न्यूजीलैंड की छोटी बाउंड्री, कम रिएक्शन टाइम... फिर भी कोहली-रोहित कैसे पड़ते हैं भारी? फील्डिंग कोच ने खोला राज

न्यूजीलैंड के छोटे मैदानों पर फील्डरों को गेंद पर प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद कम समय मिलता है. इसके बावजूद विराट कोहली और रोहित शर्मा अपनी शानदार फील्डिंग से प्रभावित कर रहे हैं. टीम इंडिया के फील्डिंग कोच सुभदीप घोष ने बताया कि सालों तक एक ही पोजीशन पर खेलने से दोनों की मसल मेमोरी मजबूत हुई है.

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कोहली-रोहित का फील्डिंग सीक्रेट!  (Photo, PTI) कोहली-रोहित का फील्डिंग सीक्रेट! (Photo, PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • वेलिंगटन,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

न्यूजीलैंड के मैदानों पर छोटी बाउंड्री बल्लेबाजों के लिए भले ही फायदेमंद हो, लेकिन फील्डरों के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. गेंद तेजी से सीमा रेखा पार करती है और फील्डरों को प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद कम समय मिलता है. इसके बावजूद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी अपनी फुर्ती और सटीक फैसलों से कमाल कर रहे हैं. टीम इंडिया के फील्डिंग कोच सुभदीप घोष ने बताया है कि आखिर इन दोनों दिग्गजों की शानदार फील्डिंग का राज क्या है.

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सालों के अनुभव ने बनाया खास

भारत और न्यूजीलैंड के बीच शनिवार को वेलिंगटन में होने वाले दूसरे वनडे से पहले सुभदीप घोष ने कोहली और रोहित की फील्डिंग पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों के पास एक ही पोजीशन पर सालों तक फील्डिंग करने का अनुभव है. इससे उनकी मसल मेमोरी इतनी मजबूत हो गई है कि वे गेंद की दिशा और उसके रास्ते को दूसरों के मुकाबले जल्दी भांप लेते हैं.

घोष ने कहा, 'फील्डिंग में सबसे अहम चीजों में से एक है गेंद का अनुमान लगाना. विराट ने कवर और पॉइंट पर लाखों बार फील्डिंग की है. उन्हें गेंद की दिशा, उसके रास्ते और जमीन से टकराने के बाद उसके मूवमेंट का अंदाजा रहता है. वह दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले स्थिति को पहले पढ़ लेते हैं.'

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रोहित शर्मा की तारीफ करते हुए उन्होंने पहले वनडे में उनके शानदार रन आउट का भी जिक्र किया. घोष के मुताबिक, रोहित ने गेंद आने से पहले ही स्थिति को भांप लिया था. एक बेहतरीन फील्डर बनने में अनुभव के साथ प्राकृतिक प्रतिभा और एक ही काम को बार-बार दोहराने की भूमिका होती है.

छोटी बाउंड्री ने बढ़ाई फील्डरों की मुश्किल

न्यूजीलैंड के मैदानों पर छोटी बाउंड्री भारतीय फील्डरों के लिए अलग तरह की चुनौती पेश कर रही है. घोष ने बताया कि जब मैदान छोटा होता है तो बाउंड्री पर फील्डरों की जरूरत कम पड़ती है और ज्यादातर खिलाड़ियों को इनफील्ड में तैनात किया जाता है. ऐसे में बल्लेबाज के शॉट खेलने और फील्डर के प्रतिक्रिया देने के बीच का समय काफी कम हो जाता है.

उन्होंने कहा, 'अगर आप छोटी बाउंड्री वाले मैदानों पर खेलते हैं तो वहां कोई आउटफील्डर नहीं होता, हर कोई इनफील्डर होता है. रिएक्शन टाइम कम हो जाता है, क्योंकि बाउंड्री काफी करीब होती है.'

हल्की गेंद से हो रही खास प्रैक्टिस

फील्डिंग में तेजी और गेंद को सही तरीके से जज करने की क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय टीम अभ्यास में हल्की गेंद का इस्तेमाल कर रही है. घोष ने बताया कि हल्की गेंद खिलाड़ियों से ज्यादा स्थिरता और बेहतर प्रतिक्रिया की मांग करती है. इसके अलावा गेंद की मूवमेंट को समझने और सही समय पर फैसला लेने पर भी जोर दिया जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में गेंद को जज करना बेहद जरूरी है. उसकी मूवमेंट और फील्डर की स्थिरता पर टीम लगातार काम कर रही है. अभ्यास सत्रों में इन पहलुओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है.

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पहले वनडे में भारतीय फील्डरों का अच्छा प्रदर्शन

सुभदीप घोष ने पहले वनडे में भारतीय खिलाड़ियों की फील्डिंग पर संतोष जताया. उन्होंने कहा कि टीम ने अच्छे कैच पकड़े और ग्राउंड फील्डिंग में भी शानदार प्रदर्शन किया. खिलाड़ियों की ऊर्जा और मैदान पर उनका उत्साह भी अच्छा रहा.

घोष ने माना कि क्रिकेट में कैच छूटना खेल का हिस्सा है, लेकिन टीम इस पहलू को लेकर गंभीर है और खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं. अगस्त में लंबे समय तक फील्डिंग कोच रहे टी. दिलीप की जगह जिम्मेदारी संभालने वाले घोष अब टीम की फील्डिंग में स्थिरता और गेंद को सही तरीके से जज करने की क्षमता पर काम कर रहे हैं.

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लगातार क्रिकेट से थकान पर क्या बोले कोच?

भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-2 से जीत मिली थी. इसके बाद वनडे सीरीज में टीम इंडिया पहला मुकाबला जीतकर 1-0 से आगे है. इस दौरे के बाद भारतीय टीम को दो टेस्ट मैचों की सीरीज भी खेलनी है. लगातार क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों पर पड़ रहे शारीरिक दबाव को लेकर पूछे जाने पर घोष ने कहा कि यह चुनौती शारीरिक से ज्यादा मानसिक है.

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उन्होंने कहा कि लगातार क्रिकेट खेलना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इतने अनुभवी हैं कि ऐसी परिस्थितियों से निपटना जानते हैं.

वहीं, दूसरे वनडे में मोहम्मद सिराज को प्लेइंग-11 में मौका मिलेगा या नहीं, इस सवाल पर घोष ने कोई खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला टीम मैनेजमेंट करेगा.

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