आयरलैंड के खिलाफ 0-2 की हार ने टीम इंडिया के लिए अब बहानों की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी है. बल्लेबाजी फ्लॉप रही, जिन खिलाड़ियों पर भरोसा जताया गया वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे... लेकिन 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अब भी डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में अगर इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भी उन्हें मौका नहीं मिलता, तो यह सिर्फ चयन का फैसला नहीं, बल्कि प्रदर्शन के साथ न्याय पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा.
इंग्लैंड में टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार (1 जुलाई) को चेस्टर-ली-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा. यह मैच भारतीय समयानुसार रात 10:00 बजे शुरू होगा.
टीम इंडिया के सहायक कोच रयान टेन डोशेट खुद मान चुके हैं कि वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार हैं. इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट 'प्रोसेस' का तर्क दे रहा है. अब इंग्लैंड सीरीज में सबसे बड़ी नजर इसी बात पर होगी कि क्या लगातार दो हार के बाद आखिरकार टीम मैनेजमेंट अपनी सोच बदलेगा या फिर वैभव का इंतजार एक बार फिर लंबा हो जाएगा.
आयरलैंड की हार अब अतीत नहीं... इंग्लैंड में देनी होगी परीक्षा
टी20 विश्व कप की तैयारियों के बीच टीम इंडिया को जिस शुरुआत की उम्मीद थी, आयरलैंड दौरे ने उसकी ठीक उल्टी तस्वीर पेश कर दी. दो मैच... दो हार... और बल्लेबाजी पूरी तरह बेनकाब.
यह सीरीज उस टीम मैनेजमेंट की भी परीक्षा है, जिसने आयरलैंड में कई बड़े फैसले लिए और अब उन्हीं फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं.
सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत सीरीज कैसे जीतेगा, बल्कि यह भी है कि क्या वैभव सूर्यवंशी का इंतजार आखिर खत्म होगा?
'वैभव तैयार हैं'... लेकिन क्या टीम भी तैयार है?
टीम इंडिया के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने साफ कहा है कि 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार दिखते हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि बाकी खिलाड़ियों की तरह उन्हें भी 'प्रोसेस' से गुजरना होगा.
यहीं से असली बहस शुरू होती है. जब खिलाड़ी तैयार है...जब टीम लगातार हार रही है... जब जिन खिलाड़ियों को मौका मिला, वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे...तो फिर आखिर किस 'सही समय' का इंतजार किया जा रहा है?
क्रिकेट में प्रक्रिया महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन आखिरकार टीम प्रदर्शन से चलती है. इंग्लैंड सीरीज शायद इसी सवाल का जवाब देगी कि टीम मैनेजमेंट के लिए प्राथमिकता 'प्रोसेस' है या प्रदर्शन.
अब बदलाव का सबसे मजबूत आधार भी मौजूद है
आयरलैंड के खिलाफ संजू सैमसन दोनों मैचों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे. ईशान किशन का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा. यानी अगर टीम मैनेजमेंट बदलाव करना चाहे तो उसके पास ठोस क्रिकेटिंग वजह मौजूद है.
वैभव को शामिल करने के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह बनाई जा सकती है. सवाल सिर्फ इतना है कि क्या चयनकर्ता और कोचिंग स्टाफ इतना बड़ा फैसला लेने का साहस दिखाएंगे?
दिलचस्प बात यह भी है कि आयरलैंड दौरे पर सूर्यांश शेडगे और प्रिंस यादव को डेब्यू का मौका मिला, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले वैभव सूर्यवंशी बेंच पर ही बैठे रहे.
... लेकिन सिर्फ वैभव से नहीं बदलेगी तस्वीर
अगर यह माना जा रहा है कि वैभव के आते ही भारत की सारी बल्लेबाजी समस्याएं खत्म हो जाएंगी, तो यह वास्तविकता से दूर होगा. आयरलैंड में भारतीय बल्लेबाजों की सबसे बड़ी कमजोरी तकनीक नहीं, बल्कि परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता रही. सीम मूवमेंट मिली तो आक्रामक बल्लेबाजी गायब हो गई.
