लाल आंखें, बालों जैसे पैर और 3 होंठ... समुद्र में मिलीं मकड़ी की 2 नई प्रजातियां

समुद्र की दुनिया में वैज्ञानिकों को दो नई प्रजातियां मिली हैं, जिनकी बनावट काफी अलग है. एक की लाल आंखें और बालों जैसे कांटे हैं, जबकि दूसरी के शरीर पर छोटे परजीवी चिपके रहते हैं. इनकी खोज से समुद्री जीवों की दुनिया के बारे में नई जानकारी मिली है.

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इस तरह की मकड़ियों की दो प्रजाति मिली है. (Photo: Cormac Toler-Scott) इस तरह की मकड़ियों की दो प्रजाति मिली है. (Photo: Cormac Toler-Scott)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

कनाडा के पास स्थित सालिश सागर में वैज्ञानिकों को समुद्री मकड़ी की दो नई प्रजातियां मिली हैं. इनकी खोज सितंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई. ये जीव समुद्र में 18 मीटर यानी करीब 59 फीट की गहराई पर मिले. इनमें से एक की आंखें लाल हैं और पैरों पर बाल जैसे लंबे कांटे हैं, जबकि दूसरी के शरीर पर अक्सर छोटे-छोटे परजीवी चिपके रहते हैं.

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वैज्ञानिकों ने इन दोनों प्रजातियों के नाम कैलिपैलेनी पिलोसस्पीडीज (Callipallene pilosuspedes) और टैनिस्टाइलम किक्सिन (Tanystylum kiixin) रखे हैं. इनकी बनावट और शरीर की कुछ खास बातें एक-दूसरे से अलग हैं. इस खोज से समुद्र में रहने वाले छोटे जीवों के बारे में नई जानकारी मिली है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके में अभी भी कई ऐसी प्रजातियां हो सकती हैं, जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है.

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पहली प्रजाति के पैरों पर हैं बाल जैसे कांटे

पहली प्रजाति का नाम कैलिपैलेनी पिलोसस्पीडीज है. इसके पैरों के निचले हिस्से पर लंबे और मुड़े हुए कांटे जैसे बाल होते हैं. इसका शरीर पतला है और आंखें लाल हैं. इसके मुंह के पास तीन होंठ जैसी बनावट भी होती है. इसके शरीर पर छोटे पंजे भी पाए जाते हैं.

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इस प्रजाति की एक खास बात इसके पैर जैसे दिखने वाले अंग हैं. इनका इस्तेमाल चलने के लिए नहीं होता. ये अंग शरीर और पैरों की सफाई करने में मदद करते हैं. वैज्ञानिकों ने माइक्रोस्कोप से देखा कि यह जीव इन अंगों को अपने पैरों के चारों ओर लपेटता है. इन पर कंघी जैसे छोटे कांटे होते हैं, जिनसे यह अपने पैरों को साफ करता है.

दूसरी प्रजाति के शरीर पर रहते हैं छोटे परजीवी

दूसरी प्रजाति का नाम टैनिस्टाइलम किक्सिन है. इसकी आंखें काली हैं और शरीर का पिछला हिस्सा घंटे जैसा दिखता है. इसके पंजे छोटे उभार जैसे होते हैं. पहली प्रजाति के मुकाबले इसके अंडे रखने वाले अंग छोटे हैं. ये अंग आसानी से मुड़ भी नहीं पाते. इस वजह से यह अपने शरीर की सफाई अच्छी तरह नहीं कर पाती.

वैज्ञानिकों ने देखा कि इस प्रजाति के शरीर पर अक्सर छोटे-छोटे परजीवी चिपके रहते हैं. परजीवी ऐसे जीव होते हैं, जो दूसरे जीव के शरीर पर रहकर उससे भोजन लेते हैं. इस प्रजाति के नाम में इस्तेमाल हुआ किक्सिन शब्द समुद्र की लहरों की आवाज से जुड़ा है. यह नाम उस जगह के पास लहरों के टकराने से आने वाली आवाज के आधार पर रखा गया है, जहां पहले एक स्थानीय गांव था.

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समुद्री मकड़ियां असली मकड़ियां नहीं हैं

नाम में मकड़ी होने के बावजूद समुद्री मकड़ियां असली मकड़ियों से अलग होती हैं. हालांकि, इनका संबंध मकड़ियों, बिच्छुओं और हॉर्सशू क्रैब जैसे जीवों से है. इनके शरीर में चार हिस्से होते हैं और आमतौर पर आठ लंबे पैर होते हैं. कुछ प्रजातियों में पैरों की संख्या 12 तक हो सकती है. उथले पानी में रहने वाली कई समुद्री मकड़ियों की चार आंखें होती हैं.

इनका मुंह कई बार इनके शरीर से भी बड़ा होता है. ये अपने मुंह से नरम शरीर वाले छोटे समुद्री जीवों का रस चूसकर भोजन करती हैं. इनके शरीर के अंदर भोजन पचाने और प्रजनन से जुड़े अंग पैरों तक फैले होते हैं. नर समुद्री मकड़ियां अपने पैरों के एक खास जोड़े पर अंडे रखती हैं. वे बच्चों के निकलने तक अंडों को अपने साथ रखती हैं.

सालिश सागर में अब तक मिली थीं सिर्फ 17 प्रजातियां

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सालिश सागर में समुद्री जीवों की कई तरह की प्रजातियां रहती हैं. इसके बावजूद यहां उथले पानी में रहने वाली समुद्री मकड़ियों की सिर्फ 17 प्रजातियों की ही पक्की जानकारी दर्ज थी. इन दो नई प्रजातियों की खोज से पता चला है कि यहां अभी और भी अनजान जीव मिल सकते हैं.

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इस अध्ययन के प्रमुख लेखक कॉर्मैक टॉलर-स्कॉट ने समुद्री जीवों पर जलवायु परिवर्तन और इंसानी गतिविधियों के असर को समझने में रुचि दिखाई. उन्होंने बताया कि इस इलाके में रहने वाले जीवों और उनके जीवन के बारे में कम जानकारी होने के कारण यह समझना मुश्किल है कि उन पर क्या असर पड़ रहा है.

सालिश सागर के किनारे आबादी बढ़ रही है और तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं. ऐसे में यहां रहने वाले जीवों की पहचान करना जरूरी है. इससे वैज्ञानिकों को पता लगाने में मदद मिलेगी कि समुद्र के किन इलाकों को बचाने की ज्यादा जरूरत है. इन नई प्रजातियों की खोज से समुद्री जीवों को समझने और उनकी रक्षा करने में मदद मिल सकती है.

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