27 अगस्त 1908, यानी आज ही के दिन एक ऐसे खिलाड़ी ने जन्म लिया, जिसका नाम आगे चलकर महानता का पर्याय बन गया. डोनाल्ड जॉर्ज ब्रैडमैन... यानी सर डॉन ब्रैडमैन. उनकी महानता बताने के लिए आंकड़ों की लंबी फेहरिस्त की जरूरत नहीं पड़ती. टेस्ट क्रिकेट में 99.94 का बल्लेबाजी औसत ही उनकी असाधारण उपलब्धि और अमर विरासत की कहानी कहने के लिए काफी है.
... लेकिन इस महान बल्लेबाज के करियर से जुड़ा एक ऐसा दुर्लभ रिकॉर्ड भी है, जिसमें एक भारतीय का नाम हमेशा के लिए दर्ज है. डॉन ब्रैडमैन को स्टंप करने का यह कारनामा भारत के विकेटकीपर प्रबीर कुमार सेन (प्रोबिर) ने किया था, जिन्हें क्रिकेट जगत प्यार से खोकन सेन के नाम से जानता था.
ब्रैडमैन को टेस्ट में कभी स्टंप नहीं किया गया
ब्रैडमैन का टेस्ट करियर जितना शानदार था, उतना ही उनके विकेट को हासिल करना मुश्किल. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 80 बार बल्लेबाजी की और 70 बार आउट हुए, लेकिन एक बार भी स्टंप नहीं हुए.
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी ब्रैडमैन को स्टंप करना आसान नहीं था. 295 बार आउट हुए ब्रैडमैन को विकेटकीपर सिर्फ 11 बार ही क्रीज से बाहर पकड़ सके.
ऐसे बल्लेबाज को स्टंप करना अपने आप में बेहद दुर्लभ उपलब्धि थी... और यह काम जिस भारतीय विकेटकीपर ने किया, वह थे प्रबीर कुमार सेन.
27 अक्टूबर 1947... और सामने थे 'द डॉन'
कहानी पहुंचती है 1947 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर. आजाद भारत की टीम पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी. टीम की कप्तानी लाला अमरनाथ कर रहे थे.
एडिलेड में भारत का मुकाबला साउथ ऑस्ट्रेलिया से था. सामने वाली टीम की कमान किसी और के हाथ में नहीं, बल्कि खुद डोनाल्ड ब्रैडमैन के हाथ में थी.
रेस्ट डे के बाद मैच के तीसरे दिन भारत को शुरुआती सफलता मिली. वीनू मांकड़ ने ओपनर रेजिनाल्ड क्रेग को 24 रन पर स्टंप कराया. इसके बाद मैदान पर उतरे ब्रैडमैन... दुनिया का सबसे बड़ा रन मशीन क्रीज पर था.
ब्रैडमैन ने 12 रन ही बनाए थे कि मांकड़ की एक गेंद पर वह चूक गए... और विकेट के पीछे खड़े खोकन सेन ने पलक झपकते ही बेल्स उड़ा दीं.
ब्रैडमैन स्टंप..! एक ऐसा दृश्य, जो टेस्ट क्रिकेट में कभी देखने को नहीं मिला था.
खोकन सेन बने 'वन-मैन क्लब' के सदस्य
इस एक स्टंपिंग ने खोकन सेन को भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक अनोखी जगह दिला दी. वह इकलौते भारतीय विकेटकीपर बन गए, जिन्होंने महान डॉन ब्रैडमैन को स्टंप किया था.
खोकन सेन का कद भले ही छोटा था और उनका चेहरा बेहद मासूम व लड़कपन वाला लगता था, लेकिन विकेट के पीछे उनकी फुर्ती किसी बड़े विकेटकीपर से कम नहीं थी. इसी वजह से उन्हें उनके औपचारिक नाम प्रबीर सेन से ज्यादा उनके निकनेम 'खोकन' से जाना जाता था.
भारत का ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरा
1947 (अक्टूबर 1947-फरवरी 1948) का यह दौरा अपने आप में ऐतिहासिक था. मूल योजना अविभाजित भारत की टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे की थी, लेकिन 1947 में देश की आजादी और विभाजन के साथ बदली राजनीतिक परिस्थितियों ने इस योजना को प्रभावित किया.
आजाद भारत की टीम जब ऑस्ट्रेलिया पहुंची तो शुरुआती टेस्ट में उसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा. पहला टेस्ट भारत ने पारी से गंवाया, जबकि बारिश के कारण दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा. इसके बाद खेले गए बाकी तीनों टेस्ट में भी भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा.
लेकिन इन मुश्किलों के बीच खोकन सेन टूर मैचों में लगातार अपनी छाप छोड़ते रहे.
... और ब्रैडमैन की स्टंपिंग उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई. क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाजों में शुमार ब्रैडमैन को टेस्ट क्रिकेट में कोई विकेटकीपर कभी स्टंप नहीं कर सका. लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट के उस दुर्लभ क्लब में एक भारतीय का नाम हमेशा चमकता रहेगा. प्रोबिर 'खोकन' सेन- वह विकेटकीपर जिसने महान डॉन को भी क्रीज से बाहर पकड़ लिया था.
1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए जेके ईरानी के रहते दूसरे विकेटकीपर के तौर पर खोकन सेन को ले जाया गया था. टूर मुकाबलों में शादार विकेटकीपिंग को देखते हुए खोकन को सीरीज के बीच में ही तीसरे टेस्ट में पदार्पण का मौका दिया गया था.
खोकन सेन के टेस्ट करियर में विकेटकीपिंग का दबदबा साफ नजर आता है. 14 टेस्ट मैचों में उन्होंने 20 कैच लपकने के साथ 11 स्टंपिंग की. हालांकि, बल्लेबाजी में वह कोई खास छाप नहीं छोड़ सके. टेस्ट में उनका उच्चतम स्कोर सिर्फ 25 रन रहा. खोकन सेन का 27 जनवरी 1970 को दक्षिण कलकत्ता (अब कोलकाता) में निधन हुआ. उस समय उनकी उम्र महज 43 वर्ष 241 दिन थी.
विश्व मोहन मिश्र