2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया की तैयारी में ईशान किशन एक अहम नाम बनकर उभर रहे हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी दो वनडे के लिए उन्हें उपकप्तान बनाया जाना भी खास है. ओपनिंग, विकेटकीपिंग और मिडिल ऑर्डर... ईशान की तीन खूबियां उन्हें यशस्वी जायसवाल जैसे विशेषज्ञ बल्लेबाज से अलग खड़ा करती हैं. सवाल है कि क्या 15 सदस्यीय वर्ल्ड कप टीम में ईशान की बहुउपयोगिता जायसवाल पर भारी पड़ेगी?
वर्ल्ड कप की टीम बनाना किसी भी चयनकर्ता के लिए आसान काम नहीं होता. खासकर तब, जब आपके सामने 15 खिलाड़ियों की सीमा हो और हर पोजिशन के लिए कई दावेदार मौजूद हों. भारतीय क्रिकेट में इस समय कुछ ऐसा ही पेच फंसा हुआ है. टॉप ऑर्डर में रोहित शर्मा और शुभमन गिल की जगह लगभग तय मानकर चलें तो यशस्वी जायसवाल जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज के लिए रास्ता आसान नहीं है. लेकिन इसी मुकाबले में ईशान किशन की एंट्री ने चयनकर्ताओं के सामने एक दिलचस्प विकल्प रख दिया है.
ईशान सिर्फ ओपनर नहीं हैं. वह विकेटकीपर की भूमिका निभा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मिडिल ऑर्डर में भी बल्लेबाजी कर सकते हैं. यानी एक खिलाड़ी के चयन से टीम को तीन अलग-अलग विकल्प मिलते हैं. 2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है.
15 खिलाड़ियों की टीम में हर जगह कीमती, ईशान का यही है सबसे बड़ा प्लस पॉइंट
द्विपक्षीय सीरीज में टीम मैनेजमेंट के पास खिलाड़ियों को आजमाने की गुंजाइश रहती है. लेकिन वर्ल्ड कप में सिर्फ 15 खिलाड़ियों को चुनना होता है. ऐसे में चयनकर्ताओं को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होती है, जो एक से ज्यादा जिम्मेदारियां संभाल सकें.
ईशान इस मामले में मजबूत दावेदार हैं -
इन तीनों भूमिकाओं के लिए अलग-अलग खिलाड़ी चुनने की बजाय ईशान को टीम में रखने से एक अतिरिक्त जगह बचाने की संभावना बनती है. यही वजह है कि उनकी उपयोगिता सिर्फ बल्लेबाजी के आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती.
जायसवाल के सामने रोहित-गिल की दीवार, ईशान के पास दूसरा रास्ता
यशस्वी जायसवाल के लिए सबसे बड़ी मुश्किल उनकी प्रतिभा नहीं, बल्कि टीम का मौजूदा बैटिंग कॉम्बिनेशन है. रोहित शर्मा ने वनडे में शानदार वापसी की है. चार पारियों के भीतर दो शतक और एक 92 रनों की पारी ने उनके अगले वर्ल्ड कप खेलने के इरादे को मजबूती दी है. शुभमन गिल के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी भी टीम के लिए अहम है.
इसका सीधा असर जायसवाल पर पड़ा है. वह जून में चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ नाबाद 110 रन बनाने के बाद से वनडे नहीं खेले हैं और न ही वनडे टीम में जगह बना पाए हैं.
हालांकि जायसवाल का रिकॉर्ड उनकी प्रतिभा की गवाही देता है. वह वनडे की शुरुआती छह पारियों में दो शतक लगाने वाले भारत के इकलौते बल्लेबाज हैं. लेकिन उनकी समस्या यह है कि उनका स्वाभाविक बल्लेबाजी क्रम ओपनिंग है. लिस्ट ए क्रिकेट की 41 पारियों में वह टॉप दो के बाहर सिर्फ तीन बार बल्लेबाजी करने उतरे हैं. गेंदबाजी और विकेटकीपिंग का विकल्प भी उनके पास नहीं है.
ऐसे में अगर रोहित और गिल की जोड़ी बरकरार रहती है तो जायसवाल को सिर्फ बतौर रिजर्व ओपनर टीम में रखना चयनकर्ताओं के लिए मुश्किल फैसला हो सकता है.
