भारतीय क्रिकेट में किसी खिलाड़ी का टीम में आना खबर होता है, लेकिन कई बार उसका बाहर रहना उससे भी बड़ी कहानी बन जाता है. मोहम्मद शमी के साथ अभी यही हो रहा है. वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए स्क्वॉड घोषित हुआ तो 37 साल के रवींद्र जडेजा की वापसी हुई, आकिब नबी को पहली बार ODI का बुलावा मिला और नमन धीर को भी मौका दिया गया. लेकिन 36 साल के मोहम्मद शमी एक बार फिर बाहर रह गए.
यहीं से असली सवाल शुरू होता है- शमी के लिए फैसला आखिर क्यों नहीं बदला?
क्योंकि जडेजा का फैसला बदल चुका है. कुछ महीने पहले तक जो खिलाड़ी वनडे सेटअप से बाहर दिख रहा था, वही अब फिर टीम में लौट आया है. ऐसे में शमी के मामले में दरवाजा अब भी बंद क्यों है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है.
जडेजा लौट सकते हैं तो शमी क्यों नहीं?
सेलेक्शन में भावनाओं की जगह नहीं होनी चाहिए. यह बात बिल्कुल सही है. हर अनुभवी खिलाड़ी को सिर्फ उसके पुराने रिकॉर्ड के आधार पर टीम में जगह नहीं दी जा सकती. लेकिन चयन के फैसलों को समझने के लिए एकरूपता भी जरूरी है. जडेजा की वापसी ने इसी वजह से एक दिलचस्प संदर्भ पैदा किया है.
अगर वनडे में शमी को इस्तेमाल करने की योजना होती, तो वह इस टीम में होते. उनके मुताबिक शमी के लिए एक ‘आउटसाइड चांस’ जरूर था, लेकिन आखिरकार चयनकर्ताओं ने उन्हें नहीं चुना. यहां सवाल शमी को टीम में रखने या नहीं रखने का कम और उनके लिए चयनकर्ताओं की सोच क्या है, इसका ज्यादा है.
शमी की जगह अब नबी का नाम क्यों?
टीम में मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे अनुभवी विकल्प हैं. इसके साथ गुरनूर बरार और आकिब नबी को भी जगह मिली है. नबी के लिए यह पहला ODI कॉल-अप है. यानी चयनकर्ता सिर्फ मौजूदा जरूरत पूरी नहीं कर रहे, नए विकल्प भी देख रहे हैं.
यह 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. अगले विश्व कप तक टीम को अपने तेज गेंदबाजी विकल्पों की तस्वीर साफ करनी होगी. इसलिए नए खिलाड़ियों को आजमाना चयन की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है.
लेकिन इसी प्रक्रिया में शमी का नाम बार-बार बाहर रहना चर्चा को जन्म देता है. क्या शमी अब चयनकर्ताओं की भविष्य की योजना का हिस्सा नहीं हैं?
इस सवाल का जवाब अभी किसी निश्चित निष्कर्ष के रूप में देना जल्दबाजी होगी. चयनकर्ताओं ने ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि शमी को वनडे योजना से स्थायी रूप से बाहर कर दिया गया है.
लेकिन लगातार बाहर रहना अपने आप में एक संकेत जरूर है और क्रिकेट में संकेतों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
शमी के पास सिर्फ पुराना नाम नहीं, बड़ा रिकॉर्ड भी है
शमी के मामले को सिर्फ उम्र के चश्मे से देखना भी अधूरा होगा. वह भारत के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाजों में रहे हैं. 200 से ज्यादा ODI विकेट, विश्व कप जैसे बड़े मंचों पर प्रभाव और लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अनुभव उनके खाते में है. लेकिन यही वह जगह है जहां चयनकर्ताओं और शमी के बीच सवाल पैदा होता है.
क्या चयनकर्ता अब भविष्य को प्राथमिकता दे रहे हैं या शमी को अभी भी वापसी का रास्ता खुला रखना चाहते हैं?
अगर योजना पूरी तरह भविष्य की है तो नबी जैसे नए खिलाड़ियों को मौका मिलना समझ में आता है. लेकिन अगर शमी अभी भी वनडे प्लान में हैं, तो उन्हें लगातार बाहर रखने की वजह ज्यादा स्पष्ट होनी चाहिए.और यहीं जडेजा वाली कहानी चुभती है
जडेजा की वापसी इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. क्योंकि इससे यह साफ होता है कि चयनकर्ता किसी खिलाड़ी के बारे में लिया गया फैसला बदल भी सकते हैं. परिस्थितियां बदलें, प्रदर्शन बदले या टीम की जरूरत बदले तो दरवाजा दोबारा खुल सकता है.
फिर शमी के मामले में वही दरवाजा क्यों नहीं खुल रहा?
यह सवाल शमी की उपलब्धियों से ज्यादा चयन की दिशा से जुड़ा है. अगर शमी को अब टीम के भविष्य का हिस्सा नहीं माना जा रहा, तो नए गेंदबाजों को लगातार मौके देना उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है. लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो शमी को बाहर रखने की वजह क्या है- यह सवाल बना रहेगा.
शमी शिकायत नहीं करते, इसलिए सवाल खत्म नहीं होते... शमी के रवैये को लेकर भी चर्चा हुई है. शमी उन खिलाड़ियों में नहीं हैं जो बार-बार अपनी शिकायत सार्वजनिक करते हैं. उनका करियर, उनकी उपलब्धियां और बड़े मुकाबलों का अनुभव उनके पास है.
लेकिन खिलाड़ी की चुप्पी को चयन के सवाल का जवाब नहीं माना जा सकता. शमी कुछ कहें या न कहें, सवाल अपनी जगह रहेगा.
एक तरफ जडेजा का फैसला बदला गया. दूसरी तरफ नबी जैसे नए खिलाड़ी को सीधे ODI टीम में जगह मिली. और बीच में शमी हैं, जिनके लिए दरवाजा अभी तक नहीं खुला. यही इस चयन की सबसे बड़ी कहानी है.
क्या यह सिर्फ एक सीरीज है?
यहां सावधानी जरूरी है. वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम में शमी का नहीं होना अपने आप में उनके वनडे करियर का अंत नहीं है. तीन मैचों की एक सीरीज से 2027 वर्ल्ड कप की पूरी तस्वीर तय नहीं होती.
लेकिन अगर आगे भी यही पैटर्न जारी रहता है, नए तेज गेंदबाजों को मौके मिलते हैं और शमी लगातार बाहर रहते हैं, तो यह मानने के आधार जरूर मजबूत होंगे कि चयनकर्ता अगली पीढ़ी की तरफ बढ़ रहे हैं.
फिलहाल तस्वीर इतनी ही है- जडेजा वापस आ गए हैं, नबी पहली बार ODI टीम में आ गए हैं, लेकिन शमी अब भी बाहर हैं. और इसलिए सवाल किसी एक सीरीज से बड़ा है:
शमी के लिए क्यों नहीं बदला फैसला? क्या चयनकर्ताओं की 2027 वाली तस्वीर में अब इस दिग्गज पेसर की जगह पहले जैसी नहीं रही? जवाब शायद वेस्टइंडीज सीरीज के तीन मैचों से नहीं, आने वाले कुछ महीनों के चयन से मिलेगा.
विश्व मोहन मिश्र