भारत के मॉनसून पर अल-नीनो का साया एक बार फिर लंबा पड़ता दिख रहा है. यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) की नई C3S मल्टी-सिस्टम फोरकास्ट रिपोर्ट ने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए चिंताजनक तस्वीर पेश की है.
रिपोर्ट के अनुसार, देश के बड़े हिस्सों- महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक- में बारिश सबसे कम (Lowest Tercile) में रहने की संभावना है. जून की तुलना में जुलाई के मॉडल रन में आउटलुक को और डाउनग्रेड कर दिया गया है. यह स्थिति किसानों, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
यह भी पढ़ें: 10 हजार KM लंबा बादलों का कारवां, बंगाल की खाड़ी पहुंचा तो झमाझम होगी बारिश
विश्व मौसम संगठन (WMO) और NOAA के अनुसार, जब भी भारत में मजबूत अल-नीनो रहा है तब औसतन 10-20% कम बारिश होती है. 2026 में अल-नीनो पहले के अनुमान से ज्यादा मजबूत दिख रहा है, जो अगस्त से अक्टूबर तक अपना प्रभाव बनाए रख सकता है.
ECMWF की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-नीनो के साथ इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी कमजोर और देरी से विकसित हो रहा है. IOD आमतौर पर अल-नीनो के खराब प्रभाव को कम करता है, लेकिन इस बार उसकी गैरमौजूदगी स्थिति को और बिगाड़ रही है.
ECMWF रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
C3S मल्टी-सिस्टम फोरकास्ट के अनुसार...
IPCC की सिक्स्थ एसेसमेंट रिपोर्ट और जर्नल ऑफ क्लाइमेट बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल-नीनो घटनाएं ज्यादा तेज और बार-बार हो रही हैं.
यह भी पढ़ें: अब मौसम की हर चाल पर नजर! नया मॉडल बताएगा कहां फटेगा बादल, कहां बरसेगी आफत
भारत पर होने वाला संभावित असर
यह भी पढ़ें: यूरोप में गर्मी का 'डेथ स्पाइक', 7 दिन में 10 हजार से ज्यादा मौतें
ECMWF के अलावा IMD, NOAA और अन्य मॉडल भी निगरानी कर रहे हैं. हालांकि, मौसम पूर्वानुमान में 2-3 महीने आगे की सटीकता सीमित होती है. अगर IOD अचानक मजबूत हुआ तो स्थिति कुछ सुधर सकती है.
ECMWF की रिपोर्ट अगले तीन महीनों के लिए चेतावनी दे रही है. अल-नीनो के मजबूत प्रभाव और कमजोर IOD के कारण भारत में बारिश सामान्य से काफी कम रहने की आशंका है. यह जलवायु परिवर्तन के दौर में एक नई चुनौती है. समय रहते तैयारी से नुकसान को कम किया जा सकता है.
ऋचीक मिश्रा