बना और 2012/13 में उसने अपना खिताब बरकरार रखा.
अब टीम के पास तीसरी बार ट्रॉफी जीतने का मौका है. फाइनल में पहुंचकर उसने पहला कदम उठा लिया है. अब चेपॉक में आखिरी कदम उठाना बाकी है.
वैभव के लिए फाइनल में बड़ी परीक्षा
सेमीफाइनल में 92 और 40 रन बनाने के बाद स्वाभाविक रूप से फाइनल में भी वैभव पर नजरें रहेंगी. लेकिन फाइनल सेमीफाइनल से अलग मुकाबला होगा.
यहां दबाव ज्यादा होगा, सामने मजबूत गेंदबाजी आक्रमण होगा और हर रन की कीमत भी ज्यादा होगी. ऐसे में वैभव के लिए चुनौती सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि अपनी आक्रामक शैली के साथ परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी करना भी होगी.
सेमीफाइनल ने हालांकि एक बात साफ कर दी है- लाल गेंद के सामने वैभव डरकर खेलने वाले नहीं हैं. अब देखना होगा कि चेपॉक में उनका बल्ला कैसा जवाब देता है. ट्रॉफी की इमोजी से असली ट्रॉफी तक...
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क