अभिषेक शर्मा ने 17 सितंबर को अफगानिस्तान के खिलाफ सिर्फ 30 गेंदों में शतक ठोककर तहलका मचाया था. अब एक महीने बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ 35 गेंदों में सेंचुरी जड़कर उन्होंने फिर बता दिया कि भारतीय टी20 बैटिंग किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है. कभी ऐसे कारनामे सालों तक याद रखे जाते थे, लेकिन अब भारत के बल्लेबाज एक के बाद एक ऐसे धमाके कर रहे हैं कि पिछला रिकॉर्ड भी जल्द पुराना पड़ने लगता है. यही भारतीय टी20 बैटिंग का नया लेवल है, जहां रिकॉर्ड बनाना ही नहीं, उन्हें पीछे छोड़ना भी आम होता जा रहा है.
एसी कुटाई कि गेंदबाजों को सोचने का मौका तक नहीं
वेलिंगटन में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी क्रीज पर उतरी तो न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के पास रणनीति बनाने का वक्त था, लेकिन उसे आजमाने का मौका नहीं मिला. दोनों ने सिर्फ 7.1 ओवरों में 133 रन जोड़ दिए. अभिषेक का बल्ला ऐसा चला कि उनके सामने हर गेंदबाज बेबस नजर आया.
अभिषेक अपने ही सबसे तेज शतक के रिकॉर्ड को तोड़ने की तरफ बढ़ रहे थे. उनका व्यक्तिगत रिकॉर्ड 30 गेंदों में शतक का है, जो फुल मेंबर टीमों के बीच सबसे तेज शतकों में शामिल है. इस बार उन्होंने 35 गेंदों में सेंचुरी पूरी की. दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी ने भी अपने बेखौफ अंदाज से साफ कर दिया कि उनके लिए उम्र नहीं, गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने की क्षमता मायने रखती है.
दोनों की बल्लेबाजी का असर स्कोरबोर्ड पर ही नहीं, विपक्षी टीम की सोच पर भी दिखा. गेंदबाज अपनी योजना के मुताबिक गेंद डालने के बजाय यह सोचने लगे कि अगली गेंद पर बल्लेबाज क्या कर देगा.
'मैंने सोचा, ये कैसे कर पाए!' श्रेयस अय्यर भी हैरान
इस तूफानी बल्लेबाजी की असली तस्वीर भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के बयान में नजर आई. अभिषेक और वैभव के आउट होने के बाद जब संजू सैमसन और श्रेयस अय्यर बल्लेबाजी के लिए आए, तब उन्हें पिच और गेंद की हरकत का अंदाजा हुआ.
अय्यर ने मैच के बाद बताया कि जब वह और संजू बल्लेबाजी करने उतरे, तब गेंद सीम कर रही थी. यानी गेंद में ऐसी हरकत थी, जिससे बल्लेबाजों को परेशानी हो सकती थी. अय्यर के मन में सवाल उठा कि जब गेंद ऐसी हरकत कर रही थी, तो अभिषेक और वैभव ने इतनी आसानी से रन कैसे बना लिए?
यही इस भारतीय बल्लेबाजी की खासियत है. जिस गेंद पर दूसरे बल्लेबाज संभलकर खेलने की सोचते हैं, भारतीय टी20 विशेषज्ञ उसी पर बाउंड्री खोजने की कोशिश करते हैं. गेंदबाज की ताकत और उसकी योजना को समझने के साथ वे उसे अपनी शर्तों पर खेलने के लिए मजबूर कर देते हैं.
कीवी सिर्फ खेलते रहे, भारत ने टी20 का नया फॉर्मूला अपनाया
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस साल टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों का हिसाब भी इस अंतर को समझाता है. दोनों टीमें टी20 वर्ल्ड कप फाइनल समेत नौ बार आमने-सामने आईं और न्यूजीलैंड को आठ मैचों में हार का सामना करना पड़ा. इन मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजों ने कई बार ऐसे लक्ष्य हासिल किए, जिनके सामने सामान्य टी20 रणनीति छोटी पड़ गई.
भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 199 रनों का लक्ष्य 13.2 ओवरों में हासिल किया. इससे पहले 209 रनों का लक्ष्य 15.2 ओवरों में और 154 रनों का लक्ष्य महज 10 ओवर में पार कर दिया था. टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में भी भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255 रन ठोक दिए थे.
यह सिर्फ बड़े स्कोर और तेज रन बनाने का मामला नहीं है. असली फर्क बल्लेबाजी की सोच में है. न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम भी अक्सर पारंपरिक क्रिकेट के सिद्धांतों के मुताबिक पारी आगे बढ़ाती है. वह गेंद की लाइन-लेंथ, मैदान के आकार और उपलब्ध जोखिम को देखकर शॉट खेलती है. भारत के बल्लेबाजों ने इस गणित को बदलने की कोशिश की है.
उनका लक्ष्य केवल खराब गेंद का फायदा उठाना नहीं, बल्कि अच्छी गेंद पर भी गेंदबाज को नुकसान पहुंचाना है. जब बल्लेबाज सीधे मैदान के लंबे हिस्से में ही नहीं, बल्कि छोटे स्क्वायर बाउंड्री की तरफ भी लगातार छक्के लगा सकता है, तो गेंदबाज के लिए सुरक्षित ठिकाने कम पड़ जाते हैं.
