नंदनकानन चिड़ियाघर में शिशु ओरंगुटान को बुखार, इलाज की खास व्यवस्था

नंदनकानन चिड़ियाघर में क्वारंटाइन में रखे 5 शिशु ओरंगुटान में से एक को बुखार हो गया है. इलाज चल रहा है. अधिकारियों ने विशेष देखभाल की व्यवस्था की है. तस्करी की जांच तेज कर दी गई है.

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पांच ओरंगुटान ओडिशा के बालासोर के जंगलों में मिले थे. (File Photo: PTI) पांच ओरंगुटान ओडिशा के बालासोर के जंगलों में मिले थे. (File Photo: PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में 8 सितंबर से क्वारंटाइन में रखे गए पांच शिशु ओरंगुटान में से एक को बुखार हो गया है. अधिकारियों ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जानवर की हालत पर कड़ी नजर रखी जा रही है. उन्हें बालासोर जिले के भिचित्रापुर जंगल से बचाया गया था. 

एक शिशु में रविवार से शरीर का तापमान ज्यादा बना हुआ है. दवा देने पर बुखार उतर जाता है लेकिन फिर लौट आता है. फिलहाल वह स्थिर है और लगातार चिकित्सा निगरानी में है. बाकी चार शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं. सामान्य व्यवहार कर रहे हैं.

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चिड़ियाघर में हाल ही में 58 नए जानवर आने से क्वारंटाइन एरिया अपेक्षाकृत भीड़भाड़ वाला हो गया था. लेकिन ओरंगुटान के लिए अलग से व्यवस्था की गई है. उन्हें तापमान नियंत्रित कमरे में रखा गया है और वहां विशेष मच्छरदानी भी लगाई गई है. पशु चिकित्सक चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बुखार का कारण तनाव, थकान या पर्यावरण में अचानक बदलाव हो सकता है. 

ओरंगुटान आमतौर पर वर्षावन जैसे वातावरण में रहते हैं. नए परिवेश में ढलने में उन्हें थोड़ा समय लगेगा. ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र के प्रमुख आदित्य आचार्य के अनुसार ओरंगुटान में बुखार की निगरानी इंसानों की तरह ही की जाती है. उच्च तापमान पर पैरासिटामोल आधारित दवा दी जाती है. भोजन की मात्रा भी कम रखी जाती है.

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आहार, मनोरंजन और सरकारी कदम

चिड़ियाघर के मुख्य वन्यजीव संरक्षक और प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके झा ने बताया कि तीन परिचारक और डॉक्टर लगातार शिशुओं की देखभाल कर रहे हैं. उन्हें हर दो घंटे में दूध पिलाया जा रहा है. साथ ही सेब और केले का रस तथा उबले आलू नियमित रूप से दिए जा रहे हैं. 

विशेषज्ञों द्वारा तैयार डाइट चार्ट के अनुसार यह आहार दिया जा रहा है. तनाव कम करने के लिए शिशुओं को नरम खिलौने, झूले उपलब्ध कराए गए हैं और संगीत भी सुनाया जा रहा है. ओडिशा सरकार ने इन पांच शिशु ओरंगुटान की देखभाल के लिए पांच सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है. समिति उनके कल्याण और रखरखाव से जुड़े मुद्दों का आकलन करेगी तथा जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सलाह भी ले सकती है.

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बचाव की कहानी और तस्करी की जांच

ये 5 शिशु ओरंगुटान 8 सितंबर को बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक स्थित भिचित्रापुर जंगल से बचाए गए थे. उसी रात उन्हें नंदनकानन के क्वारंटाइन केंद्र में लाया गया. इस मामले में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंका जताई जा रही है. ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने जांच तेज कर दी है. 

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अधिकारियों का कहना है कि शिशुओं को पूरी सुरक्षा और उचित देखभाल मिल रही है. बुखार वाले शिशु की हालत स्थिर होने के बावजूद सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि ये जानवर विदेशी प्रजाति के हैं और नए माहौल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति नाजुक हो सकती है.

नंदनकानन चिड़ियाघर में इन शिशुओं की देखभाल का काम चुनौतीपूर्ण है लेकिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की टीम लगातार प्रयास कर रही है कि सभी शिशु स्वस्थ रहें. पर्यावरण परिवर्तन और तनाव को कम करने के उपायों से उम्मीद है कि जल्द ही बुखार पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगा. इस घटना ने वन्यजीव तस्करी और विदेशी प्रजातियों के संरक्षण दोनों मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है.

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