भारत के स्टार पैरा एथलीट निषाद कुमार ने मंगलवार को एशियन पैरा गेम्स में दूसरा गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. वह एक ही संस्करण में दो गोल्ड मेडल जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए. वहीं, पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों मेडल अपने नाम कर क्लीन स्वीप किया.
निषाद ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.04 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता. इस दौरान उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया. इससे पहले उन्होंने सोमवार को पुरुषों की लॉन्ग जंप T47 स्पर्धा में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.
इससे पहले हांगझोउ में आयोजित पिछले एशियन पैरा गेम्स में अंकुर धामा ने पुरुषों की 5000 मीटर T11 और 1500 मीटर T11 स्पर्धाओं में दो गोल्ड जीते थे. वहीं, बिना हाथों के जन्मी तीरंदाज शीतल देवी ने महिला इंडिविजुअल कंपाउंड ओपन और मिक्स्ड टीम कंपाउंड ओपन स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए थे.
T47 कैटेगरी में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनके हाथ के ऊपरी हिस्से में दिव्यांगता होती है. निषाद जब महज छह साल के थे, तब हिमाचल प्रदेश के अंब स्थित उनके परिवार के खेत में घास काटने वाली मशीन से उनका दायां हाथ कट गया था. इसके बावजूद उन्होंने खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है.
डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप
भारत ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो F44/64 स्पर्धा में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए तीनों मेडल जीत लिए. देवेंद्र कुमार ने 49.71 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल अपने नाम किया. राकेश ने सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता.
इस स्पर्धा में चार खिलाड़ी मैदान में उतरे थे और भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक अपने नाम कर लिए. F44 कैटेगरी में निचले अंगों में दिव्यांगता वाले ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो बिना कृत्रिम अंग के प्रतिस्पर्धा करते हैं. वहीं, F64 कैटेगरी के खिलाड़ी कृत्रिम अंग का इस्तेमाल करते हैं
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क