सफेद, नीला या हरा... जानिए दुनिया में मोरों की कितनी प्रजातियां हैं और कहां बसती हैं

रंग अलग, पंख अलग और ठिकाने भी अलग... लेकिन क्या हर मोर की प्रजाति भी अलग होती है? सफेद, नीले और हरे मोर से जुड़े ऐसे वैज्ञानिक तथ्य, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे.

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एक पार्क में नाचता हुआ सफेद मोर. (Photo: Getty) एक पार्क में नाचता हुआ सफेद मोर. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST

दुनिया के सबसे खूबसूरत पक्षियों में मोर का नाम सबसे ऊपर आता है. भारत में इसे राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा मिला है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में मोर की कितनी प्रजातियां हैं? क्या सफेद, नीला और हरा मोर तीन अलग-अलग प्रजातियां हैं? इन सवालों को लेकर लोगों के बीच अक्सर भ्रम रहता है. बर्डलाइफ इंटरनेशनल के मुताबिक के मुताबिक दुनिया में मोर की सिर्फ तीन जीवित प्रजातियां हैं. इनके अलावा सफेद या दूसरे रंगों वाले मोर अलग प्रजाति नहीं हैं.

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बर्डलाइफ इंटरनेशनल, जो IUCN रेड लिस्ट के लिए पक्षियों की आधिकारिक संस्था है, उसके मुताबिक दुनिया में मोर की तीन प्रजातियां हैं. इनमें भारतीय मोर (Indian Peafowl), हरा मोर (Green Peafowl) और कांगो मोर (Congo Peafowl) शामिल हैं. ये तीनों दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं. इनकी पहचान, रहने की जगह और संरक्षण की स्थिति भी अलग-अलग है.

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मोर की पहचान उसके खूबसूरत पंखों से होती है, लेकिन वैज्ञानिक किसी पक्षी की प्रजाति सिर्फ उसके रंग से तय नहीं करते. उसके शरीर की बनावट, जीन और प्राकृतिक आवास को भी देखा जाता है. यही वजह है कि सफेद मोर दिखने में अलग होने के बावजूद अलग प्रजाति नहीं माना जाता.

भारतीय मोर (Indian Peafowl)

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भारतीय मोर का वैज्ञानिक नाम पावो क्रिस्टेटस (Pavo cristatus) है. यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है. इसके अलावा यह श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में भी पाया जाता है. बाद में इसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोप के कई देशों में भी बसाया गया. IUCN रेड लिस्ट के मुताबिक फिलहाल इस प्रजाति पर विलुप्त होने का खतरा नहीं है.

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हरा मोर (Green Peafowl)

हरे मोर का वैज्ञानिक नाम पावो म्यूटिकस (Pavo muticus) है. यह म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, दक्षिणी चीन और इंडोनेशिया के जावा द्वीप में पाया जाता है. बर्डलाइफ इंटरनेशनल के मुताबिक जंगलों के कम होने और शिकार की वजह से इसकी संख्या घट रही है. इसी वजह से IUCN रेड लिस्ट में इसे विलुप्त होने के खतरे वाली प्रजाति माना गया है.

कांगो मोर (Congo Peafowl)

कांगो मोर का वैज्ञानिक नाम अफ़्रोपावो कांगेंसिस (Afropavo congensis) है. यह दुनिया का इकलौता मोर है जो अफ्रीका में पाया जाता है. इसका घर सिर्फ डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के घने जंगल हैं. यह भारतीय मोर से आकार में छोटा होता है और इसके पंख भी उतने चमकीले नहीं होते.

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क्या सफेद मोर अलग प्रजाति है?

इस बात को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम रहता है. सैन डिएगो ज़ू वाइल्डलाइफ एलायंस और स्मिथसोनियन का नेशनल जू के मुताबिक सफेद मोर कोई अलग प्रजाति नहीं है. यह भारतीय मोर का ही एक दुर्लभ रंग रूप (Leucistic Variant) है. यानी इसके पंख आनुवंशिक बदलाव की वजह से सफेद हो जाते हैं. इसलिए वैज्ञानिक आज भी दुनिया में मोर की सिर्फ तीन जीवित प्रजातियों को ही मानते हैं.

                                                                                                                                                 रिपोर्टः साक्षी प्रजापति

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