धैर्य की जरूरत पड़ी तो शॉट चयन बिगड़ गया. 183 और 155 जैसे लक्ष्य भी भारत हासिल नहीं कर पाया. तिलक वर्मा ने दूसरे टी20 में जिम्मेदारी जरूर निभाई, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे.
यानी समस्या किसी एक बल्लेबाज की नहीं, पूरी बल्लेबाजी इकाई की है. लेकिन जब पूरी इकाई सवालों के घेरे में हो, तब बदलाव की शुरुआत किसी न किसी जगह से करनी ही पड़ती है. मौजूदा परिस्थितियों में वैभव सूर्यवंशी उस बदलाव का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं.
इंग्लैंड में गलती की कीमत और भारी होगी
अगर आयरलैंड की गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया, तो इंग्लैंड का आक्रमण कहीं ज्यादा खतरनाक है.
- जोफ्रा आर्चर की रफ्तार...
- जोश टंग की अतिरिक्त उछाल...
- साकिब महमूद की स्विंग...
और आदिल राशिद का अनुभव...
इन सबके सामने भारतीय बल्लेबाजों को आईपीएल वाली बल्लेबाजी नहीं, बल्कि परिस्थितियों के मुताबिक क्रिकेट खेलना होगा.
चेस्टर-ली-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड पर टी20 का औसत स्कोर सिर्फ 138 है. यह आंकड़ा साफ बताता है कि यहां गेंदबाजों का दबदबा रहता है. अगर भारत ने आयरलैंड वाली गलतियां दोहराईं तो इंग्लैंड उन्हें और बड़ी सजा दे सकता है.
सिर्फ बल्लेबाज नहीं... गेंदबाज भी कटघरे में
भारत की गेंदबाजी भी आयरलैंड में पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही. नई गेंद से विकेट जरूर मिले, लेकिन बीच के ओवरों में विपक्षी बल्लेबाजों ने आसानी से वापसी कर ली. स्पिन विभाग भी मैच पर नियंत्रण नहीं बना सका.
अब सामने हैरी ब्रूक, जोस बटलर, फिल सॉल्ट, विल जैक्स और जैकब बेथेल जैसे बल्लेबाज होंगे, जो छोटी-सी गलती का भी पूरा फायदा उठाना जानते हैं. यानी अगर बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी ने भी खुद में सुधार नहीं किया, तो भारत के लिए यह सीरीज आसान नहीं होने वाली.
श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर... दोनों के सामने परीक्षा
श्रेयस अय्यर बतौर टी20 कप्तान लगातार दूसरी सीरीज हारने का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे. दूसरी तरफ गौतम गंभीर और चयन समिति के सामने भी चुनौती कम नहीं है.
- क्या वे आयरलैंड वाली प्लेइंग इलेवन पर भरोसा बनाए रखेंगे?
- क्या संजू सैमसन या ईशान किशन में से कोई बाहर होगा?
और सबसे बड़ा सवाल...
- क्या वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार भारत की कैप मिलेगी, या फिर 'प्रोसेस' की कहानी एक बार फिर डेब्यू पर भारी पड़ जाएगी?
अगर लगातार दो हार, शीर्ष क्रम की नाकामी और खुद सहायक कोच के 'वैभव तैयार हैं' वाले बयान के बाद भी टीम मैनेजमेंट नहीं जागता, तो बहस सिर्फ वैभव के डेब्यू की नहीं रहेगी. फिर सवाल यह होगा कि आखिर खिलाड़ी को मौका मिलने का पैमाना क्या है? यही वजह है कि इस बार वैभव सूर्यवंशी को बाहर रखना कई क्रिकेट प्रशंसकों की नजर में सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि टीम इंडिया के भविष्य के साथ बड़ा जोखिम माना जाएगा.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क