अब गेंदबाज नहीं, बल्लेबाज तय करते हैं मुकाबले की शर्तें
क्रिकेट का पारंपरिक नियम है कि गेंदबाज गेंद डालता है और बल्लेबाज उस पर प्रतिक्रिया देता है. लेकिन अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे बल्लेबाज इस क्रम को उलटने की कोशिश करते हैं. वे शुरुआत से ही गेंदबाज को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर देते हैं.
गेंदबाज के सामने मुश्किल यह है कि वह लाइन बदलता है तो बल्लेबाज नए एंगल से हमला करता है. लेंथ बदलता है तो उसे बाउंड्री की तरफ भेजने का खतरा रहता है. फील्ड पीछे करता है तो सिंगल और डबल का रास्ता खुल जाता है. और अगर वह गलती से थोड़ी भी जगह देता है, तो गेंद स्टैंड में पहुंच सकती है.
ऐसे में सही गेंद डालना भी विकेट की गारंटी नहीं रह जाता. भारतीय बल्लेबाजों की ताकत यही है कि वे गेंदबाज के अच्छे ओवर को भी खराब बना सकते हैं. इस अंदाज में जोखिम बहुत है, लेकिन जब बल्लेबाजों के पास इतने तरह के शॉट और इतनी तेज बैट स्विंग हो, तो विपक्षी टीम की योजनाएं बार-बार नाकाम हो सकती हैं.
आईपीएल से तैयार हो रही है तूफानी बल्लेबाजों की फौज
इस बदलाव के पीछे किसी जादुई फॉर्मूले से ज्यादा लगातार अभ्यास, अनुभव और खिलाड़ियों की गहराई है. आईपीएल और घरेलू टी20 क्रिकेट ने भारतीय खिलाड़ियों को आक्रामक बल्लेबाजी के लिए ऐसा मंच दिया है, जहां उन्हें अलग-अलग तरह के गेंदबाजों, मैदानों और मैच परिस्थितियों का सामना करने का मौका मिलता है.
भारत के पास अब सिर्फ एक-दो विस्फोटक बल्लेबाज नहीं हैं. अभिषेक शर्मा किसी भी गेंदबाजी आक्रमण पर टूट पड़ सकते हैं. वैभव सूर्यवंशी को मौका मिले तो वह पहली गेंद से हमला कर सकते हैं. संजू सैमसन और ईशान किशन तेजी से रन बनाने के साथ बड़ी पारी खेलने की क्षमता भी रखते हैं. मध्यक्रम में तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी हैं, जो जरूरत पड़ने पर पारी संभालने और लक्ष्य का पीछा खत्म करने की भूमिका निभाते हैं.
यही गहराई भारत को खास बनाती है. किसी एक बल्लेबाज का दिन खराब हो जाए, तो दूसरा मैच का रुख बदल सकता है. शीर्ष क्रम नाकाम रहे, तो मध्यक्रम के पास मुकाबला निकालने का अनुभव है. जोखिम भरी बल्लेबाजी में हर दिन सफलता की गारंटी नहीं होती, लेकिन ज्यादा खिलाड़ियों के पास इस अंदाज में खेलने की क्षमता हो तो किसी एक के चल निकलने की संभावना बढ़ जाती है.
कहीं हम रोमांच को सामान्य तो नहीं मानने लगे?
भारतीय बल्लेबाजी की सबसे दिलचस्प बात यही है. हर कुछ दिनों में कोई नया रिकॉर्ड बनता है, कोई बल्लेबाज गेंदों की गिनती छोटी कर देता है और कोई लक्ष्य इतना जल्दी हासिल होता है कि विपक्षी टीम को वापसी का मौका तक नहीं मिलता. फिर अगला मैच आता है और पुराना कारनामा चर्चा से बाहर हो जाता है.
अभिषेक के शतक की चर्चा अभी खत्म भी नहीं होती कि वैभव की पारी सामने आ जाती है. संजू की विस्फोटक बल्लेबाजी के बाद ईशान किशन की बड़ी पारी सुर्खियां बटोर लेती है. नतीजा यह है कि असाधारण प्रदर्शन भी कुछ समय बाद सामान्य लगने लगता है.
लेकिन ऐसा होना इन पारियों की अहमियत कम नहीं करता. 30-35 गेंदों में शतक लगाने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, जबरदस्त टाइमिंग, फिटनेस, अभ्यास और दबाव में फैसले लेने की क्षमता चाहिए. हर गेंद पर हमला करने का साहस भी चाहिए, क्योंकि एक गलत फैसला पूरी पारी खत्म कर सकता है.
भारत की टी20 बल्लेबाजी ने इस जोखिम को खत्म नहीं किया है. उसने इस जोखिम को उठाने और उससे बड़े नतीजे हासिल करने की क्षमता विकसित की है. यही वजह है कि गेंदबाजों के लिए चुनौती लगातार बढ़ रही है और दर्शकों के सामने रोमांच का नया पैमाना तैयार हो रहा है.
अब सवाल यह नहीं है कि भारत का अगला बल्लेबाज कितने रन बनाएगा. सवाल यह है कि वह कितनी जल्दी मैच को विपक्षी टीम की पहुंच से बाहर कर देगा. और शायद यही भारतीय टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी उपलब्धि है: जब रिकॉर्ड टूटना खबर होनी चाहिए, तब भारत की बल्लेबाजी अगला रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुटी होती है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क