ईशान का वनडे रिकॉर्ड बताता है, टॉप ऑर्डर ही नहीं मिडिल ऑर्डर में भी दम
ईशान की खासियत यह है कि वह वनडे में अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं.
ओपनर के रूप में उन्होंने नौ पारियों में 61.87 की औसत से रन बनाए हैं. हालांकि इसमें उनका दोहरा शतक भी शामिल है. वहीं, दूसरे नंबरों पर बल्लेबाजी करते हुए उनका एवरेज 34 और स्ट्राइक रेट 97.45 रहा है.
अफगानिस्तान के खिलाफ उनकी 125 रनों की पारी भी काफी अहम है. उन्होंने नंबर चार पर उतरकर 79 गेंदों में शतक जड़ा था. यह पारी बताती है कि ईशान सिर्फ नई गेंद के खिलाफ पावरप्ले में बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी नहीं हैं. वह मिडिल ऑर्डर में भी तेजी से रन बना सकते हैं.
बेशक, अंतरराष्ट्रीय वापसी के बाद उन्हें वनडे में ज्यादा मौके नहीं मिले हैं. इस फॉर्मेट में उनकी मैच प्रैक्टिस भी सीमित रही है. लेकिन उनकी बल्लेबाजी क्षमता पर सवाल नहीं है. असली जरूरत उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में आजमाने की है.
टी20 में भी दिखा रहे दम, न्यूजीलैंड दौरे पर बड़ी भूमिका का इंतजार
ईशान किशन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के बाद टी20 फॉर्मेट में भी शानदार बल्लेबाजी की है. न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के आखिरी मुकाबले में उन्होंने 32 गेंदों पर 61 रनों की विस्फोटक पारी खेली. उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और अलग-अलग गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाने की क्षमता साफ दिखी.
अब वनडे सीरीज में भी उनसे इसी तरह की भूमिका की उम्मीद होगी. खास बात यह है कि भारत के टेस्ट खिलाड़ियों के लौटने के बाद ईशान को चौथे और पांचवें वनडे में खेलने का मौका मिलना लगभग तय है. इन दोनों मुकाबलों में शुभमन गिल और केएल राहुल उपलब्ध नहीं होंगे. ईशान को इन मैचों में उपकप्तानी की जिम्मेदारी भी दी गई है.
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें सिर्फ आखिरी दो वनडे में मौका मिलेगा या इससे पहले भी टीम मैनेजमेंट उन्हें आजमाएगा? अगर ईशान को वर्ल्ड कप की तैयारी में गंभीरता से देखा जा रहा है तो उन्हें अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर खेलने का मौका देना जरूरी होगा.
2027 वर्ल्ड कप के लिए ईशान बनाम जायसवाल, किसका पलड़ा भारी?
यह मुकाबला सिर्फ दो बल्लेबाजों के बीच नहीं है. यह दो अलग-अलग तरह की उपयोगिता का सवाल है. जायसवाल एक विशेषज्ञ ओपनर हैं, जिनका रिकॉर्ड शानदार है. ईशान के पास ओपनिंग के साथ विकेटकीपिंग और मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी का विकल्प भी है.
वर्ल्ड कप में चयनकर्ताओं को यह देखना होगा कि उन्हें किस तरह के कॉम्बिनेशन की जरूरत है. अगर टीम को अतिरिक्त विशेषज्ञ ओपनर चाहिए तो जायसवाल की दावेदारी मजबूत रहेगी. लेकिन अगर एक ऐसे खिलाड़ी की तलाश है, जो तीन भूमिकाओं में काम आ सके तो ईशान का दावा मजबूत हो सकता है.
ईशान को 2023 वनडे वर्ल्ड कप से पहले भी इस बहुउपयोगिता का फायदा मिला था. उस समय दोहरा शतक लगाने के बावजूद वह पहली पसंद की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना सके थे, लेकिन उनकी उपयोगिता ने उन्हें टीम के दावेदारों में बनाए रखा था.
अब 2027 का वर्ल्ड कप सामने है. ईशान के पास खुद को साबित करने का मौका है और जायसवाल के सामने अपनी जगह वापस हासिल करने की चुनौती. चयनकर्ताओं के लिए असली सवाल यह नहीं होगा कि कौन बेहतर बल्लेबाज है, बल्कि यह होगा कि 15 खिलाड़ियों की टीम में कौन ज्यादा काम आ सकता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क