22 साल का दाग मिटा, कोर्ट ने दी क्लीन चिट... पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन ने सुनाई दर्द की कहानी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने आपराधिक मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है. 2004 की FIR में फर्जी UK इमिग्रेशन स्टांप, यात्रा और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप लगाए गए थे, लेकिन अदालत में उनके खिलाफ ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं मिल सके.

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22 साल का केस, गई नौकरी... अब बरी हुए जैकब मार्टिन. (File Photo, AFP) 22 साल का केस, गई नौकरी... अब बरी हुए जैकब मार्टिन. (File Photo, AFP)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है. पटियाला हाउस कोर्ट ने 2004 की FIR से जुड़े मामले में मार्टिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया. उनके खिलाफ फर्जी UK इमिग्रेशन स्टांप, यात्रा की व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप लगाए गए थे, लेकिन अदालत के सामने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत नहीं मिले.

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2004 में क्या हुआ था?

यह मामला साल 2004 का है. जैकब मार्टिन की टीम UK में क्रिकेट खेलने गई थी. मार्टिन के मुताबिक, टीम का एक सदस्य तय समय से ज्यादा ब्रिटेन में रुक गया था. उसका वीजा छह महीने के लिए वैध था, लेकिन उसने इससे ज्यादा समय वहां बिताया.

मार्टिन ने बताया कि भारत लौटने के दौरान उस खिलाड़ी ने कथित तौर पर फर्जी इमिग्रेशन स्टांप हासिल किया था. ब्रिटेन से लौटने के बाद उसे IGI एयरपोर्ट पर पकड़ा गया और पूछताछ की गई.

इसके बाद इस पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी और जैकब मार्टिन का नाम भी इसमें शामिल कर लिया गया.

'FIR में मेरा नाम तक नहीं था'

मीडिया से बातचीत में मार्टिन ने दावा किया कि मूल FIR में उनका नाम नहीं था. उनका कहना है कि जांच के दौरान उनका नाम इसलिए जोड़ा गया क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे.

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बड़ौदा, असम और रेलवे के लिए खेल चुके मार्टिन ने कहा कि उनका नाम बड़ा होने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने की वजह से उन्हें मामले में घसीटा गया. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 22 वर्षों के दौरान उन्हें इस मामले के कारण काफी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा.

रेलवे की नौकरी भी चली गई

जैकब मार्टिन के मुताबिक, इस लंबे समय तक चले मामले का असर उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी पर भी पड़ा. उन्होंने कहा कि इस केस की वजह से उन्हें रेलवे की नौकरी गंवानी पड़ी.

उनके लिए 22 साल तक मामले का चलते रहना लगातार तनाव का कारण बना रहा. ऐसे में अदालत का फैसला उनके लिए सिर्फ कानूनी राहत नहीं, बल्कि लंबे इंतजार के बाद जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का मौका भी है.

अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके

पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जैकब मार्टिन के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं थे.

अदालत ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य नहीं पाए. इसके अलावा अजवा स्पोर्ट्स क्लब के स्वामित्व या उसके नियंत्रण को लेकर भी मार्टिन के खिलाफ ठोस सबूत सामने नहीं आए.

मामले के कई गवाह भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके. इसके बाद अदालत ने जैकब मार्टिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

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'22 साल बाद मिला बहुत बड़ा सुकून'

अदालत के फैसले के बाद मार्टिन ने इसे अपनी जिंदगी का बड़ा मोड़ बताया. उन्होंने कहा कि 22 साल तक इस मामले के कारण उन्हें जिस तनाव का सामना करना पड़ा, उससे अब उन्हें राहत मिली है.

उनके मुताबिक, यह फैसला उनके जीवन में एक बड़ा 'U-Turn' है और इससे उन्हें लंबे समय बाद सुकून मिला है.

भारत के लिए खेले 10 वनडे

जैकब मार्टिन दाएं हाथ के बल्लेबाज थे और उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व भी किया. उन्होंने भारत के लिए 10 वनडे इंटरनेशनल मैच खेले.

इन 10 मैचों में मार्टिन ने 158 रन बनाए. उनका बल्लेबाजी एवरेज 22.57 रहा. हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका नाम जाना-पहचाना रहा. 

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जैकब मार्टिन ने 138 मैचों की 227 पारियों में 9,192 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 30 शतक और 46 अर्धशतक जड़े, जबकि उनका उच्चतम स्कोर 271 रन रहा. उनका बल्लेबाजी एवरेज 46.65 का रहा.

22 साल पुराने मामले में अदालत से मिली क्लीन चिट ने अब जैकब मार्टिन के लिए एक लंबे कानूनी अध्याय का अंत कर दिया है.


 

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