बाढ़ ने पिता छीना, समंदर ने संभाला, दो भाइयों ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास

2018 की केरल बाढ़ में पिता को खोने वाले प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने अब एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर अपने पिता के सपने को पूरा किया है. नोबल और उनके चचेरे भाई मनु फ्रांसिस ने पुरुषों की स्किफ सेलिंग में भारत के लिए सिल्वर जीता. दोनों पिछले 10 साल से साथ सेलिंग कर रहे हैं और यह उनका पहला एशियन गेम्स था.

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एशियन गेम्स का सिल्वर, दो भाइयों की कहानी. (Photo,  Reuters) एशियन गेम्स का सिल्वर, दो भाइयों की कहानी. (Photo, Reuters)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

जिस बाढ़ ने एक बेटे से उसके पिता को छीन लिया, उसी पानी से जुड़े समंदर ने उसे जिंदगी की नई राह दिखा दी. केरल के एर्नाकुलम के प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने अपने चचेरे भाई मनु फ्रांसिस के साथ मिलकर एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया. दोनों ने पुरुषों की स्किफ सेलिंग में सिल्वर मेडल जीता और इस स्पर्धा में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली टीम बन गए.

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नोबल के लिए यह सिल्वर सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं है. इसके साथ 2018 की वह दर्दनाक याद भी जुड़ी है, जब केरल में आई विनाशकारी बाढ़ में उनके मछुआरे पिता की मौत हो गई थी. समंदर उनके घर से कुछ ही दूरी पर था और पिता की तरह नोबल का भी पानी से रिश्ता बचपन से ही गहरा रहा.यही रिश्ता आगे चलकर उन्हें सेलिंग तक ले गया.

नोबल ने 13 साल की उम्र में, 2009 में सेलिंग शुरू की थी. उस समय वह सातवीं कक्षा में पढ़ते थे. उनके चचेरे भाई मनु फ्रांसिस ने 14 साल की उम्र में इस खेल को अपनाया. दोनों ने केरल के बैकवाटर्स से शुरुआत की और करीब 10 साल से साथ-साथ सेलिंग कर रहे हैं.

नोबल ने कहा, 'मेरे पिता मछुआरे थे और हमारा घर समंदर के बहुत करीब है. इसलिए हमारा समंदर से जुड़ाव रहा है. इसी वजह से हमारे लिए सेलिंग शुरू करना आसान था.'

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लेकिन इस सफर में एक ऐसा मोड़ भी आया, जिसने नोबल की जिंदगी बदल दी. 2018 की केरल बाढ़ में उन्होंने अपने पिता को खो दिया. आज एशियन गेम्स का सिल्वर उनके लिए उसी अधूरे सपने को पूरा करने जैसा है.

उन्होंने कहा, 'मेरे पिता अब नहीं हैं. 2018 में केरल में आई बाढ़ में उनकी मौत हो गई. आज के सिल्वर मेडल के साथ मैंने उससे ज्यादा हासिल किया है, जो मेरे पिता चाहते थे. उनके जाने के बाद मेरी मां मेरा सबसे बड़ा सहारा रही हैं.'

नोबल ने यह मेडल अपने पिता, मां, कोच, शुभचिंतकों और देशवासियों को समर्पित किया.

दो भाइयों की 10 साल पुरानी साझेदारी

प्रिंस और मनु सिर्फ रिश्ते में भाई नहीं हैं, बल्कि एक दशक से एक-दूसरे के साथी भी हैं. दोनों ने मुंबई यॉटिंग नोड में ट्रेनिंग की और 2023 में एशियन चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. यही लंबी साझेदारी एशियन गेम्स में उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

मनु ने कहा, 'हम चचेरे भाई हैं और साथ बड़े हुए हैं. पिछले 10 साल से साथ सेलिंग कर रहे हैं. हमें ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं पड़ती. हम एक-दूसरे को समझते हैं और खराब दिन को भी आसानी से संभाल लेते हैं.'

दोनों ने पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया और पहली ही कोशिश में सिल्वर अपने नाम कर लिया. नोबल ने माना कि तेज हवाओं ने गोल्ड की उम्मीद को जरूर प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने इसे बहाना नहीं माना.

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उन्होंने माना, 'पहले एशियन गेम्स में सिल्वर जीतना हमारे लिए बहुत खास है. यह गोल्ड हो सकता था, लेकिन तेज हवाओं की स्थिति थी। हालांकि यह कोई बहाना नहीं है.'

अब इस सिल्वर के बाद दोनों का सपना सिर्फ अपने पदक तक सीमित नहीं है. मनु चाहते हैं कि उनकी कामयाबी भारत में सेलिंग को भी नई पहचान दे.

उनका अगला लक्ष्य नवंबर में होने वाली नेशनल चैम्पियनशिप है. लेकिन एशियन गेम्स का यह सिल्वर हमेशा उनकी कहानी का सबसे खास अध्याय रहेगा...एक ऐसी कहानी, जिसमें बाढ़ ने पिता छीना, समंदर ने राह दिखाई और दो भाइयों ने उसी पानी पर भारत का इतिहास लिख दिया.

इनपुट- PTI
 

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